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विश्व हास्य दिवस : हंसी और योग की जुगलबंदी है सेहत के लिए कमाल

यदि आप परेशान, दुखी और उदास हैं और अपने जीवन में और अधिक हंसी और खुशी लाना चाहते हैं तो आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हंसी और योग की जुगलबंदी अर्थात लाफ्टर योग बहुत ही अच्‍छा है।

घरेलू नुस्‍ख By Rahul Sharma / May 03, 2018

हंसी और योग की जुगलबंदी

सुबह- सुबह अगर आप अपने आस पास के पार्क में देखें तो बहुत से लोग एक पास खडे या बैठे नजर आ ही जायेंगे और बिना किसी बात के ठहाके लगाते दिख जाएंगे। दरअसल, यह तनाव भगाने का एक सबसे अच्‍छा तरीका है जिसे ‘लाफ्टर थेरेपी कहा जाता है। लेकिन जब हंसी के साथ योग को मिला दिया जाता है तो ये बन जाता है 'लाफ्टर योग'। लाफ्टर योग सेहत के लिए बेहद लाभदायक होता है। तो चलिये जाने लाफ्टर योग और इसके लाभ....!

लाफ्टर योग

हंसी और योग को मिलाकर हास्य योग बनता है, जिसमें प्राणायाम (लंबी-लंबी सांसें लेते) के साथ हंसी के अलग-अलग कसरत करना सिखाया जाता है। हास्य योग के तहत जोर-जोर से ठहाके मारकर, बिना किसी वजह, बेबाक हंसने का अभ्यास किया जाता है। लाफ्टर योगा 1995 में भारत में डॉक्टर मदन कटारिया ने शुरू किया था। अपनी रिसर्च में डॉ. कटारिया ने पाया कि ठहाके लगाने से हंसना शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बेहतरी में मददगार है। डॉ. कटारिया के अनुसार लाफ्टर योग का सिद्धांत एक वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है कि शरीर नकली और असली हंसी में फर्क नहीं कर सकता है। कोई भी एक समान भौतिक व मानसिक लाभ पाता है।

अच्छा मूड

चाहे आपका निजी जीवन हो, व्यवसायिक जीवन या फिर सामाजिक जीवन, आप जो कुछ भी करते हैं वह उसमें अहम भूमिका निभाता है आपका 'मूड'। अगर आपका मूड अच्छा है तो आप बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं। लाफ्टर योग आपकी मस्तिष्क कोशिकाओं में एंडोरफिन नामक रसायन उत्पन्न करके कुछ ही मिनटों में आपके मूड को बेहतर कर देता है। इसे करने से आप दिनभर खुश और अच्छे मूड में रहते हैं और वास्तविक हंसी हंस पाते हैं।

स्वास्थ्य लाभ

लाफ्टर योग इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है जिससे आप न बीमार होने से बच पाते हैं, बल्कि यह आपको उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, डिप्रेशन, अर्थराइटिस, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस, कमरदर्द, फाइब्रोमाइलगिया, माइग्रेन सिरदर्द, मासिक धर्म, अस्थमा संबंधी बिमारियों तथा कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है

बढ़ता चलन

चिकित्सकों के अनुसार, भारत में लाफ्टर थेरेपी का आगाज 1995 के आस-पास शुरू हुई इस थेरेपी के देश में अब तक 7,000 से ज्यादा लाफ्टर क्लब और इसके 1 हजार से ज्यादा सदस्य बन चुके हैं। इसी दिशा में हर साल मई के पहले रविवार को ‘वर्ल्ड लाफ्टर डे’ मनाया जाता है

हंसी के फायदे

मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि जब कोई हंसता है तो मस्तिष्क के न्यूरो केमिकल्स सक्रिय होकर शरीर को बेहतर अहसास कराते हैं। दरअसल मस्तिष्क का पूरा तंत्रिका तंत्र अनेक रसायन मुक्त करता है जो व्यक्ति के मिजाज, व्यवहार और शरीर को प्रभावित करते हैं। ऐसे में हंसी संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। मांसपेशियों को आराम और मानसिक स्वास्थ्य आदि के लिहाज से इसके अनेक सकारात्मक लाभ होते हैं।

लाफ्टर थेरेपी व लाफ्टर योग में फर्क

‘लाफ्टर थेरेपी’ के अंतर्गत लगभग 2 मिनट तक हंसने की क्रिया में लिप्त रहा जाता है, जबकि ‘लाफ्टर योग थेरेपी’ नियमित अंतराल पर सामान्य श्वास व्यायाम व उत्तेजित हंसी का मिला-जुला रूप होता है। ‘दि डेल्ही लाफ्टर क्लब’ के मुताबिक, इस थेरेपी के लाभ के चलते हाल के वर्षो में इसे काफी लोकप्रियता मिली है। यह थेरेपी रक्तचाप व तनाव को कम कर सकती है और प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाती है।

हास्य योग कैसे करें

लोगों को हंसना सिखाने में हास्य योग काफी पॉप्युलर हो रहा है। इसमें शरीर के आंतरिक हास्य को बाहर निकालना सिखाया जाता है, जिससे शरीर सेहतमंद होता है। शुरुआत में नकली हंसी के साथ शुरू होने वाली यह क्रिया धीरे-धीरे हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती है और हम बिना किसी कोशिश के हंसने लगते हैं।

क्या कहती हैं रिसर्च

अमेरिका के फिजियॉलजिस्ट और लाफ्टर रिसर्चर विलियम फ्राइ बताते हैं कि जोरदार हंसी दूसरे इमोशंस के मुकाबले ज्यादा बेहतर फिजिकल एक्सरसाइज साबित होती है। इससे मसल्स एक्टिवेट होते हैं, हार्ट बीट बढ़ती है और ज्यादा ऑक्सिजन मिलने से रेस्पिरेटरी सिस्टम बेहतर बनता है। जरनल ऑफ अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन के अनुसार, लाफ्टर योग थेरपी से लंबी बीमारी के मरीजों को काफी फायदा होता है इसलिए अमेरिका, यूरोप और खुद हमारे देश में भी कई अस्पतालों से लेकर जेलों तक में लाफ्टर थेरपी या हास्य योग कराया जाता है।

कहां जाएं

जो लोग हास्य योग सीखना चाहते हैं, वे जगह-जगह पार्कों में लगने वाले शिविरों में जाकर इसे सीख सकते हैं। इस प्रकार के ज्यादातर शिविर मुफ्त होते हैं। एक बार सही तरीका सीख लेने के बाद रोजाना घर पर अभ्यास किया जा सकता है। इसके एक सत्र में तकरीबन 15 से 40 मिनट का समय लगता है।

Image courtesy: © Thinkstock photos/ Getty Images

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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