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बच्‍चा गोद लेने से पहले जानें ये जरूरी बातें

किसी बच्चे को गोद लेना जिंदगी को बदलने देने वाला अनुभव होता है। जिंदगी में नई खुशिया औऱ चुनौतियो ये भरे इस फैसले को निभाने के लिए धैर्य की बहुत आवश्यकता होती है। अगर आप भी किसी बच्चे को गोद लेना का सोच रहे तो इन बात करें।

परवरिश के तरीके By Aditi Singh May 02, 2016

व्यवहारिक हो गोद लेने का निर्णय

गोद लेने का निर्णय़ भावात्मक होने के साथ व्यवहारिक होना बहुत जरूरी है। वरना ये फैसला आपका और बच्चे दोनो के ही जीवन को परेशान कर सकता है। बच्चों के प्रति प्रेम का ये अर्थ बिल्कुल भी नहीं लगाना चाहिए कि गोद लिए हुए बच्चे को आप आसानी से स्वीकार्य कर लेगें। गोद लेने का आपका निर्णय ना सिर्फ आपका और बच्चे के बल्कि आपके पूरे परिवार और समाज से जुड़ा होता है। गोद लिए बच्चे को अपनापन और भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए काफी समय और मेहनत लगती है।
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सोच-विचार कर लें निर्णय

किसी बच्चे को गोद लेने का निर्णय आसान नहीं होता है। इसके लिए मां-बाप को पूरी तरह से इस बात को स्वीकार्य करना चाहिए कि आने वाले अजनबी बच्चें को वो प्यार दे सकेंगे या नहीं। भावनाओं में बह कर बच्चे को गाद लेना बेवकूफी होता है। इससे ना तो आपका खालीपन घटेगा साथ ही बच्चे का मानसिक शोषण होगा। प्यार और परवरिश दोनो ही अच्छी तरह देने का निर्णय करने के बाद ही बच्चा गोद लेना ठीक रहता है। इसके अलावा कई बार फैमिली लेवल पर हर पहलू पर विचार विमर्श नहीं किया जाता। जो बाद में घर वालों और कपल के लिए मुश्किल भरा डिसिजन बन जाता है।
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परिवार को भी करें सहमत

हमारे समाज में गोद लिए हुए बच्चे खासतौर से जिन्हें परिवार के बाहर से गोद लिया जाता है स्वीकृति नहीं मिल पाती है। इसलिए बच्चे को दोग लेने से पहले अपने निर्णय के बारे में परिवार के अन्य सदस्यों से खुलकर बात करें। इसके लिए अपने घरवालों को बताएं कि आखिर बच्चा गोद लेने का डिसिजन आपने क्यों लिया? इसके अलावा परिवार को पूरी तरह मेंटली राजी करना इसलिए भी जरूरी है ताकि घर में आने के बाद बच्चे को सभी बराबर प्यार करें और उसे किसी तरह की हीनभावना न हो। साथ ही बच्चे को घर के बाहर भी पूरा सम्मान मिलें।
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ज्यादा ना रखें उम्मीदें

बच्चा गोद लेते समय आप लड़की या लड़के को गोद लेना चाहते है और क्यों? इस तरह के सवालों के जवाब पूरी तरह से तैयार रखे। वरना बच्चा गोद लेने मे परेशानी हो सकती है। साथ हो सकता है कि आपको बहुत सुंदर और चार्मिंग बच्चा न मिले। या फिर ऐसा भी हो सकता है कि आपको वैसा बच्चा न मिले जैसा आप गोद लेना चाहते हैं लेकिन इस तरह की बातें आपके डिसिजन में रुकावट नहीं डालनी चाहिए। बच्चे को अडॉप्ट करते हुए प्रैक्टिकल अप्रोच रखें न कि भावनाओं में बहें। इसके अलावा बच्चे को गोद लेने से पहले उसकी मेडिकल रिपोर्ट की जांच जरूर करें ताकि उसकी हेल्थ के बारे में चिंता न करनी पड़े।
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धैर्य के साथ करें परवरिश

बच्चे के घर आने के बाद आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्वक काम हो सकता है। बच्चा आपसे कई तरह के सवाल कर सकता है। आपके तौर तरीकों को समझने में काफी समय ले सकता है। गोद लिए बच्चे की अच्छी परवरिश के लिए आपको ढ़ेर सारे धैर्य की जरूरत होगी। आपको धैर्य के साथ और भावनात्मक रूप से उनसे जुड़ना होगा। उनके अच्छे बुरे सवालों का जवाब देना होगा। सही-गलत बात को समझाना होगा। गोद लिए बच्चे की परवरिश आसान नहीं होती है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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