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पाचन क्रिया को सही रखेंगे ये सात सप्‍लीमेंट

अस्‍वस्थ खानपान और अनियमित दिनचर्या के कारण पाचन संबंधित समस्‍या होना सामान्‍य बात है, इसके कारण कब्‍ज और एसिडिटी होती है, इससे निजात पाने के लिए सप्‍लीमेंट का सेवन जरूरी है।

स्वस्थ आहार By Nachiketa Sharma / Dec 19, 2014

पाचन क्रिया के लिए सप्‍लीमेंट

अनियमित दिनचर्या और खाने में तैलीय और जंक फूड की अधिकता का सबसे अधिक असर पाचन क्रिया पर पड़ता है। इसके कारण पाचन की समस्या आज बेहद आम हो गई है। हर उम्र वर्ग के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। एक ही जगह घंटों बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों का अभाव, नियमित व्‍यायाम न करना, जंक फूड का सेवन करना, तनाव लेना, भरपूर नींद न लेना, स्‍वस्‍थ आहार से दूरी, आदि इस समस्‍या के सबसे प्रमुख कारण हैं। पाचन क्रिया को सुचारु करने के लिए सप्‍लीमेंट का सेवन कीजिए, यह खाने को आसानी से पचाने में मदद करेगा।

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क्‍या है पाचन तंत्र

हरे शरीर को स्‍वस्‍थ रखने में पाचन तंत्र का अहम योगदान है। हम जो भी खाना खाते हैं, उसे सही रूप से शरीर में पहुंचाने का काम पाचन तंत्र करता है। पाचन तंत्र खाने को ऊर्जा में बदल कर शरीर को पोषण और ऊर्जा प्रदान करता है और इसके कारण ही शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। पाचन तंत्र में गड़बड़ी होने से हम जो भी खाते हैं, उसे सही से पचा नहीं पाते। इस वजह से शरीर को आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स नहीं मिलते। इससे हमारे शरीर में हानिकारक तत्व बढ़ने लगते हैं, साथ ही इम्यून सिस्टम भी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है। इसके कारण कब्‍ज, एसिडिटी, सीने में जलन, सिरदर्द जैसी पाचन क्रिया से संबंधित बीमारियां होती हैं।

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प्रोबायोटिक्‍स

यह एक प्रकार के अतिसूक्ष्‍म जीव होते हैं जो नैचुरली हमारी आंतों में पाए जाते हैं। ये हमारे शरीर के फायदेमंद जीवाणु होते हैं जो हानिकारक जीवाणुओं को बढ़ने से रोकते हैं। ऐसे सप्‍लीमेंट लेने से शरीर में इनकी कमी नहीं होती है और ये पेट संबंधी समस्‍याओं को होने से रोकते हैं। डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही व कुछ पौधों में प्रोबायोटिक बैक्‍टीरिया होते हैं। कई कंपनियां प्रोबायोटिक दूध और दही बाजार ला चुकी हैं, आप इनका सेवन भी कर सकते हैं।

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मुलेठी या डीजीएल

मुलेठी को महाऔषधि माना जाता है, इसमें डीग्‍लाइसिरीजिनेटेड (Deglycyrrhizinated) सप्‍लीमेंट होता है जो पेट की समस्‍याओं से निजात दिलाता है। इसमें एंटीबायटिक एवं बैक्‍टीरिया से लड़ने की क्षमता पायी जाती है। मुलेठी के प्रयोग से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर और छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी लाभ होता है। खाने को आसानी से पचाकर पाचन क्रिया को सुचारु करने के लिए इसका सेवन फायदेमंद है। इसका सेवन गर्भवती महिलाओं को भी करने की सलाह दी जाती है।

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पुदीने का तेल

पेपरमिंट यानी पु‍दीना का तेल पाचन क्रिया कसे बढ़ाने में अहम योगदान देता है। पुदीने का तेल प्रयोग करने से अपच की समस्या नहीं होती है। खाने को स्वादिष्ट बनाने के लिए, थोडा सा पुदीने का तेल खाने में डाले या खाने के बाद इस तेल की कुछ बूंदें एक गिलास गर्म पानी में डालकर पीने से पाचन क्रिया दुरुस्‍त होती है। औषधीय गुणों से भरा यह तेल कब्‍ज औश्र गैस की समस्या से छुटकारा दिलाता है। पुदीने का तेल, पेट में उठने वाले मरोड़ों और पेट की अन्य समस्याओं का इलाज करता है।

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कैमोमाइल यानी बबूने का फूल

बबूने के फूल का तेल का सेवन करने से पेट संबंधी समस्‍यायें दूर होती हैं। कैमोमाइल पेट के साथ त्‍वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह पेट की मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को सुचारु करता है, इससे खाना आसानी से पचता है। कैमोमाइल पेट की आंत की दीवारों को आराम प्रदान करता है और गैस संबंधी समस्‍या को दूर करता है।

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अदरक

पेट का दर्द हो या सीने की जलन, पेट में कब्‍ज हो या गैस की समस्‍या इन सबके लिए अदरक का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा अदरक से मतली और उल्‍टी जैसी पेट से संबंधित बीमारियों का उपचार किया जाता है। पाचन संबंधी किसी भी प्रकार के उपचार के लिए अदरक का सेवन कीजिए। अदरक का सेवन चाय के साथ या इसका चूर्ण बनाकर किया जा सकता है। नियमित रूप से 1 से 3 ग्राम अदरक का सेवन आप कर सकते हैं।

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इसबगोल

इसे सीलियम भी कहते हैं, यह पेट के लिए वरदान की तरह है। यह पौधा गेहूं के पौधे की तरह दिखता है, इसमें तना नहीं होता, लेकिन पत्तियों होती हैं। इसके बीज के ऊपर सफेद पाउडर लगा होता है, जिसे भूसी कहते हैं। पेट से संबंधित बीमारियों को ठीक करने में यह बहत कारगर है। आंत में दर्द या जलन से परेशान हैं तो ठंडे पानी के साथ इसबगोल का सेवन करने से आराम मिलता है। अपच, डायरिया और दस्त से परेशान हैं तो दही में दो चम्मच इसबगोल की भूसी डालकर दिन भर में दो-तीन बार सेवन करने से राहत मिलती है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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