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पाचन क्रिया को कैसे प्रभावित करता है तनाव

आजकल के भागदौड़ बरे जीवन में तनाव पाचनतंत्र को भी प्रभावित कर देता है। ऐसे में हमें तनाव से दूर रहना चाहिए।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Aditi Singh Feb 26, 2015

तनाव और पाचन

अस्‍वस्‍थ जीवनशैली, खानपान में अनियतिमता, भरपूर नींद न लेना, आदि कई कारणों से पाचन क्रिया प्रभावित होना स्‍वाभाविक है, लेकिन शायद आप इस बात से अनजान हैं कि इन सबके साथ तनाव भी पाचन क्रिया को प्रभावित करती है। अगर आप अधिक तनाव लेते हैं तो इसके कारण खाना पचने में समस्‍या हो सकती है और ब्लोटिंग, कब्ज, डायरिया, सीने में जलन, रिफ्लैक्स, गैस, आदि पाचन संबंधी समस्‍यायें इसके कारण हो सकती हैं। आगे के स्‍लाइड शो में जानिये किस तरह तनाव आपके पाचन क्रिया को प्रभावित करता है।

ImageCourtesy@GettyImages

तनाव से पाचन तंत्र पर असर

तनाव दो प्रकार का होता है - तेज या पुराना (क्रोनिक)। क्रोनिक स्‍ट्रेस का अ‍सर सबसे अधिक हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है। क्रोनिक तनाव (कभी-कभी एक्‍यूट स्‍ट्रेस भी प्रभवित करता है) के कारण आंत की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और वह सही तरीके से खाने को पचा नहीं पाता है। इससे पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है।
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कैसे पड़ता है असर

तनाव के बाद दिमाग में हार्मोन (डोपामाइन सहित दूसरे हार्मोन) का स्राव अधिक होता है और इसका सीधा असर पेट पर पड़ता है। इसके कारण पाचन क्रिया के दौरान पेट में पेप्‍टाइड (यह प्राकृतिक रूप से पेट में स्रावित होने वाला पदार्थ है) के साथ सीआरएफ (corticotrophin releasing factors) तत्‍व भी स्रावित होता है, जो कि पेट में गैस और सूजन के लिए जिम्‍मेदार है। यह पाचन क्रिया को धीमा कर देता है।
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पाचनतंत्र खराब होने के सामान्‍य कारण

जल्दी−जल्दी और जरूरत से अधिक खाना, खाते समय ज्यादा पानी पीना, तले-भुने खाना, फास्‍ट और जंक फूड का सेवन, असयम खाना आदि कई कारणों से भी पाचन क्रिया प्रभावित होती है और इनके कारण पेट में कब्‍ज और गैस की शिकायत हो सकती है।
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योग से दूर करें तनाव

वैसे तो सारे ही आसन हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं, और उन्ही में से एक है उत्तानासन। उत्तानासन के नियमित अभ्यास से न केवल पीठ और कमर दर्द में लाभ होता है, बल्कि मानसिक तनाव से भी भारी राहत मिलती है। इस आसन में हाथों को ऊपर की ओर उठा कर कमर को साइड में झुकाया जाता है। यह पाचन प्रणाली को स्वस्थ करने व बगल की चर्बी को दूर करने में भी सहायक है।
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जरूरत से ज्यादा काम ना करें

ऑफिस में काम का दबाव तो हर किसी की जिंदगी में होता है लेकिन जो लोग काम और परिवार में काम का संतुलन नहीं बैठा पाते और रुटीन में काम के अलावा कुछ नया नहीं कर पाते हैं, उन्हें तनाव और अवसाद होना तो वाजिब ही है। ऑफिस के काम के अलावा भी बहुत कुछ है, अपने शगल को मरने न दें।
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बातचीत करें

अपनी समस्याओं के संबंध में बात करना भी तनाव दूर करने का उत्तम जरिया है। हममें से अधिकतर लोग खुद तक ही सीमित रहते हैं। अंदर ही अंदर घुटते रहने से और भी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। आज के बाद जब भी आपको किसी बात को लेकर घुटन महसूस हो तो उसके बारे में खुल कर बात करें। अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों के अलावा आप ऑनलाइन सपोर्ट ग्रुप से भी जुड़ सकते हैं।

दोनों मे होता है संबध

हमारे पेट और दिमाग के बीच सीधा संबंध है। इंस्‍टेस्‍टाइन म्‍यूकोसा और दिमाग का तंत्रिका तंत्र एक दूसरे से न्‍यूरॉन सेल्‍स (neuron cell) के माध्‍यम से जुड़ी होती हैं। तो जो भी आपके दिमाग में चलेगा उसका सीधा असर पाचन क्रिया पर पड़ेगा।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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