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स्ट्रेप थ्रोट और सोर थ्रोट में क्या है फर्क

स्ट्रेप थ्रोट और सोर थ्रोट दोनों ही गले की ऐसी समस्याएं हैं जिनमें अंतर करना मुश्किल होता है। एक जैसे क्षणों की वजह से कई बार लोग समझ नहीं पाते कि उनके गले में जो दर्द व सूजन है वो सामान्य दिक्कत नहीं बल्कि स्ट्रेप थ्रोट है। सोर थ्रोट सामान्यत: वायरल

संक्रामक बीमारियां By Shabnam Khan / Dec 04, 2014

क्या हैं सोर थ्रोट और स्ट्रेप थ्रोट

गले में दिक्कत की वजह सोर थ्रोट (गले में सूजन) या स्ट्रेप थ्रोट दोनों हो सकती हैं। इन दोनों स्थितियों में कुछ समानताएं भी हैं और कुछ अंतर भी। सोर थ्रोट में गले में दर्द और खराश की समस्या होती है। गले में दर्द सोर थ्रोट का सबसे पहले सामने आने वाला लक्षण होता है जबकि स्ट्रेप थ्रॉट गले में बैक्टीरियल इन्फेक्शन की वजह से होता है। इसमें भी गले में खराश की समस्या होती है। स्ट्रेप थ्रॉट सोर थ्रॉट के मुकाबले कम पाया जाता है। अमूमन लोग एक जैसे लक्षणों की वजह से इन दोनों समस्याओं में अंतर नहीं कर पाते। समस्या को ठीक से न समझ पाने के कारण उसका इलाज भी ठीक नहीं होता। आइये इस स्लाइड शो के जरिये स्ट्रेप थ्रोट और सोर थ्रोट के अंतर और एकरूपता को विस्तार से समझते हैं।

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सोर थ्रोट के कारण

सोर थ्रोट का सबसे सामान्य कारण वायरल इन्फेक्शन होता है। ऐसे कई वायरस हैं, जिनकी वजह से सोर थ्रोट होता है। रीनोवायरस, मीजल्स, इन्फ्लूएंजा और अन्य वायरस फैरिन्जाइटिस के स्रोत हैं। बैक्टीरिया के कारण भी गले में सूजन की समस्या हो सकती है। कुछ बैक्टीरियल इन्फेक्शन काफी खतरनाक होते हैं। जैसे कि डिप्थीरिया। इसमें गले की झिल्ली बंद हो जाने से श्वास बन्द हो सकती है। मुंह के छालों से भी गले में सूजन हो सकती है।

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स्ट्रेप थ्रोट के कारण

स्ट्रेप थ्रोट एक बीमारी है जिसकी वजह से गले में सूजन आ सकती है। स्ट्रेप थ्रोट बीमारी ग्रुप ए बेटा-हेमोलिटिक स्ट्रेपटोकोकस (beta-hemolytic streptococcus) नाम के बैक्टीरिया की वजह से होती है। स्ट्रेप थ्रोट मुख्य रूप से एक संक्रामक बीमारी है। संक्रमित व्यक्ति के छींकने, थूकने आदि से ये संक्रमण आसानी से दूसरे लोगों में चला जाता है। इसके अलावा मरीज का जूठा खाने व एक ही बर्तन से कुछ पीने पर भी ये बैक्टीरिया स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है। यह बीमारी बच्चों, किशोरों और वयस्कों सभी को हो सकती है। जिन लोगों को ये बीमारी होती है, वो जब तक एक से दो दिन एंटीबायोटिक दवाएं न ले लें, उनसे संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बना रहता है।

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सोर थ्रोट के लक्षण

सोर थ्रोट के सामान्य लक्षण इस तरह से हैं- लाल और सूजा हुआ गला। टोनसिल्स में सूजन। टोनसिल्स शरीर के इम्यून सिस्टम का हिस्सा होते हैं। जब टोनसिल्स सूज जाते हैं, तो पूरे गले में दर्द बढ़ जाता है। इस बीमारी में फेफड़ों में दर्द होता है और कंजस्टिड महसूस होता है। इससे पूरा श्वसन तंत्र संक्रमित हो सकता है। नासिका मार्ग बंद होने की वजह से सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। सोर थ्रोट के साथ बुखार होना आम है क्योंकि इम्यून सिस्टम वायरस को खत्म करने की कोशिश कर रहा होता है। यदि आपको ये सब लक्षण दिखाई पड़ रहे हों तो समझ जाएं कि आपको सोर थ्रोट की समस्या है।

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स्ट्रेप थ्रोट के लक्षण

स्ट्रेप थ्रोट के लक्षण हल्के या बहुत तेज दोनों हो सकते हैं। स्ट्रेप रोगाणुओं के संपर्क में आने के बाद आप दो से पांच दिन की अवधि में बीमार महसूस करने लगेंगे। स्ट्रेप थ्रोट के सामान्य लक्षण इस तरह से हैं- प्रभावित व्यक्ति को तेज बुखार हो सकता है। कंपकपी के साथ साथ उल्टी, सिरदर्द व मांसपेशियों में जकड़न की समस्या हो सकती है। स्ट्रेप थ्रोट का सबसे सामान्य लक्षण टोनसिल्स में पस का इकट्ठा होना हो सकता है। कुछ मरीजों के तालू में लाल-लाल दाने हो सकते हैं। पीड़ित व्यक्ति की भूख कम हो सकती है। या फिर कुछ लोगों को अजीब चीज़ें खाने या चखने का मन भी हो सकता है। ऐसा संभव है कि रोगी में ये सारे लक्षण होने के बावजूद उसे स्ट्रेप थ्रोट बीमारी न बो, बल्कि वायरल इन्फेक्शन की वजह से ये सब हो रहा हो। इसलिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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सोर थ्रोट के लिए उपचार

इस प्रकार के सोर थ्रोट के लिए चिकित्सक एंटी-फंगल दवाओं की सलाह देता है। आमतौर पर डॉक्टर 8-10 दिन की दवा देते हैं। जल्दी दवा छोड़ देने से ये समस्या फिर से भी हो सकती है। बहुत हल्के सोर थ्रोट में ओवर-दि-काउंटर दवाएं भी ली जा सकती हैं। दर्द निवारक दवाओं से आमतौर पर बुखार भी उतर जाता है। अगर आपको इन्फ्लूएंजा हो तो ऐस्प्रिन न लें। इन्फ्लूएंजा के रोगियों को ऐस्प्रिन खाने से साइड इफेक्ट हो सकता है। काफी लोग गले के हल्के दर्द व सूजन के लिए घरेलू उपचार का सहारा भी लेते हैं। सोर थ्रोट से राहत के लिए नमक के गर्म पानी से गरारा किया जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा गर्म पेय जैसे कि चाय, सूप और पानी पीने से भी गले को आराम मिलता है।

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स्ट्रेप थ्रोट के लिए उपचार

स्ट्रेप थ्रोट का पता लगाने के लिए डॉक्टर आमतौर पर लैब में कुछ टेस्ट करवाते हैं। टेस्ट के परिणाम सकारात्मक आने पर इलाज किया जाता है। स्ट्रेप थ्रोट के लिए कई एंटी-बायोटिक्स दी जाती हैं। अगर आपके बच्चे को स्ट्रेप थ्रोट है तो आपका डॉक्टर उसे पेनिसिलिन दे सकता है। अगर बच्चे को निगलने में ज्यादा दिक्कत है तो ये ड्रग इंजेक्शन के जरिये दिया जा सकता है। एमोक्सिलिन भी दिया जा सकता है, क्योंकि बच्चों के हिसाब से ये स्वाद में बेहतर होती है और चबाने वाली टेबलेट के रूप में भी उपलब्ध होती है। अगर बच्चे को एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट लेने के बाद ठीक महसूस होता है और बुखार नहीं आता तो वो एक दिन बाद स्कूल जा सकता है लेकिन ध्यान रखें, उसे दवा का पूरा कोर्स दें, नहीं तो गले में फिर से दिक्कत शुरू हो जाती है।

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चिकित्सक की जांच से अंतर साफ

गले के दर्द के बहुत सारे कारण हो सकते हैं, भले ही उनके लक्षण समान हों। इसलिए ये सलाह दी जाती है कि आप अपने चिकित्सक से स्ट्रेप थ्रोट की जांच करवा लें। इस स्थिति का पता लगाने के लिए थ्रोट कल्चर टेस्ट करवाया जाता है। एक डिवाइस से आपके गले को साफ किया जाएगा। उस डिवाइस को एक कप में रखा जाएगा ये देखने के लिए इन्फेक्शन बढ़ता है या नहीं। अगर इन्फेक्शन बढ़ता है तो मरीज को स्ट्रेप थ्रोट इन्फेक्शन है। तभी आपका डॉक्टर निर्णय करेगा कि आपको कौन सी दवाएं दी जाएं। अन्यथा, सामान्य सोर थ्रोट के लिए बहुत भारी दवाएं नहीं दी जाती। उसके लिए कई बार एक दो खुराक एंटीबायोटिक्स या फिर गर्म पानी के गार्गल से काम चल जाता है।

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