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अपने इन आठ डर को दूर भगाएं, जीवन आसान बनाएं!

हम सभी रोज कई व्यर्थ डरों में जीते हैं, लेकिन यदि आपको अपने डर को जीतना है, तो पहले खुद को जीतना पड़ेगा। डर से भागो मत, उसका डट कर सामना करो। क्योंकि जितना डर से भागोगे, वो आपके उतना पीछे भागेगा।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Rahul Sharma / Sep 02, 2014

हमारा डर

हम रोज किसी न किसी डर का सामना करते हैं। लेकिन कमाल की बात है डर कहीं बाहर नहीं होता, वह हमारे भीतर ही होता है। स्वार्थ की अधिकता और आत्मविश्वास की कमी और अज्ञानता के कारण हम डरते हैं। इसलिए यदि आपको अपने डर को जीतना है, तो पहले खुद को जीतना पड़ेगा। डर से भागो मत, उसका डट कर सामना करो। जितना डर से डरकर भागोगे, डर उतना ही पीछे भागेगा।
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मदद मांगने से डर

कहते हैं अकेला चना भाढ़ नहीं फोड़ सकता, और ये बात सच भी है, हमारा समाज एक दूसरे की मदद से ही चलता है। लेकिन जब मन में ये डर का भाव आ जाए कि आप मदद मांगने से कमजोर साबित होंगे तो यह एख व्यर्थ का डर है।  
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आप आगे, डर पीछे

दूसरे हमसे ज्यादा खुश हैं और सारी परेशानियां हमारी ही तकदीर में लिखी हैं, ये  सोच एक डर का रूप ले लेती है और हमारा पीछा करना शुरू कर देती हैं। इसी के चलते हम मुश्किलों का सामना करने के बजाय उनसे भागने लगते हैं। इस डर को भी आपको दूर करना होगा।
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कमजोर होने का डर

जिससे लड़ न पाओ, उससे दूर भाग जाना ही विकल्प है। वैसे, हम चाहें भी तो असफलता के डर से दूर नहीं भाग सकते, क्योंकि डर कहीं बाहर से नहीं आता, वह हमारे मन के अंदर ही बैठा रहता है। जैसे ही हम किसी चीज से भागना शुरू करते हैं, और खुद ही सोच लेते हैं कि हम कमजोर हैं और इस चीज के काबिल नहीं हैं।
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जिम्मेदारियों का डर

अमूमन अपनी असफलता, परेशानियों के लिए हम दूसरों को जिम्मेदार और दोषी मान लेने की कोशिश करते हैं, जबकि कुछ जिम्मेदारियां तो हमारी भी होती होंगी। ये जिम्मेदारियों का डर ही तो है। इस समस्या से बचने के लिए जो काम कल पर छोड़ा था, जिससे डर रहे थे, उसे उसी वक्त कर डालें।
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असफलता का डर

कोई भी ज़ीवन जीने की रूल बुक लेकर पैदा नहीं होता। माता, पिता, शिक्षको और बड़ो की उपयोगी सलाह के बावजूद, हम में से सबको को दुनिया में, अपने कई सबक खुद से सीखने पडते हैं। इसलिए न कि गलतियों से डर कर बैठ जाने के हमें गलतियां करके, उनसे सीख लेकर अपने रास्ते खुद ही बनाने चाहिए।
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स्वागत करें

इससे पहले कि डर आपको शर्मीला बना दे, अपने डर को स्वीकारें। उसे अपने शरीर में महसूस करें। उस पर बात करें। उसको कोई नाम देकर कहें कि डर आपका स्वागत है।
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माफी मागने से डर

कई बार लोगों ये समझने लगते हैं कि वे पारंगत हो चुके हैं और गलतियां करने की गुंजायिश ही नहीं बची है। ऐसे में वे न जाने क्यूं किसी से माफी मागने से डरने लगते हैं। उन्हें इसमें खुद के स्वभिमान को चोट पहुंचती दिखती है। जबकी माफी मांगना तो खुद को बेहतर बनाने के रूप है।
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खोजाने का डर

लोग अनायस ही कुछ खओ बैठने के डर में जीनें लगते हैं। जैसे कहीं मेरी नौकरी तो नहीं चली जाएगी, मेरा कोई अपना तो मुझे किसी कारण से नहीं छोड देगा, भविष्य में क्या होगा, आदि अनेक काल्पनिक भय। लेकिन ये पूरी तरह निर्थक होते हैं। बस सही तरह से काम करें और अपनी जिम्मेजारियों का वहन करें, सब ठीक ही होगा।
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याद करें

इससे पहले कि अपनी अक्षमताओं का डर आपको भीतर से कमजोर और अकेला कर दे, अपनी पिछली उपलब्धियों के बारे में सोचें। अपनी क्षमताओं को पहचानें और काम को करना शुरू कर दें। इसके साथ ही अपने काम को महत्वपूर्ण बनाएं और स्वस्थ रहें। फोकस की कमी या लगातार सेहत का ठीक न रहना भी कमजोर बनाता है। सबसे जरूरी सर्वश्रेष्ठ का इंतजार नहीं, बस गिल लगाकर काम करें और जीवन को खुल कर जियें।
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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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