सेहत पर बुरा असर डालता है सर्दियों का कोहरा

सर्दियों का मौसम अपने साथ स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें लेकर आता है, कोहरे में मौजूद प्रदूषण और हानिकारक केमिकल का बुरा असर स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है और स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें होने लगती हैं।

एक्सरसाइज और फिटनेस By Nachiketa Sharma / Jan 06, 2015
सर्दियों में सेहत

सर्दियों में सेहत

सर्दियों का मौसम अपने साथ कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें लेकर आता है। जो लोग किसी बीमारी से पीडि़त हैं उनके लिए समस्‍या बढ़ जाती है, यह मौसम बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वालों के लिए खासा परेशानी वाला होता है। सर्दियों में फ्लू, सांस की परेशानी, कानों में संक्रमण और पेट की समस्याएं खासतौर से तंग करने लगती हैं। ज्यादातर सामान्य वयस्क जहां साल में तीन से चार बार सर्दी-जुकाम का शिकार होते हैं, वहीं गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और कमजोर इम्युनिटी वालों के लिए परेशानी ज्यादा बड़ी होती है। यह मौसम डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए भी मुश्किल भरा होता है। सर्दियों में होने वाला कोहरा भी नुकसानदेह होता है।

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कोहरा क्‍या होता है

कोहरा क्‍या होता है

सर्दियों के मौसम में कोहरा होता है। जब आर्द्र हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है तब जलवाष्प संघनित होकर जल की सूक्ष्म बूंदें बनाती है। कभी-कभी अनुकूल परिस्थितियों में हवा के बिना ऊपर उठे ही जलवाष्प जल की छोटी बूंदों में बदल जाती है तब हम इसे ही कोहरा कहते हैं। यानी बूंदों के रूप में संघनित जलवाष्प के बादल को कोहरा कहा जाता है। यह वायुमंडल में जमीन की सतह के थोड़ा ऊपर ही फैला रहता है। कोहरा सेहत को नुकसान पहुंचता है।

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कोहरा क्‍यों है नुकसानदायक

कोहरा क्‍यों है नुकसानदायक

कोहरा जब वायु में मौजूद प्रदूषण के संपर्क में आता है तब नुकसानदेह हो जाता है। हवा में बढ़ते प्रदूषण के कारण स्‍मॉग यानी धूम-कोहरा होता है। स्‍मॉग में कोहरे के साथ प्रदूषण से निकलने वाले सल्‍फर डाईऑक्‍साइड, नाइ्ट्रोजन डाइऑक्‍साइड और कारखानों से निकले केमिकल जैसे - कॉर्बन मोनोऑक्‍साइड जैसे हानिकारक केमिकल होते हैं। ये केमिकल सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं और सेहत को नुकसान पहुचाते हैं।

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फेफड़े की समस्‍या

फेफड़े की समस्‍या

कोहरे के कारण फेफड़े की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और फेफड़ा सही तरीके से काम नहीं कर पाता है। क्‍योंकि कोहरे के कारण हवा प्रदूषण में मौजूद केमिकल सांस के जरिये फेफड़े तक पहुंचते हैं और फेफड़े की कार्यक्षमता को कम कर देते हैं। इसके कारण सांस लेने में समस्‍या, सांस की कमी, छींकने और खांसने की समस्‍या होती है।

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सांस संबंधी समस्‍या

सांस संबंधी समस्‍या

सर्दियों में प्रदूषित कोहरे के कारण सांस संबंधित समस्‍यायें होने लगती हैं। धुएं और सस्पेंडिड पार्टिकल्स के इर्द-गिर्द जमने से बना स्मोग (प्रदूषित कोहरा) श्वसन तंत्र के लिए नुकसानदायक होता है। इसके कारण आंखों में जलन, आंसू, नाक में खुजली, गले में खरास और खांसी जैसी सामान्य दिक्कतों के साथ श्वांस के रोगियों को गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। सबसे ज्यादा समस्‍या बुजुर्गों और बच्‍चों को होता है।

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अस्‍थमा की समस्‍या

अस्‍थमा की समस्‍या

सर्दियों के कोहरे के कारण अस्‍थमा की समस्‍या हो सकती है, जो लोग पहले से अस्‍थमा से ग्रस्‍त हैं उनकी परेशानी बढ़ सकती है। प्रदू‍षित कोहरे के कारण सांस लेने में समस्‍या होती है। अस्‍थमा ग्रस्‍त लोगों को सांस लेने में दिक्‍कत होती है।

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ब्रोंकाइटिस

ब्रोंकाइटिस

कोहरे के कारण ब्रोंकाइटिस की समस्‍या भी बढ़ जाती है। ब्रोंकाइटिस फेफड़े के अंदर स्थित श्वांस नलियों की सूजन व मियादी संक्रमण को कहते हैं। इसके होने का प्रमुख वजह होती है सीने में स्थित श्वांस नली और उसकी शाखाओं में बार-बार होने वाला संक्रमण। इसके अलावा अगर कोई निमोनिया या टीबी की बीमारी से ग्रस्‍त है तो उसे ब्रोंकाइटिस होने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में कोहरे के कारण समस्‍या और भी बढ़ जाती है।

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आंखों की समस्‍या

आंखों की समस्‍या

कोहरे में मौजूद प्रदूषण के कारण आंखों की समस्‍या बढ़ जाती है। प्रदूषण में मौजूद हानिकारक केमिकल जब आखों में जाते हैं तो इनके कारण आंखों में सूजन, आंखों में जलन, आंखों के लाल होने जैसी समस्‍यायें होती हैं। इससे बचने के लिए आंखों में साफ पानी के छींटे मारें, और प्रदूषण वाली जगहों पर जानें से बचें। खानपान का विशेष ध्‍यान रखें।

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