बीमारियों और मौत को न्‍योता है लगातार बैठे रहना

क्‍या आप जानते हैं कि बस बैठे रहना और आराम करना हमारी सेहत के लिए कितना नुकसानदेह हो सकता है। इससे हमारे शरीर और मन की सेहत पर बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है।

तन मन By Pooja Sinha / Nov 29, 2014
बस बैठे रहना

बस बैठे रहना

इस भागती दौड़ती जिंदगी में हम अपना अधिकतर वक्‍त कुर्सी पर बैठकर बिताते हैं। आर्म चेयर जॉब आज के महानगरीय जीवन की वास्‍तविकता बन चुकी है। लेकिन, क्‍या आप जानते हैं कि बस बैठे रहना और आराम करना हमारी सेहत के लिए कितना नुकसानदेह हो सकता है। इससे हमारे शरीर और मन की सेहत पर बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है। जरूरत है कि हम इस खतरे को समय रहते पहचाने और अपनी जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव करें।
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लगातार बैठने से मोटापे का खतरा

लगातार बैठने से मोटापे का खतरा

यह बात तो आप जानते ही हैं कि व्‍यायाम और अच्‍छा आहार आपका वजन संतुलित रखने में मदद करता है। लेकिन, वजन काबू करने में सक्रिय जीवनशैली की भी अहम भूमिका होती है। मायोक्लीनिक ने वजन बढ़ने और घटने पर हुए एक शोध किया। इसमें एक हजार लोगों को शामिल किया जिनका आहार और व्‍यायाम सभी कुछ प्रयोगशाला में नियंत्रित किया गया। शोधकर्ताओं ने सभी के आहार में एक हजार अतिरिक्‍त कैलोरी जोड़ दी। किसी भी व्‍यक्ति को व्‍यायाम करने की अनुमति नहीं थी। लेकिन, इसके बावजूद कुछ लोगों का वजन नहीं बढ़ा बल्कि अन्‍य लोगों के वजन में बढ़ोत्‍तरी दर्ज की गयी। शोधकर्ताओं को इसके पीछे की वजह समझ नहीं आई। जिन लोगों का वजन नहीं बढ़ा था वे सारा दिन यहां से वहां घूमते रहते थे।
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डायबिटीज का खतरा

डायबिटीज का खतरा

लगातार बैठे रहने से शरीर में रक्‍त शर्करा और इनसुलिन के स्‍तर में इजाफा होता है। इसका अर्थ है कि लगातार बैठे रहने वाले लोगों का न केवल वजन बढ़ता है, बल्कि इसके साथ ही उन्‍हें टाइप टू डायबिटीज होने का भी खतरा होता है। डायबेटालोजिया में प्रकाशित एक आर्टिकल में 18 शोधों का वर्णन था, जिनमें 80 हजार प्रतिभागी शामिल थे। इसमें बताया गया था कि जो लोग जयदा देर बैठते हैं उन्‍हें टाइप टू डायबिटीज होने का खतरा सामान्‍य लोगों की अपेक्षा दोगुना होता है।
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कैंसर का खतरा

कैंसर का खतरा

नेशनल कैंसर इंस्‍टीट्यूट के जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक ज्‍यादा बैठे रहने से कोलोन, एंडोमेट्रिअल और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इस शोध में 40 लाख लोगों और कैंसर के 68 हजार 936 लोगों को शामिल किया गया। शोध में यह भी पाया गया कि शारीरिक रूप से सक्रिय लोगों में भी लगातार बैठे रहने से कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। और दो घंटे बाद इस खतरे में इजाफा होता रहता है। एक अन्य शोध में निष्‍क्रिय जीवनशैली और लगातार बैठे रहने वाली दिनचर्या का संबंध स्‍तन और कोलोन कैंसर से माना गया है।
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हृदय रोग का खतरा

हृदय रोग का खतरा

अमेरिकन जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार रोजाना छह घंटे या उससे अधिक बैठने वाले स्‍त्री पुरुष, तीन घंटे या उससे कम बैठने वाले अपने साथियों की अपेक्षा जल्‍दी मौत का ग्रास बन गए। शोधकर्ताओं को 14 वर्षों तक 53440 पुरुषों और 69776 महिलाओं पर शोध करने के बाद यह परिणाम प्राप्‍त हुए। निष्‍क्रिय जीवनशैली और हृदयरोग के संबंध बेहद गहरे पाये गए।
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मांसपेशीय समस्‍या

मांसपेशीय समस्‍या

मांसपेशियों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए जरूरी है कि आप उनका इस्‍तेमाल करें। तो, अगर आप दिन में लगातार आठ नौ घंटे बैठे रहते हैं, तो इससे उन मांसपेशियों पर अतिरिक्‍त दबाव पड़ता है। मांसपेशियां कोमल होती हैं, लेकिन नियमित रूप से काफी देर तक बैठे रहने से उनमें अकड़न आ जाती है। कई वर्षों तक लगातार बैठे रहने से मांसपेशियों इस हद तक कमजोर हो जाती हैं कि आप दौड़ने, कूदने यहां तक कि खड़े रहने तक के योग्‍य नहीं रहते। शोधकर्ताओं का मानना है कि शायद यही वजह है कि बुजुर्ग लोगों को अपना रोजमर्रा के कामों को करने में इतनी परेशानी होती है।
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एलपीएल से संबंध

एलपीएल से संबंध

एलपीएल अथवा लिपोप्रोटीन लिपास एक एंजाइम होता है जो फैट को तोड़कर उसमें से ऊर्जा निकालने का काम करता है। जब यह एंजाइम अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं करता तो शरीर में अधिक वसा जमा होने लगती है। जर्नल ऑफ साइकोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक चूहों में तीन प्रकार से एलपीएल के स्‍तर, सारा दिन बैठे रहना, सारा दिन खड़े रहना और सारा दिन व्‍यायाम करना। सारा दिन आराम करने वालों में एलपीएल का स्‍तर कम पाया गया। जब इसकी तुलना खड़े रहने वाले चूहों से की गयी तो इसमें दस गुना का अंतर देखा गया। हां व्‍यायाम करने का कोई अतिरिक्‍त लाभ सामने नहीं आया। शोधकर्ताओं का कहना हे कि इन नतीजों को इनसानों के लिए भी उपयोगी माना जा सकता है। बड़ी बात यह है कि लोग आधा घंटा बैठे रहने से हुए दुष्‍प्रभाव को आधा घंटा खड़े रहकर या व्‍यायाम करके खत्‍म नहीं कर सकते।
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अवसाद का खतरा

अवसाद का खतरा

लगातार बैठे रहने अवसाद का खतरा भी बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि लगातार बैठे रहने से 'फील गुड हॉर्मोन' शरीर में अच्‍छी तरह नहीं फैल पाता। अमेरिकन जर्नल ऑफ प्रीवेंटेटिव मेडिसन में मध्‍यम आयु की 9000 महिलाओं पर शोध किया गया और इसमें यह पाया गया कि जो महिलायें अधिक समय तक बैठती हैं और जरूरत के मुताबिक व्‍यायम नहीं करतीं, उनमें कम बैठने वाली और व्‍यायाम करने वाली महिलाओं की अपेक्षा अवसाद के गुण अधिक नजर आते हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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