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बारिश में बढ़ जाता है स्वाइन फ्लू का खतरा, बचाव के लिए अपनाएं ये 7 आसान घरेलू उपाय

स्वाइन फ्लू एक संक्रामक बीमारी है इसलिए ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलती है। स्‍वाइन फ्लू ज्‍यादातर बरसात के मौसम में ज्‍यादा फैलने का खतरा रहता है। इसे शूकर इन्फ्लूएंजा या एच1एन1 भी कहते हैं। आइए इससे बचाव के लिए जानें इसके लक्षण और

घरेलू नुस्‍ख By शीतल बिष्टFeb 03, 2015

क्‍या है स्‍वाइन फ्लू

स्‍वाइन फ्लू को शूकर इन्फ्लूएंजा या एच1एन1 भी कहते हैं। शूकर इन्फ्लूएंजा विषाणु का सुअरो में पाया जाना आम है। आमतौर पर स्‍वाइन फ्लू में बुखार और जुकाम जैसे लक्षण दिखने लगते हैं, जिसे आप में से बहुत से लोग शुरुआत में इस बीमारी को नजरअंदाज कर देते हैं। मगर आपको बता दें कि स्वाइन फ्लू एक संक्रामक बीमारी है और तेजी से फैलती है। बारिश के मौसम में स्वाइन फ्लू का खतरा अधिक बढ़ जाता है। स्‍वाइन फ्लूू  छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करता है।  बुखार आने पर इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। इसके साथ ही अगर आपके इलाके में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए हैं, तो बचाव के लिए आप मुंह पर रुमाल या मास्क लगाएं क्‍योंकि सावधानी ही बचाव है। इसके अलावा, यदि आप या आपके परिवार के किसी सदस्‍य में स्‍वाइन फ्लू के लक्षण दिखें, तो आप इससे बचाव व राहत के लिए इन आसान से घरेलू उपाचारों को आजमाएं। 

स्‍वाइन फ्लू के लक्षण

स्वाइन फ्लू में 100 डिग्री से ज्यादा का बुखार आना आम बात है। साथ ही सांस लेने में तकलीफ, नाक से पानी बहना, भूख न लगना, गले में जलन और दर्द, सिरदर्द, जोड़ों में सूजन, उल्टी और डायरिया भी हो सकता है। स्वाइन फ्लू से डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। क्‍योंकि यह लाइलाज बीमारी नहीं है। थोड़ी सी एहतियात बरतकर इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।

स्‍वाइन फ्लू से बचाव के घरेलू उपचार

फ्लू का असर शरीर पर कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने पर सबसे ज्‍यादा होता है। स्‍वाइन फ्लू से भी वैसे ही बचा जा सकता है जैसे हम साधारण फ्लू या सर्दी-जुकाम से बचते हैं। इसलिए इससे बचने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ घरेलू उपाय आपके लिए कारगर साबित हो सकते हैं। आप डॉक्‍टर द्वारा बताये गई सावधानी अपनाने के साथ यहां दिये कुछ घरेलू उपायों को भी अपना सकते हैं।

तुलसी

भारतीय घरों में तुलसी आसानी से उपलब्‍ध हो जाती है। तुलसी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरस दोनों प्रकार के तत्वों के कारण यह सबसे लाभकारी जड़ी-बूटी मानी जाती है। यह किसी की भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकती है। इसलिए ऐसा तो नहीं कहा जा सकता कि यह स्वाइन फ्लू को बिल्कुल ठीक कर देगी, लेकिन ‘एच1एन1’ वायरस से लड़ने में निश्चित रूप से सहायक हो सकती है। तुलसी से लाभ पाने का सबसे आसान तरीका है कि हर रोज इसकी पांच अच्छी तरह से धुली हुई पत्तियों का इस्तेमाल करें।

कपूर

स्‍वाइन फ्लू से बचाव के लिए कपूर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। वयस्क चाहें तो कपूर की गोली को पानी के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं, वहीं बच्चों को इसका पाउडर आलू अथवा केले के साथ मिलाकर देना चाहिए। ले‍किन कपूर के सेवन के बारे में इस बात का ध्‍यान रखें कि कपूर का रोज नहीं लेना चाहिए। महीने में एक या दो बार ही इसका इस्‍तेमाल पर्याप्त है।

गिलोय

गिलोय देश भर में बहुतायत में मिलने वाली एक दिव्‍य औषधि है। इसका काढ़ा बनाने के लिए इसकी एक फुट लंबी शाखा को लेकर तुलसी की पांच छह पत्तियों के साथ 10 से 15 मिनट तक उबालना चाहिए। ठंडा होने पर इसमें थोड़ी काली मिर्च, मिश्री, सेंधा नमक अथवा काला नमक मिलाएं। यह औषधि आपकी रोग प्रतिरोधक शक्ति को चमत्कारिक ढंग से बढ़ा देती है। साथ ही गिलोय हर तरह के बुखार में कारगर होता है। यदि यह पौधा आपको अपने आसपास नहीं मिलता है तो किसी आयुर्वेद की दुकान से भी आप इसे ले सकते हैं।

लहसुन

लहसुन भी मौजूद एंटी-वॉयरल गुण रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करने में मदद करते है। इसके लिए आप लहसुन की दो कलियां रोज सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए। इससे रोग प्रतिरोधक शक्ति में इजाफा होता है।

एलोवेरा

एलोवेारा एक और ऐसी लोकप्रिय जड़ी-बूटी है जो आपके भीतर फ्लू से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है। इसका इस्‍तेमाल दवाइयों तथा सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। इसके अलावा एलोवेरा व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करता है। एलोवेरा जैल की एक चम्मच पानी के साथ इस्तेमाल करने से न सिर्फ त्वचा को खूबसूरत बनाया जा सकता है, बल्कि यह स्वाइन फ्लू के असर को कम करने में भी कारगर साबित होता है।

विटामिन सी

आमतौर पर माना जाता है कि सर्दी से बचने का सबसे बेहतर तरीका विटामिन सी का इस्‍तेमाल है, जो कि स्वाइन फ्लू के लिए भी कारगर साबित होता है। इसलिए अपने आहार में विटामिन सी को शामिल करें। विटामिन सी सभी प्रकार के खट्टे फलों जैसे नींबू, आंवला, अंगूर, संतरा आदि में भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

हल्‍दी

सालों से हल्दी का उपयोग सौन्दर्य प्रसाधन के अलावा सर्दी खांसी को दूर करने के लिए भी किया जाता रहा है। हल्दी में अनिवार्य तेल और हल्दी को रंग देने वाला पदार्थ करक्युमिन होता है। करक्युमिन में कई औषधीय गुण होते हैं। इसके अलावा हल्‍दी की सबसे बड़ा गुण यह है कि ऊंचे तापमान पर गर्म करने के बावजूद भी इसे औषधीय गुण नष्‍ट नहीं होते है। जानकारों के अनुसार गुनगुने दूध में हल्दी मिलाकर पीने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होता है। और रोजाना एक गिलास दूध में थोड़ी सी पिसी हल्दी मिलाकर पीने से स्वाइन फ्लू का असर कम होने लगता है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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