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भावनाओं को काबू करना सीखें

भावनाओं को काबू करने के लिए जरूरी है कि आप अपनी भावनाओं को समझें। किसी भी बात पर भावुक हो कर प्रतिक्रिया देने से पहले स्थिति का आंकलन करना जरूरी होता है।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Anubha TripathiJul 23, 2014

भावनाओं को काबू पाना मुश्किल नहीं

क्या कभी-कभी आपको अपनी भावनाओं पर काबू पाना मुश्किल लगता है? क्या आप जरा-जरा सी बात पर बुरा मान जाते, भड़क उठते या निराश हो जाते हैं? क्या जिंदगी की चिंताएं आप पर इस कदर हावी हो जाती हैं कि आप बिल्कुल लाचार महसूस करते हैं? ऐसे में जरूरी है कि भावनाओं पर काबू करना। आइए जानें यह कैसे संभव है।

सही जगह व्यक्त करें भावना

असल जिंदगी में भावनाओं पर काबू इतना आसान नहीं होता लेकिन मन के भावों की अभिव्यक्ति के लिए सही जगह और माहौल भी जरूरी है। कभी-कभी जब हम अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते जिससे अपने लिए मुश्किल भी खड़ी कर लेते हैं। भावनाओं पर काबू करना अपने आप में एक कला होती है। सही जगह पर अपनी भावनाओं को जाहिर करने से आपकी भावनाएं उपेक्षित होती हैं और आपकी भावनाओं की कद्र भी की जाती है।

यह आप पर निर्भर है

भावुक होने के संदर्भ में सच कहें तो यह पूरी तरह से आप पर निर्भर हैं कि आप अपने अंदर अति भावुकता चाहते हैं या नहीं। अपनी भावनाओं पर काबू करना अपने अंदर एक तरह से स्किल डेवलप करना है ताकि हम और अच्छा कुछ कर सकें।

खुद को शांत करें

जब भी आप अपने को अति भावुकता से ग्रसत पाएं तो अपने आपको शांत करने की हमेशा कोशिश करें। सच कहें तो ज्यादा भावुकता आपके विचारों को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है जिससे आप गलत फैसले भी ले सकते हैं।

भावनाओं को जानें

जब तक आप अपनी भावनाओं को लेकर ज्यादा सजग नहीं रहेंगे तब तक आप इसे कंट्रोल करने के बारे में कैसे सोच पाएंगे। अपनी भावनाओं के प्रति जागरूक बनने के लिए जरूरत है इनको मॉनिटर किया जाए। इसके लिए आप यह जाने कि आप सबसे ज्यादा भावुक कब होते हैं। इससे आपको इन क्षणों को पहचानने में भी आसानी होगी।

क्यों होते हैं भावुक

अगर आप यह जान लेते हैं कि आप किस वजह से भावुक होते हैं तो फिर उन्हें नियंत्रित करना आसान हो जाता है। अगर आप इसके कारणों को नहीं जान पा रहे हैं तो अपने नजदीक लोगों जैसे दोस्तों से भी मदद ले सकते हैं। उनसे पूछें कि क्यों आप इतना ज्यादा हर बात को दिल से लगा बैठते हैं।

हल निकालें

जब आपको यह पता हो जाएगा कि आप कब ज्यादा भावुक होते हैं और किन मुद्दे पर होते हैं तो फिर इसके सामाधान के बारे में सोचें। इसके लिए आप अपने सोचने के तरीके को बदलें ताकि आपकी भावनाएं आपके विचार को प्रभावित न करें बल्कि आपके विचार भावनाओं को लीड करें।

नियंत्रित हो प्रतिक्रिया

ज्यादातर ऐसा देखा जाता है कि भावुकता में बहकर हम कई बार किन्हीं मुद्दों पर गलत रिएक्ट कर जाते हैं। इस समस्या पर काबू पाने के लिए जरूरी है कि "आपको उस परिस्थिति में कैसे रिएक्शन देने हैं" यानि कि आप भावनाओं में बहकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं या फिर सोच-समझ कर दिमाग का इस्तेमाल कर प्रतिक्रिया देते हैं। कोशिश करें कि आपकी प्रतिक्रिया संयत हो।

अपनी सीमाएं जानें


आप हर काम में निपुण नहीं हो सकते हैं। थोड़ी बहुत कमियां तो हर किसी में होती हैं। ऐसे में अपने कमजोर पक्षों को पहचानें और उन्हें मजबूत करने पर जोर दें। अपनी सीमाएं न जानना और गलत काम करना आपकी कमियों को दर्शाता है। अपनी सीमाएं पहचान कर भी आप भावनात्मक संतुलन बनाने में समर्थ होंगे।

धीरे-धीरे करें शुरूआत

अपनी संवेदनाओं पर काबू करना एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में रातोरात किसी करिश्मे की उम्मीद न करें और न ही अधीर होकर आधे रास्ते से ही लौट पड़ें। शुरुआत शांत मन से करें। अपनी अति भावुकता के कारण हो सकने वाली समस्याओं को हमेशा दिमाग में रखें। यही इससे निपटने की कुंजी है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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