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आपके स्वस्थ जीवन को मुश्किल बनाते हैं ये 4 मिथ

बीमारियों के लिए सिर्फ बीमारियां ही नहीं हमारी सोच भी जिम्‍मेदार होती है, स्‍वस्‍थ जीवन से जुड़े कुछ मिथक हमें खामखां बीमार करते हैं, इस लेख में यहां विस्‍तार से जानें।

स्वस्थ आहार By Aditi Singh / Sep 10, 2015

स्वास्थ्य से जुड़े मिथक

सेहत के प्रति सभी सजग रहते हैं पर कई बार ये सजगता जागरूकता नहीं होती है। हम सेहतमंद रहने के चक्कर में आस-पास प्रचलित मिथकों के शिकार हो जाते हैं। कुछ चीजों का सेवन करना या न करना हमारे शरीर की रूपरेखा पर निर्भर करता है ना कि सामान्य मान्यता के ऊपर। वेबसाइट 'फीमेलफर्स्ट डॉट को डॉट यूके' पर ऑनलाइन बॉडी बिल्डिंग सप्लीमेंट प्रदाता नेचर्स बेस्ट न्यूट्रिशन के विशेषज्ञों ने इन मिथकों के बारे में विस्तार से बताया है। आप भी इनके बारे में जानें।
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मिथक : एक दिन में 8 गिलास पानी पीना चाहिए

सच्चाई : शरीर में तरल की आवश्यकता कई कारकों पर निर्भर है। अगर कोई ज्यादा काम करता है, तो उसे ज्यादा तरल की आवश्यकता होती है। वहीं अगर कोई तरल से भरपूर फल और सब्जियां लेता है, तो उसे कम पानी की जरूरत होती है। ऐसे में जरूरी नहीं कि 8 गिलास पानी से ही उसके शरीर को जरूरत के पानी की आवश्यकता की पूर्ति हो जाएगी। इसमें बड़ी बात ये है कि इस बात तो लगभग 51 प्रतिशत लोग सही मानते हैं।
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मिथक : त्वचा के लिए लाभकारी है टैन

सच्चाई : सूर्य की किरणों से त्वचा जब लगभग जल जाती है और उसका रंग भूरा हो जाता है, तो उसे टैन कहते हैं। लगातार ऐसा किया जाए, तो यह त्वचा कैंसर का एक कारक बन सकता है। साथ ही त्वचा के क्षतिग्रस्त होने और सिकुड़न आने की संभावना बढ़ जाती है। यानी सनटैन सही नहीं है फिर भी 68 फीसदी लोग इस बात को सही मानते हैं।
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मिथक : खाने में ज्यादा फाइबर हो

सच्चाई : कब्ज होने पर उच्च फाइबर वाले आहार के सेवन की सलाह दी जाती है। लेकिन चोकर युक्त अनाज के ज्यादा सेवन से कब्ज की समस्या और गंभीर हो सकती है। अघुलनशील फाइबर कुछ खनिज तत्वों के अवशोषण में रुकावट डाल सकता है, जैसे आयरन। आदर्श तौर पर फलों और सब्जियों में पाए जाने वाले घुलनशील फाइबर लेना ज्यादा फायदेमंद होता है, खासकर सूखे फल। इस मिथ को 45 प्रतिशत लोग सही मानते हैं।
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मिथक : रात में खाने से शरीर में फैट बढ़ेगा

सच्चाई : यदि आप भोजन या नाश्ते में कार्बोहाइड्रेट और वसा से भरपूर आहार शाम में लेते हैं, तो संभावना है कि कुछ वसा जमा हो जाए, क्योंकि इससे ग्लूकोज बनेगा, जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप इंसुलिन का निर्माण होगा। फिर भी 66 फीसदी लोग इस मिथक का पालन करते हैं।
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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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