Subscribe to Onlymyhealth Newsletter

डायबिटीज से पैर भी हो सकते हैं प्रभावित

डायबिटीज की समस्‍या खून में शुगर की अनियंत्रित मात्रा, यूरीन में एल्ब्यूमिन, पैरों में झनझनाहट की शिकायत व खून की सप्लाई का कम होना आदि बातें डायबिटीज के मरीजों में पैर की समस्‍याओं का कारण होती है।

डायबिटीज़ By Pooja SinhaNov 20, 2014

डायबिटीज का अंगों पर असर

बदलते लाइफस्टाइल व उचित खानपान के अभाव के कारण भारत में डायबिटीज के रोगियों की संख्‍या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, डाक्टरों के पास जाने वाला हर चौथा मरीज डायबिटीज का शिकार है। रोगियों में डायबिटीज का असर शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है। जिससे इन अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है। डायबिटीज का सबसे ज्यादा प्रभाव किडनी, आंखों व पैरों पर पड़ता है।
image courtesy : getty images

पैरों को प्रभावित करती है डायबिटीज

डायबिटीज के मरीजों की संख्‍या दिनों-दिन बढ़ने के कारण पैरों की दुर्दशा के मामले भी बहुत ज्‍यादा देखने को मिलते हैं। लंबे समय से चली आ रही डायबिटीज की समस्‍या खून में शुगर की अनियंत्रित मात्रा, यूरीन में एल्ब्यूमिन, पैरों में झनझनाहट की शिकायत व खून की सप्लाई का कम होना आदि बातें डायबिटीज के मरीजों में पैर की समस्‍याओं का कारण होती है। डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के पैरों को नुकसान हो सकता है। अगर पैरों का ख्याल न रखा जाए तो इन्हें काटने की नौबत भी आ सकती है। इसलिए डायबिटीज में पैरों की देखभाल करना बहुत जरूरी होता है।
image courtesy : getty images

पैरों से शुरू होता है डायबिटीज का इलाज

पैरों के बिना डायबिटीज का इलाज असंभव है क्योंकि शुगर पर कंट्रोल के लिए टहलना बहुत जरूरी होता है। इसलिए डायबिटीज का इलाज भी पैरों से शुरू होता है और सबसे ज्यादा ख्याल भी पैरों का ही रखा जाता है। क्‍योंकि जैसे-जैसे डायबिटीज बढ़ती है वैसे ही पैरों की नसों पर प्रतिकूल असर भी बढ़ता जाता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को खुद भी सचेत रहना चाहिए।
image courtesy : getty images

पैरों में नुकसान के कारण

डायबिटीज के मरीज यह नहीं समझते कि डायबिटीज पैरों का सब से बड़ा दुश्मन है। इसलिए चलने से पैरों में दर्द या ज्यादा चलने से पीड़ा असहनीय होने पर डायबिटीज के मरीजों को समझ लेना चाहिए कि उनके पैरों का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। डायबिटीज में पैरों को सब से ज्यादा नुकसान दो चीजें पहुंचता हैं। न्यूरोपैथी और टांगों की रक्त नली में जाने वाली शुद्ध खून की मात्रा में कमी।
image courtesy : getty images

ब्‍लड सप्‍लाई में कमी

पैरों में ब्‍लड की सप्‍लाई की कमी टांगों की रक्‍त नली के अंदर निरंतर चर्बी व कैल्शियम का जमा होने के कारण नली में सिकुड़न आने से होती है। जिसके परिणामस्‍वरूप पैरों में जाने वाली शुद्ध खून की सप्लाई में बाधा आती है। और वक्‍त रहते रोकथाम की कमी से खून की सप्लाई पूरी तरह से बंद हो जाती है। यह एक गंभीर अवस्था है।
image courtesy : getty images

न्यूरोपैथी

डायबिटीज से पैरों में समस्‍या होने का दूसरा कारण न्‍यूरोपैथी का होना है। इसे मेडिकल भाषा में ए.एस.एन. (ऑटोनोमिक सिंपैथेटिक न्यूरोपैथी) कहते हैं। इस विशेष न्यूरोपैथी के कारण ब्‍लड त्वचा में स्थित अपने नियत स्थान तक नहीं पहुंच पाता है। इसका कारण शुद्ध ब्‍लड की परिधि का कम होना होता है।
image courtesy : getty images

लकवे का शिकार

डायबिटीज आपको पैर के लकवा के शिकार भी बना सकती है। जिस से पैर की हड्डियों को आवश्यक आधार न मिलने के कारण उन पर अनावश्यक दबाव पड़ने लगता है। इसके साथ ही जोड़ों की क्रियाशीलता में भी कमी आ जाती है। इन सब समस्याओं के कारण पैरों में दर्द व झनझनाहट की शिकायत हमेशा बनी रहती है और चलने से और बढ़ जाती है।

पैरों में खुश्‍की

डायबिटीज में पैर की त्वचा में कभी-कभी जरूरत से ज्यादा खुश्की पैदा हो जाती है। इस खुश्की की वजह से त्वचा फटने लगती है और गड्ढे बन जाते हैं, जो पैरों में इन्फेक्शन का कारण बन सकती है। साथ ही खून की सप्लाई में महत्त्वपूर्ण कमी आने पर टांगों में असहनीय दर्द होता है व त्वचा का रंग बदलने लगता है। डायबिटीज के मरीज को चाहिए कि वह ऐसी दशा में तुरंत किसी सर्जन से परामर्श ले।
image courtesy : getty images

इलाज

अकसर लोग इस तरह के रोग को गठिया या सियाटिका का दर्द समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन डायबिटीज के मरीज को चलने में पैरों में दर्द या रात में बिस्तर पर लेटने पर झनझनाहट की शिकायत होने पर डॉक्‍टर से परामर्श लेना चाहिए। क्‍योंकि दर्द का कारण जानना बहुत जरूरी है।
image courtesy : getty images

सावधानियां

डायबिटीज के पीड़ि‍त व्‍यक्ति को घर के अंदर व बाहर कभी भी नंगे पांव नही चलना चाहिए। और जूते कभी भी बिना मोजों के नहीं पहनने चाहिए। साथ ही डायबिटीज के मरीज को प्रतिदिन 5 से 6 किलोमीटर पैदल चलना चाहिए। नियमित चलना पैरों में खून की सप्लाई बढ़ाने व न्यूरोपैथी का पैरों पर प्रभाव कम करने का सबसे अच्‍छा उपाय है। इसके साथ ही पैरों को स्वच्छ व नमी रहित और ब्‍लड में ग्लूकोज की मात्रा को हमेशा नियंत्रण में रखें।  
image courtesy : getty images

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK