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माहवारी पर पड़ता है रोजमर्रा की इन दस चीजों का असर

वैसे तो समय पर माहवारी न होना कोई भंयकर समस्‍या नहीं है, लेकिन कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी गंभीर समस्‍याओं का कारण बन सकती है।

महिला स्‍वास्थ्‍य By Pooja SinhaAug 16, 2014

माहवारी पर असर

कई महिलाएं पीरियड्स में बदलाव जैसे भारी, हल्‍का या लगातार कम होने की समस्‍या से जूझ रही हैं। लेकिन शर्म या संकोच के कारण इस समस्‍या के बारे में किसी से बात नहीं करतीं। वैसे तो समय पर माहवारी न होना कोई भंयकर समस्‍या नहीं है, लेकिन कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी गंभीर समस्‍याओं का कारण बन सकती है। इसलिए इसके कारणों के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है। और इसके कारण आपको अपनी रोजमर्रा में होने वाली चीजों में देखने को मिल जायेगा। image courtesy : getty images

तनाव

तनाव का माहवारी के लिए जिम्‍मेदार हार्मोंन एस्‍ट्रोजन और प्रोजेस्‍टेरोन पर सीधा असर पड़ता है। जिससे रक्तस्त्राव में अनियमितता आती है और माहवारी चक्र अनियमित होने लगता है। इस समस्‍या को आप योग और ध्यान के माध्‍यम से कम कर सकती हैं। image courtesy : getty images

अत्‍यधिक व्यायाम

अधिक एक्‍सरसाइज से हॉर्मोनल संतुलन में बदलाव आने लगता है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन आपकी मासिक धर्म प्रक्रिया को सामान्य रखता हैं और जरूरत से ज्यादा व्यायाम से एस्ट्रोजन की संख्या में वृद्घि होने से पीरियड्स में बदलाव आने लगता है। image courtesy : getty images

खान-पान का असर

आपके आहार से भी माहवारी प्रभावित होती है। कई बार हम अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ा देते हैं, जिससे शरीर में हार्मोंन के स्‍तर में परिवर्तन आने लगता है। इसका असर आपकी माहवारी पर पड़ने लगता है और वह अनियमित हो जाती हैं। image courtesy : getty images

ज्‍यादा शराब पीना

शराब सेवन और शराब पीने पर नेशनल इंस्टिट्यूट के अनुसार, शराब का अत्‍यधिक सेवन लीवर और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाकर, नियमित मासिक धर्म चक्र का कारण बनता है। शराब अस्थायी रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में वृद्धि कर देता है, जिससे ओवुलेशन के लिए आवश्यक सामान्य हार्मोनल उतार चढ़ाव बाधित हो जाता है। image courtesy : getty images

पीसीओएस

पीसीओएस(PCOS) ओवरी में सिस्‍ट और उसके कारण सही समय पर माहवारी का न आना पीसीओएस कहलाता है। हार्मोन में जरा सा भी बदलाव मासिक धर्म चक्र पर तुरंत असर डालता है। चेहरे पर बाल उग आना, मुंहासे होना, पिगमेंटेशन, अनियमित रूप से माहवारी आना, यौन इच्छा में अचानक कमी आ जाना, गर्भधारण में मुश्किल होना, आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं। यह समस्‍या लगभग 10 प्रतिशत महिलाओं को प्रसव उम्र में प्रभावित करती है। image courtesy : getty images

थायरॉयड

थायरॉयड के कारण भी मासिक धर्म असामान्‍य हो जाता है, इसके कारण पीरियड्स चक्र पर असर पड़ता है। ऐसे में खून की जांच करा लेना ठीक रहता है, जिससे असामान्य मासिक स्राव के सही कारण का पता चल जाता है। image courtesy : getty images

बीमारियां और दवायें

कुछ बीमारियां और दवायें भी एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के लेवर पर असर डालती हैं। दवा ऑव्युलेशन की प्रक्रिया को भी प्रभावित करती हैं। अगर आपकी कोई बीमारी अनियमित माहवारी का कारण बनती है, तो आपको चिकित्‍सक की सलाह लेनी चाहिए। image courtesy : getty images

थकान

थकान भी अनियमित माहवारी के लिए जिम्‍मेदार होता है। भोजन, पानी और आराम की कमी से मासिक धर्म चक्र प्रभावित होता है। इसलिए अनियमित माहवारी की समस्‍या से बचने के दिन भर की गतिविधियों में से अपने लिए पर्याप्‍त समय निकालें और भरपूर नींद लें। image courtesy : getty images

संक्रमण

वैसे तो संक्रमण आपके मासिक चक्र और हार्मोंन के स्‍तर को प्रभावित नहीं करता है लेकिन यह ब्‍ल‍ीडिंग का कारण बनकर मासिक को सामान्‍य से अधिक बार ला सकता है। बैक्टीरियल संक्रमण, श्रोणि सूजन बीमारी, और यौन संचारित संक्रमण गर्भाशय के अंदर सूजन और खून को पैदा कर सकता है। image courtesy : getty images

शिफ्ट कार्य

119,000 महिलाओं पर हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो महिलाएं रात और शाम की शिफ्ट में काम करती हैं, उनमें अनियमित और उतार चढ़ाव के रूप में मासिक धर्म की समस्याओं का खतरा अन्‍य महिलाओं की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक होता है। image courtesy : getty images

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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