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मधुमेह और मानसिक स्वास्थ्य में संबंध

मधुमेह एक गंभीर समस्या है, जिससे रोगी का पूरा शरी और स्वास्थ्य प्रभावित होता है। ऐसे में इससे मानसिक स्वास्थ्य पर भी कई प्रकार से प्रभाव पड़ता है।

डायबिटीज़ By Rahul SharmaNov 07, 2014

मधुमेह और मानसिक स्वास्थ्य

मधुमेह एक गंभीर समस्या है, जिससे रोगी का पूरा शरी और स्वास्थ्य प्रभावित होता है। मधुमेह की गंभीरता के चलते इसके लगातार प्रबंधन और देख-भाल की जरूरत होती है। ऐसे में इससे मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। इस संबंध में की शोध भी हुए है, जो डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध के संदर्भ में कुछ खुलासे करते हैं। तो चलिये जानते हैं कि मधुमेह का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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दिमाग की क्षमता हो सकती है कम

एबीसी की ख़बर के अनुसार सिडनी मेमोरी एंड एजिंग स्‍टडी के हाल ही में जारी परिणामों में बताया गया कि डायबिटीज से ग्रसित उम्रदराज व्यक्तियों की दिमाग़ की क्षमता सामान्‍य व्‍यक्तियों की तुलना में कम हो जाती है। इस शोध में डायबिटीज और दिमाग की क्रियाशीलता के बारे में जानने के लिए शोधकर्ताओं ने दो साल तक 880 लोगों पर नज़र रखी थी।
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दिमाग के सिकुड़ने का ख़तरा

यूनिव‌र्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के शोध के अनुसार डायबिटीज टाइप- 2 के मरीजों के दिमाग के सिकुड़ने का ख़तरा ज़्यादा होता है। पिछले दस सालों से डायबिटीज की समस्या वाले 614 डायबिटिक मरीजों पर हुए अध्ययन में उन्होंने पाया कि जिन्हें जितने लंबे समय से डायबिटीज है उनके दिमाग में संकुचन की प्रक्रिया अधिक हुई है।
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डायबिटीज और अवसाद

अवसाद अर्थात डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक अवस्था है, जो कि मधुमेह के निदान के दौरान हो सकती है। अवसाद के चलते दुख की भावना होती है और जीवन की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। लेकिन अवसाद भी अन्य बीमारियों की ही तरह होता है और इसे भी उपचारित किया जा सकता है। उपचार अवसाद को कम और मधुमेह नियंत्रण में सुधार कर सकता है।
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मधुमेह और गुस्सा

क्रोध मधुमेह की एक आम प्रतिक्रिया है, तथा पूरी तरह से प्राकृतिक भी है। डायबिटीज के निदान से गुज़र रहे लोग अक्सर यह सोचते हैं कि भला वे क्यों अधिक गुस्सा करते हैं, जबकि उनके साथ वाले अन्य लोगों को ऐसा नहीं होता है।
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मधुमेह और इनकार की भावना

डिनायल अर्थात इनकार की भावना, मधुमेह निदान के समय महसूस की जानी वाली एक आम भावना है। डिनायल एक मुश्किल भावना है। ये तब होती है, जब कोई इंसान ये मानने को राड़ी ही नहीं होता कि उसे किसी प्रकार की कोई समस्या है।
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मधुमेह और डर

डर, डायबिटीज के साथ होने वाली एक सामान्य प्रतिक्रिया है। डर तब पैदा होता है, जब मधुमेह के कारण भविष्य में हो सकने वाली गंभीर समस्याओं और उनसे होने वाले नुकसान का ख़याल दिमाग़ में आता है। मधुमेह एक गंभीर स्थिति है, और इसे नियमित रूप से प्रबंधन की आवश्यकता होती है। तो ऐसे में डर का होना भी स्वभाविक है।  
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कीटोएसिडोसिस (ketoacidosis)

कीटोएसिडोसिस में इंसुलिन के साथ रक्त शर्करा के उच्च स्तर व कार्बनिक अम्ल (जिसे किटोन्स भी कहते हैं) की कमी से मरीज़ में डिहाईड्रेशन हो जाता है। कीटोएसिडोसिस में दिमाग पर भी प्रभाव हो सकता है। इसमें मरीज़ बीमार हो जाता है और उसे सिर दर्द की समस्या होती है। आमतौर पर कीटोएसिडोसिस टाइप 1 मधुमेह रोगियों में पाया जाता है, हालांकि यह किसी भी मधुमेह रोगी में विकसित हो सकता है।
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हाइपोग्लाइसीमिया

हाइपोग्लाइसीमिया के विकसित होने का कारण मधुमेह हो सकता है। मधुमेह रोगियों में डायबटीज का बहुत ज्यादा ईलाज लेने से हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है। यह समस्या तब होती है जब ब्लड शुगर (ग्लूकोज) का स्तर कम होता है। हाइपोग्लाइसीमिया के कारण दिमाग़ पर गंभीर प्रभाव हो सकता है और सिर दर्द, दोहरा दिखाई देना, धुंधला दिखाना, ज्यादा भूख लगना, चक्कर आना व भम्र पैदा होने आदि समस्याएं हो सकती है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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