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मानसून में पैरों की बदबू को ऐसे करें दूर

बरसात में भीगने से सबसे ज्यादा नुकसान पैरों का होता है, इसके कारण पैरों से बदबू निकलने लगती है, इसके कारण आप शर्मिंदा हो सकते हैं, मानसून में पैरों की बदबू दूर करने के लिए ये तरीके आप आजमा सकते हैं।

तन मन By Aditi Singh Jul 15, 2015

मानसून मे पैरों की देखभाल

मानसून जितना सुहाना होता है सेहत के लिए उतना ही परेशानियों भरा होता है। मानसून में हम अपने खान-पान और चेहरे की त्वचा का तो ख्याल रख लेते हैं लेकिन पैरों के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। जबकि इस मौसम में सबसे ज्यादा पैरों की समस्‍या होती है। पैरों में बदबू और फंगस लगने जैसी समस्यायें आपको परेशान कर सकती हैं। इससे निपटने के लिए हम आपको यहां कुछ टिप्स दे रहें हैं।
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बारिश में पैरों में बदबू की समस्‍या

बारिश के दिनों में चिपचिप और नमी रहती है तथा वातावरण में भी अजीब सा परिवर्तन हो जाता है। पैरों में हमेशा नमी बने रहने के कारण बदबू आने लगती है। कई लोगों को इस मौसम में पैरों में छाले पड़ने लगते है या खाल निकलने लगती है। बारिश के दिनों में अगर पैरों को साफ न रखा जाएं तो लेप्‍टोस्पियोरिसिस नामक बीमारी होने का खतरा रहता है।
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सही फुटवियर

बारिश के दिनों में पैरों को किसी भी संक्रमण से बचाने के लिए सही फुटवियर पहनना बेहद आवश्‍यक है। बरसाती तरीके के अच्‍छे फुटवियर पहनें। इससे पैरों में हवा लगती रहेगी और बारिश में गीले होने के बाद पैर सूख भी जाएंगे। ये फुटवियर गंदे हो जाने पर आसानी से धुले भी जा सकते हैं। बारिश के दिनों में प्‍लास्टिक या रबर के फ्लोटर पहनने का चलन बहुत पुराना है। ये अच्‍छे और आरामदायक रहते हैं। इनसे पैरों में हवा लगती रहती है और साथ ही साथ आपका स्‍टाइल और लुक भी नहीं बिगड़ता है।
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रेन बूट

इन दिनों मार्केट में रेन बूट का प्रचनल है। महिलाओं के लिए ये बूट स्‍पेशल कलर्स और डिजाइन में आते हैं जिन्‍हे हर तरह ही ड्रेस के साथ मैच करके पहना जा सकता है। ये बूट, पैरों को कवर रखते हैं और पानी में भीगने से बचाते हैं।बारिश के दिनों में फ्लिप-फ्लॉप सबसे सही रहते हैं। ये रबर के बने होते हैं और फिसलने से बचाते हैं। सड़कों पर इन्‍हे पहनकर चलने से कोई दिक्‍कत नहीं होती है और आप गंदा होने पर इन्‍हे धो सकते हैं।
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गीले पैरों मे ना पहने जूते

बारिश में बाहर से आने के बाद अपने पैरों को धोयें जरूर। क्‍योंकि मानसून के दौरान फंगस, बैक्‍टीरिया और कीटाणु होते हैं, तो इसलिए जरूरी है कि बाहर से घर आते ही अपने पैरों को साफ किया जाए। पैरों को धोने के बाद उन्‍हें पोंछकर सुखायें। बाहर जाते समय सैंडल के स्‍थान पर जूते पहनें। जूते आपके पैरों को पूरी सुरक्षा देते हैं वहीं सैंडल में आपके पैर गीले हो जाते हैं जैसे बैक्‍टीरिया संक्रमण होने का खतरा होता है।
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माश्‍चराइजर लगायें

मानसून के दौरान रात को सोने से पहले, पैरों पर मॉश्‍चराइजर जरूर लगायें। मॉश्‍चराइजर में सात से दस फीसदी तक यूरिया और पाराफिन होना चाहिये। इससे आपके पैरों की डेड स्किन हट जाएगी और आपके पैर साफ, स्‍मूथ और एलर्जी से दूर रहेंगे। पैरों की उंगलियों के बीच मॉश्‍चराइजर न लगायें क्‍योंकि यहां कि त्‍वचा में बहुत नमी होती है और इससे फंगल संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।
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नमक के पानी का इस्तेमाल करें

मानसून मे पैरों में सक्रंमण होने का खतरा रहता है। पैरों में किसी भी प्रकार का संक्रमण है तो उसे छुटकारा पाने के लिए नमक के पानी का इस्तेमाल करें। यह सबसे अच्छा एंटीसेप्टिक है। एक तब पानी में दो बड़े चम्मच नमक दाल दें, फिर उसमें 4 से 5 अपने पैर रखें। इसे रोज़ करे जब तक संक्रमण ठीक ना हो जाये।
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पैरों को रखें सुरक्षित

बारिश के दिनों में पैरों को सुरक्षित रखने के लिए अच्‍छे फुटवियर पहनने के अलावा, सही क्‍लींजर का इस्‍तेमाल करना भी जरूरी है। नहाने के पानी में डिटॉल डालकर रखें। पैरों को साफ तौलिए से पोंछते रहें।किसी प्रकार की बैक्‍टीरियल या फंगल संक्रमण जैसे लालिमा, सूजन, खुजली और त्‍वचा गर्म होना, या बिना किसी चोट के दर्द होना आदि को नजरअंदाज नहीं करना चाहिये। किसी भी तरह का इंफेक्‍शन लगने पर तुरंत डॉक्‍टर से सम्‍पर्क करें।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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