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जानें घर में खुद से कैसे बनायें टॉयलेट क्‍लीनर

स्वास्थ्य का रिश्ता सिर्फ जीवनशैली या बेहतरीन खानपान से ही नहीं होता। हमारे साफ सुथरे टायलेट से भी होता है। सामान्यतः हम बाजार में उपलब्ध टायलेट क्लीनर से ही अपना टायलेट चमकाते हैं। लेकिन आपको बताते चलें कि बाजार में उपलब्ध टायलेट क्लीनर सिर्फ टायलेट

तन मन By Meera Roy / Jul 15, 2016

घर में टायलेट क्लीनर क्यों बनाएं

जब हम घर में टायलेट क्लीनर बनाते हैं तो निश्चित रूप से खतरनाक रासायनिक टायलेट क्लीनरों से छुटकारा मिल जाता है। यही नहीं अगर घर में छोटे बच्चे या बुजुर्ग हैं तो उन्हें संक्रमण होने का खतरा नहीं होता। इससे बीमारी भी आसपास नहीं फटकती। सबसे बड़ी बात ये कि घर में बने टायलेट क्लीनर को कितने भी दिन रखें, वह किसी को नुकसान हीं पहुंचाता। जबकि बाजार में उपलब्ध रासायनिक टायलेट क्लीनर किसी खतरे की घंटी की माफिक होते हैं। हाथ में गिरने, चेहरे पर लगने या फिर शरीर के किसी भी अंग विशेष में लगने से जलने, खारिश होने, दाग हो जाने आदि का खतरा होता है।प्राकृतिक टायलेट क्लीनर से टायलेट के साफ सुथरे और स्वास्थ्य फ्रेंडली होने की संभावना भी ज्यादा होती है। प्राकृतिक टायलेट क्लीनर में इस्तेमाल होने वाली चीजें-
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सफेद विनेगर या नींबू का रस

आपको शायद यह जानकर हैरानी हो कि विनेगर घर में बने तमाम चीजों के लिए बेहतर है। फिर चाहे बात टायलेट क्लीनर की हो या फिर वाशिंग पाउडर की। असल में विनेगर एक प्रकार का हल्का एसिड है। यह बदबू को, संक्रमण को खत्म करने का माद्दा रखता है। अतः प्राकृतिक टायलेट क्लीनर के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है।नींबू के रस में सिट्रिक एसिड भी पाया जाता है। इसकी मदद से आप आसानी से अपना टायलेट साफ कर सकते हैं। इतना ही नहीं जो दाग दूसरे घर में बने टायलेट क्लीनर से न जा रहे हों, उसकी जगह नींबू के रस का उपयोग कर गहरे दाग को भी हटाया जा सकता है।
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बोराक्स

सबसे पहले आपको यह स्पष्ट कर दें कि यह बोरिक एसिड जितना जहरीला नहीं है। वास्तव में यह सोडियम टेट्राबोरेट है। यह नमक या बेकिंग सोडा जितना ही असरकारक है। खासकर यदि आप इसे बहुत ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करते हैं तो इसके दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। अतः इसका उपयोग करते हुए इसकी मात्रा का ख्याल अवश्य रखें। यह टायलेट को पूरी तरह साफ करता है, बदबू हटाता और दाग भी खत्म करता है।
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आवश्यक तेल

घर में टायलेट क्लीनर के लिए तेल भी आवश्यक तत्व है। असल में इन तेल में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं। अतः टायलेट क्लीनर में इनका इस्तेमाल कर हम अपने टायलेट को एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल बना सकते हैं। इसके लिए आप चाय की पत्ती से बने तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा टायलेट क्लीनिंग के लिए लैवेंडर, नींबू या संतरे के पौधे से बना तेल, पुदीना, मेहंदी और नीलगिरि के पेड़ों का इस्तेामल किया जा सकता है।
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बाजार के टायलेट क्लीनर में क्या होता है

बाजार में उपलब्ध ज्यादातर टायलेट क्लीनर में हाइड्रोक्लोरिक एसिड और क्लोराइन ब्लीच का इस्तेमाल किया जाता है। जहां एक ओर हाइड्रोक्लोरिक एसिड एक जहरीला रसायन है। यह बच्चों से लेकर आपके पालतु जानवरों, बीमार लोगों को और बुजुर्गों के लिए हानिकारक रसायन है। यही नहीं हाइड्रोक्लोरिक एसिड की गंध हमारे नाक के लिए भी खराब होती है। इसके अलावा इससे गले में संक्रमण, श्वसन प्रणाली में समस्याएं हो सकती हैं।दूसरी ओर क्लोराइन ब्लीच एक तीखा रसायन है। यह इतना घातक है कि इससे जान तक जा सकती है। यह धीरे धीरे चीजों को क्षय करता है। हालांकि यह रसायन टायलेट के बैक्टीरिया को मार डालता है; लेकिन यह भी नहीं भूलना चाहिए कि यह इन्सानी शरीर के लिए भी हानिकारक है। यह लिविंग टिश्यू को नष्ट कर देता है। इससे नाक, कान, त्वचा सम्बंधित बीमारियां तो हो ही सकती है। साथ ही अस्थमा के लक्षण भी इससे पनप सकते हैं।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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