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चिकित्सा जगत की इन 5 खोजों ने बढ़ा दी जीवन की उम्मीद

शायद इस बारे में हमने कभी ध्यान न दिया हो, लेकिन चिकित्सा जगत की इन 5 खोजों ने जीवन के औसत सालों में कई अतिरिक्त साल और जोड़ दिये हैं।

तन मन By Rahul Sharma / Oct 21, 2015

जीवन बढ़ाने वाली 5 अद्भुत खोज


वर्तमान में औसत जीवन प्रत्याशा (इंसानों की औसत आयु) 75 साल है, जोकि तकरीबन 200 साल पहले की हमारी आयु से दोगुनी है। इस दौरान ऐसे कई बदलाव हुए जिनकी वजह से ऐसा हो पाया। खासतौर पर चिकित्सा जगत की इन 5 खोजों ने तो जीवन के औसत सालों में कई अतिरिक्त साल और जोड़ दिये। चलिये जानें कौंन सी हैं चिकित्सा जगत की ये 5 अद्भुत खोज -
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पेनिसिलिन (Penicillin)


वे लोग जो नसीब पर ज़रा भी भरोसा करते हैं, उनके लिये अलेक्जेंडर फ्लेमिंग पेट्री डिश एक कमाल का उदाहरण हो सकता है। फ्लेमिंग जब अकसमात ही एक ऐसे पेनिसिलिन नामक फफूंद (ऐसा कवक जो बहुकोशिकीय तंतु के रूप में बढ़ता है और hyphae नाम से जाना जाता है) को खोज लिया, जिससे बेक्टीरिया को मारा जा सकता था। यह पहला एंटीबायोटिक भी था।  
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साबुन का इस्तेमाल (Soap)


अन्नीसवीं सदी के अंत तक आई लुई पाश्चर की जर्म थियोरी (रोगाणु सिद्धांत) से पता चला कि कीटाणुं रोगों का कारण बनते हैं। तब से ही हमें साफ रहने की अहमियत समझ आई और हाथों को साबुन से धोने व व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में जागरुकता फैली।
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ब्लडप्रेशर का ईलाज (Blood-Pressure Treatment)



ब्लडप्रेशर जो कि अमेरिका में मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण के इलाज के लिये एंटीहाइपरटेंसिव थेरेपी (antihypertensive therapy)  की खोज ने स्टोक के जोखिम को 35 प्रतिशत, हार्ट अटेक के जोखिम को 20 प्रतिशत तथा हार्ट फल्योर के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम कर दिया।
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इंसुलिन (Insulin)



हालांकि अभी तक डायबिटीज का उपचार नहीं खोजा गया है, इंसुलिन की खोज (एक ऐसा हार्मोन जो शरीर की रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है) ने डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकने वाली बीमारी बना दिया।
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टीके (Vaccines)


किसी इंसान को बीमार होने से बचाने के लिये उसे किसी और बीमारी से संक्रमित करा देना अजीब तो था, मगर था एक कमाल का आइडिया। पहली बार 1774 में बेंजामिन जेस्टी नाम के एक किसान ने एक असली गाय का काउपोक्स (cowpox) उसके पूरे परिवार को वेक्सिनेट करने के लिये इस्तेमाल किया। कई सालों के बाद एडवर्ड जेनर ने औपचारिक रूप से वक्सीन पर अध्ययन किया। इसी वेक्सिनेशन तकनीक से आज अत्यधिक संक्रामक रोगों जैसे, डिप्थीरिया, खसरा, चेचक, और काली खांसी आदि से बचाव मुम्किन है।
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