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सेहत से खिलवाड़ है नॉन-स्टिक बर्तन का इस्तेमाल

पौष्टिक और सेहत से भरपूर खाने को अगर सही बरतन में न पकाया जाये तो इसका फायदा मिलने की बजाय सेहत को नुकसान हो सकता है, अच्‍छे दिखने वाले नॉन-स्टिक बरतन में खाना पकाना सेहत के लिए ठीक नहीं है।

एक्सरसाइज और फिटनेस By Shabnam Khan / Apr 07, 2015

नुकसानदेह होते हैं नॉन-स्टिक बर्तन

नॉनस्टिक बर्तनों का इस्‍तेमाल करने से ऑयल कम लगता है, खाना जलता नहीं है और भी बहुत कुछ। इस वजह से लोग अपने किचेन में इन्हें जगह देना बहुत पसंद करते हैं। ऐसे में नॉनस्टिक बर्तनों की बाजार में धूम मची हुई है। लेकिन क्‍या आपको पता है कि ऐसे बर्तनों के इस्‍तेमाल से आपके स्‍वास्‍थ्‍य को कई प्रकार की गंभीर समस्‍याओं से जूझना भी पड़ सकता है। इन बर्तनों की नॉनस्टिक परत आपके स्‍वास्‍थ्‍य को बदहाल करने के लिए बहुत होती हैं।

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थॉयराइड

पीएफओए (पेरूलूरोटोननिक एसिड), एक प्रकार का घटक होता है और इसके शरीर में पहुंचने पर थॉयरायड होने का खतरा बढ़ जाता है। नॉनस्टिक बर्तनों में खाना बनाने से ये घटक शरीर में पहुंच ही जाता है। इसलिए कोशिश करें कि नॉन स्टिक बर्तनों में खाना न खाएं।

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इम्यून सिस्टम

जी हां, ये सच हैं। शरीर की इम्‍यून सिस्टम को नॉनस्टिक में बना भोजन बहुत कमजोर बना देता है। नॉन-स्टिक बर्तन से निकलने वाला परफ्लूरिनेटेड कम्पाउंड (पीएफओए) शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। इससे शरीर में तरह-तरह की बीमारियां होने लगती हैं। ऐसे बर्तनों में खाना बनाने से व्यक्ति के शरीर में ऐसे तत्व पहुंच जाते हैं, जिससे कई प्रकार के कॉग्नीटिव होने का खतरा हो जाता है।

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हड्डियों की बीमारी

नॉन-स्टिक बर्तनों में खाना बनाने से शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। लोहे या ऐल्युमिनियम के बर्तन में खाना बनाने से शरीर को ज्यादा से ज्यादा आयरन मिलता है। इसलिए कोशिश करें कि लोहे की कढ़ाई में सब्ज़ी बनाकर खाएं।

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लीवर को नुकसान

नॉन-स्टिक बर्तन आपके लिवर को खराब कर सकता है। नॉन-स्टिक बर्तन से टॉक्सि फ्यूम्स निकलती हैं, जो पेट को खराब करती हैं। एक स्टडी के अनुसार नॉन-स्टिक बर्तनों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले ऑर्गेनिक कंपाउंड्स और डाइबिटीज में संबंध पाया गया है। यदि आपके घर में कोई सदस्य ऐसा है जिसे पहले से लीवर की समस्या है तो आपको अभी के अभी नॉन स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल छोड़ देना चाहिए।

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हार्ट अटैक

कई शोध से पता चला है कि लोहे की बजाय नॉनस्टिक में खाना बनाना दिल के लिए घातक हो सकता है। शरीर में हाई ट्राईग्‍लेसिराइड बढ़ने से हार्टअटैक आ सकता है जो नॉनस्टिक बर्तनों में भोजन बनाने से शरीर में पहुंच ही जाता है। इसलिए नॉन स्टिक बर्तनों से दूरी बनाए रखें।

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कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ना

जब आप नॉन स्टिक बर्तनों में खाना बनाते हैं तो पीएफओए की मात्रा बढ़ने से शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल भी बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ना सेहत के लिए बहुत खराब होता है। इससे आपको कई और बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप लोहे की कढ़ाई और तवे व स्‍टील के बर्तनों का भी इस्‍तेमाल करें।

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कैंसर का खतरा

नॉनस्टिक बर्तन में अधिक पका हुआ खाना ऐसे तत्‍व रिलीज करता है जिसकी मात्रा शरीर में अधिक होने पर कैंसर जैसी घातक बीमारी भी हो सकती है। यदि आप चाहते हैं कि कैंसर की बीमारी का जोखिम आपके लिए कम हो जाए तो नॉन-स्टिक बर्तनों को छोड़ देना ही बेहतर है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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