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कैसे करें शारीरिक भाषा से संवाद

जुबान से अधिक महत्‍व शारीरिक संवाद को दिया जाता है, क्‍योंकि यह बहुत अधिक स्‍पष्‍ट होती है, शारीरिक हाव-भाव जैसे चेहरे की भंगिमा, हाथों का इशारा और देखने के तरीके से अपनी बात आसानी से कह सकते हैं।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Nachiketa Sharma / Aug 14, 2014

बॉडी लैंग्‍वेज से करें संवाद

जुबान से अधिक महत्‍व शारीरिक संवाद को दिया जाता है, क्‍योंकि यह बहुत अधिक स्‍पष्‍ट होती है। व्‍यक्ति अपनी भाव-भंगिमाओं से अपनी बात करता है। हम शारीरिक हाव-भाव जैसे चेहरे की भंगिमा, हाथों का इशारा, देखने के तरीके से अपनी बात कहते हैं। हम अक्‍सर सिर्फ मुस्कराकर, ऊंगली दिखाकर, हाथों से इशारा कर कितना कुछ कह जाते हैं। तो अगर आप शारीरिक भाषा से संवाद करना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्‍यान रखें।

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सामान्‍य रहें

शारीरिक रूप से संवाद जब भी करें तो सबसे पहले यह ध्‍यान दें कि आपकी भाव-भंगिमा बनावटी न हो, आपकी शारीरिक भाषा प्राकृतिक होनी चाहिए। जब किसी बात को बोलने में आपका शारीरिक अंदाज नैचुरल होता है तब आपकी बात विश्‍वसनीय लगती है।

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अपनी भाव-भंगिमा को पहचानें

बॉडी लैंग्‍वेज से कुछ बोलने से पहले आपको अपनी शारीरिक भाव-भंगिमा के बारे में जानकारी होनी चाहिए। इसलिए सबसे पहले किसी सीसे के सामने देखें कि किन स्थितियों-परिस्थितियों में आपका शरीर कैसा व्‍यवहार करता है। किस परिस्थिति में आपकी शरीर का अंदाज कैसा होता है। अगर इस बात की जानकारी आपको होगी तो दूसरों के सामने अपने बॉडी-लैंग्‍वेज से संवाद करने में आपको आसानी होगी।

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बात और अंदाज में संबंध हो

आप जो बोलना चाहते हैं उसका संबंध आपकी शारीरिक भाषा से होना चाहिए, यानी आप जो संदेश देना चाहते हैं उसके प्रतिरूप जैसा ही आपका शारीरिक अंदाज भी हो। आप जो संदेश देना चाहते हैं वह तब और भी प्रभावशाली हो जाता है जब आपके शरीर का अंदाज ठीक वैसा ही हो।

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एक बात पर जोर देना

एक बात को कहने के लिए आपके पास कई तरीके हैं। एक ही बात को अगर आप विभिन्‍न अंदाज से कहेंगे तो इससे संदेश को प्रभावशाली बनाने में मदद मिलेगी। अगर आप एक ही बात के लिए एक तरीके का प्रयोग करेंगे तो श्रोता आपके उस अंदाज को आसानी से समझ भी लेंगे। जब भी आपके शरीर की भाव-भंगिमा वैसी होगी श्रोता बात को समझ जायेंगे।

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सकारात्‍मक दिखें

जब भी कोई बात शारीरिक भाषा से कहें तब कोशिश करें कि आपका अंदाज सकारात्‍मक हो। सकारात्‍मक अंदाज में आप अपने संदेश को सही तरीके से कह पाते हैं। इस अंदाज में श्रोताओं को आपके ऊपर कम संशय होता है।

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हाथों का सही प्रयोग करें

शारीरिक भाषा से संवाद करने में हाथों की भाव-भंगिमा का प्रयोग सबसे बेहतर और अच्‍छा माना जाता है। हाथों का सही तरीके से प्रयोग करके आप बातों को आसान भी बनाते हैं। हाथों की कुछ मुद्रायें आपकी बातों को और भी प्रभावशाली बनाने में मदद करती हैं।

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लोगों की पहचान करें

आप जिसके सामने अपनी बात शारीरिक अंदाज से बोलना चाहते हैं उन लोगों की पहचान करें। यह भी देखें कि आपके श्रोता आपकी तरफ ध्‍यान दे रहे हैं या नहीं। क्‍योंकि अगर आपके श्रोता आपको देखेंगे नहीं तो वे आपके संदेश को समझ नहीं पायेंगे।

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चेहरे के भाव

चेहरा बहुत कुछ बोलता है, चेहरे की अभिव्‍यक्ति से ही व्‍यक्ति के मूड का पता चल जाता है। इसलिए जब भी शारीरिक भाषा से संवदा करें अपने चेहरे की अभिव्‍यक्ति का खयाल रखें। जब भी अपनी बात को कहें कोशिश करें कि चेहरे पर नकारात्‍मक भाव न आयें।

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आंखों से बोलें

जब भी आप कोई बात बोलते हैं उसमें आंखों का महत्‍व बहुत होता है, इसलिए अपना संदेश आंखों से देने की कोशिश करें। बातचीत के दौरान सामने वाले पक्ष की आंखों में देखकर बात करें। आंखों से बात बोलने से सामने वाले का भरोसा बात पर बढ़ता है।

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कठिन परिस्थितियों में

विषम परिस्थितियां व्‍यक्ति के सामने अक्‍सर आती हैं, इस अवसर पर भी अपने शरीर की भाव-भंगिमाओं को काबू में रखने की कोशिश करें। जॉब के लिए साक्षात्‍कार देना हो या फिर पहली बार डेट पर जाना हो, इन परिस्थितियों में आदमी सहमा सा रहता है। उसके शरीर का अंदाज उसके शब्‍दों का साथ नहीं देते हैं। लेकिन इन परिस्थितियों में अगर शब्‍दों के साथ शारीरिक संवाद का साथ मिल जाये तो आप अपनी बात को अधिक प्रभावशाली तरीके से रख पायेंगे।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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