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माइग्रेन को दूर करने में मददगार हर्ब्‍स

माइग्रेन की समस्या होने पर ज्यादातर लोग दवाओं की मदद से इससे निजात पाते हैं। लेकिन वे इस बात से अनजान हैं कि ये दवाएं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए इस समस्‍या से बचने के लिए आप कुछ हर्ब्‍स की मदद ले सकते हैं।

घरेलू नुस्‍ख By Pooja SinhaFeb 26, 2015

माइग्रेन में मददगार हर्ब्‍स

अस्वस्थ जीवनशैली और खानपान में पौष्टिक तत्‍वों के अभाव के कारण तनाव और सिरदर्द की समस्‍या आम होती जा रही है। तनाव और सिरदर्द अधिक दिनों तक रहे तो यह माइग्रेन का रूप ले लेता है। माइग्रेन में सिर के एक ही हिस्से में दर्द होता है। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें रह-रहकर सिर में एक तरफ बहुत ही चुभन भरा दर्द होता है। यह दर्द कुछ घंटों से लेकर तीन दिन तक बना रहता है। इसमें सिरदर्द के साथ-साथ गैस्टिक, मितली, उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके अलावा माइग्रेन में रोशनी, तेज आवाज से परेशानी महसूस होती है। माइग्रेन की समस्या होने पर ज्यादातर लोग दवाओं की मदद से इससे निजात पाते हैं। लेकिन वे इस बात से अनजान हैं कि ये दवाएं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए इस समस्‍या से बचने के लिए आप कुछ हर्ब्‍स की मदद ले सकते हैं। आइए ऐसे की कुछ हर्ब्‍स के बारे में जानें।
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हल्दी

हल्‍दी चिकित्‍सकीय गुणों से भरपूर होती है। हल्‍दी में मौजूद एंटी-इफ्लेमेंटरी और एंटीऑक्‍सीडेंट गुणों के कारण प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। यह हर्ब बहुत अधिक प्‍लेटलेट बनने में बाधा उत्‍पन्‍न कर और मस्तिष्‍क में रक्‍त के प्रवाह का प्रभावित कर माइग्रेन में आराम पहुंचता है। युनिवर्सिटी ऑफ मिसिसिपी मेडिकल सेंटर के अनुसार, घावों पर लगाने वाले एंटीसेप्टिक के लिए हल्दी माइग्रेन के इलाज के लिए भी बहुत लाभकारी होती है।
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अदरक

माइग्रेन के दर्द पर काबू पाने के लिए अदरक का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। अदरक एक बेहतरीन नैचुरल पेनकिलर है। अदरक में एंटी-इन्‍फ्लेमेटरी तत्‍व होते हैं जो किसी भी प्रकार के दर्द पर आसानी से काबू पा लेते हैं। यानी अगर आपको सिरदर्द, तनाव, माइग्रेन की समस्‍या हो तो उसे दूर करने के लिए अदरक की चाय का सेवन कीजिए। इसके अलावा अदरक में ऐसे तत्‍व भी पाये जाते हैं जो पाचन क्रिया को सुचारु करते हैं। यानी माइग्रेन के कारण होने वाली मतली और उल्‍टी की शिकायत भी दूर होती है।
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फीवरफ्यू

माइग्रेन सिर में रक्त के प्रवाह में तेजी से बदलाव के कारण होता है और गंभीर सिर दर्द, मतली, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, और ध्वनि के साथ जुड़ा हुआ होता है। अगर आपको बहुत तेज माइग्रेन है, तो आप फीवरफ्यू हर्ब्स ले सकते हैं। इस हर्ब में मौजूद एंटी-इफ्लेमेंटरी गुणों के कारण यह माइग्रेन के दर्द को दूर करने में बहुत उपयोगी होता है। इससे रक्त की शिराओं को आराम पहुंचता है। लेकिन इस हर्ब का इस्‍तेमाल रक्त को पतला करने वाले हर्ब्‍स या दवाओं के साथ सेवन नहीं करना चाहिए।
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लाल मिर्च

लाल मिर्च न्यूरोपेप्टाइड की उपस्थिति के कारण के कारण माइग्रेन में मदद के लिए जाना जाता है, जो माइग्रेन के पैथोफिजियोलॉजी में शामिल होता है। न्यूरोपेप्टाइड मस्तिष्‍क के लिए रक्‍त के प्रवाह को प्रभावित कर माइग्रेन के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। इस पर किए गए वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि इसमें से तत्व मौजूद हैं जो शरीर में उठने वाले दर्द के निवारण के लिए लाभदायक होती है।
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पुदीना

एक कप पुदीने से बनी हर्बल चाय मतली के साथ होने वाले माइग्रेन के दर्द से छुटकारा पाने का बहुत ही प्रभावी तरीका है। इसके अलावा यह सर्दी खांसी की दवा के रूप में भी काम करती है जो माइग्रेन के साथ जुड़े साइनस से राहत देने में मदद करती है। साथ ही इससे बना तेल भी माइग्रेन में बहुत फायदेमंद होता है। माइग्रेन की परेशानी होने पर सिर के दर्द वाले हिस्‍से में पिपरमेंट ऑयल की मालिश करने से राहत मिलती है।
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लैवेंडर ऑयल

लैवेंडर ऑयल में एक ऐसी शांत खुशबू (अरोमा) होती है जोकि इसे एक उत्कृष्ट तंत्रिका टॉनिक बनाता है। खुशबूदार लैवेंडर ऑयल सिर-दर्द और माइग्रेन के दर्द के लिए एक शानदार घरेलू उपाय है। यह सिरदर्द, चिंता, अवसाद, तंत्रिका तनाव और भावनात्मक तनाव को ठीक करने में सहायक होता है। हालांकि, लैवेंडर तेल मौखिक रूप से नहीं लिया जाना चाहिए। लेकिन इसे किसी भी चीज में मिलाये बिना सुरक्षित रूप से लगाया जा सकता है।   
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धनिये के बीज

धनिया चिकित्सा गुणों के लिए जाना जाता है और यह एलर्जी से सिरदर्द और डायबिटीज तक कई प्रका की बीमारियों के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होता है। धनिया के बीज में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुणों के कारण यह सिरदर्द के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। आप इसके बीज को चबा सकते हैं या भोजन की तैयारी में इनका उपयोग कर सकते हैं।
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रोजमैरी

रोजमैरी एक ऐसा कुदरती पौधा है, जिसके पत्‍तों, फूलों, बीजों एवं छालों में औषधीय गुण समाए होते हैं। सदियों से, इस बारहमासी जड़ी-बूटी का इस्‍तेमाल दर्द, स्मृति कठिनाइयां, स्नायु संबंधी विकार और सिर दर्द के उपचार में किया जाता रहा है। हाल ही में, यह माइग्रेन के लिए एक पूरक चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। माइ्ग्रेन होने पर मेंहदी के फूलों को सिरके में पेस्ट बनाकर लेप करना चाहिए। फूल उपलब्ध न होने पर पत्तियों का भी पेस्ट बनाकर लेप करने से लाभ मिलता है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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