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इन स्थितियों में न लें एंटीबॉयटिक

सामान्‍य समस्‍या होने पर हम एंटीबॉयटिक दवाओं का सेवन करते हैं, लकिन कुछ समस्‍यायें ऐसी भी हैं जिनमें एंटीबॉयटिक दवायें बिलकुल भी कारगर साबित नहीं होती हैं।

तन मन By Nachiketa SharmaDec 31, 2014

नुकसानदेह है एंटीबॉयटिक

एंटीबॉयटिक दवाओं के सेवन से सर्दी, जुकाम, सिरदर्द, बदन दर्द, आदि समस्‍याओं का त्‍वरित उपचार हो जाता है। इसलिए हम सामान्‍य सी समस्‍या होने के बाद भी एंटीबॉ‍यटिक दवाओं का सेवन करते हैं। लेकिन वास्‍तव में ऐसा करना नुकसानदेह हो सकता है। एंटीबॉयटिक दवाओं का साइड-इफेक्‍ट हो सकता है और इसके कारण गंभीर समस्‍या हो सकती है। यहां तक कि इसके कारण आपकी जान भी जा सकती है। इसलिए कुछ मामलों में एंटीबॉयटिक दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए, क्‍योंकि यह दवा बिलकुल भी प्रभावी नहीं है।

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गले में खराश

गले में खराश की समस्‍या किसी भी कारण से हो सकती है, लेकिन गले में खराश होने के बाद एंटीबॉयटिक का सेवन करना ठीक नहीं है। दरअसल गले में खराश की समस्‍या बैक्‍टीरिया के संक्रमण के कारण होती है। जबकि एंटीबॉयटिक के जरिये बैक्‍टीरिया से होने वाले संक्रमण का उपचार नहीं हो सकता है। इसलिए अगर गले की खराश की समस्‍या के लिए आप एंटीबॉयटिक का सेवन करते हैं यह दवा प्रभावी नहीं होगी।

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खांसी आने पर

खांसी आने पर मुंह से कफ और बलगम बाहर निकलता है, ज्‍यादातर समस्‍या तीव्र ब्रोंकाइटिस के कारण होता है। जब भी खांसी के साथ रंगीन बलगम निकलता है तब ब्रोंकाइटिस की समस्‍या होती है, इसमें मुंह से हरा या पीला बलगम बाहर निकलता है। यह एक प्रकार का वायरस संक्रमण है जिसके उपचार के लिए एंटीबॉयटिक दवायें असर नहीं करती हैं।

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त्‍वचा की समस्‍या

मान लीजिए अगर आपको किसी मकड़ी ने काट लिया है और इसके कारण आपको फोड़ा निकल आया है। यह बहुत ही दर्दनाक स्थिति होती है और इसकी पीड़ा भी असहनीय होती है। यह समस्‍या बैक्‍टीरिया के कारण होती है, जिससे बचाव के लिए आप अगर एंटीबॉयटिक का सेवन करते हैं तो वह प्रभावी नहीं होगी। इसलिए ऐसी समस्‍या होने पर एंटीबॉयटिक दवाओं का सेवन न करें।

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साइनस

साइनस एक प्रकार का संक्रमण जो नाक और सिर को प्रभावित करता है। साइनस की समस्‍या ठंड के मौसम में अधिक होती है। इसके कारण सिर में असहनीय दर्द होता है। अगर इसके दर्द के उपचार के लिए आप एंटीबॉयटिक दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो यह भी प्रभावी नहीं होंगी। क्‍योंकि साइनस संक्रमण के कारण होता है और एंटीबॉयटिक उसमें कारगर साबित नहीं होती है।

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दांतों में दर्द

दांतों की समस्‍या भी आम है, और दांतों में दर्द की शिकायत अक्‍सर देखने को मिलती है। दांतों में कैविटी के कारण व्‍यक्ति जब भी कोई पेय पदार्थ ग्रहण करता है तो इसके कारण दांतों में दर्द होता है। दांतों में दर्द की समस्‍या से पीढि़त व्‍यक्ति इससे तुरंत छुटकारा चाहता है। इसके लिए वह एंटीबॉयटिक की शरण में जाता है, लेकिन एंटीबॉयटिक दवायें इसमें बिलकुल भी मददगार नहीं होती हैं।

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नुकसानदेह हैं ये दवायें

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की मानें तो भारत में एंटीबॉयटिक दवाओं का प्रयोग धड़ल्‍ले से किया जा रहा है। किसी भी प्रकार की सामान्‍य समस्‍या होने पर भी व्‍यक्ति इन दवाओं का सेवन करता है। इन दवाओं का असर बाद में होता है और नुकसानदेह परिणाम हो सकते हैं। दरअसल एंटीबॉयटिक हमारे पेट के अच्‍छे बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीवों को समाप्‍त कर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है। ऐसे में एक मामूली सा संक्रमण भी खतरनाक हो सकता है।

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जानलेवा हो सकती है ये दवा

चिकित्‍सक से सलाह लिये बगैर एंटीबॉयटिक दवाओं के सेवन से परहेज करना चाहिए। इन दवाओं का अधिक मात्रा में सेवन करना भी जानलेवा हो सकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञों द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला है कि अलग-अलग बीमारियों के लिए एंटीबायोटिक दवाएं लेने वाले 15 फीसदी मरीजों को डायरिया हो गया। यह डायरिया एंटीबायोटिक से जुड़े डायरिया के रूप में जाना जाता है और एक खास जीवाणु 'क्लोस्टि्रडियम डिफीसाइल' के चलते होता है, यह जानलेवा हो सकता है। इसलिए कुछ स्थितियों में एंटीबॉयटिक का सेवन करने से बचें।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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