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जानिये शरीर में क्‍यों हो जाती है विटामिन डी की कमी

विटामिन डी से ही हड्डियां मजबूत होती हैं और अगर इसकी कमी हो जाये तो हमारा मूल ढांचा प्रभावित हो जाता है, शरीर में विटामिन डी की कमी के पीछे के कारणों के बारे में जानने के लिए यह स्‍लाइडशो पढ़ें।

एक्सरसाइज और फिटनेस By Aditi Singh / Jul 06, 2015

विटामिन डी की कमी के कारण

विटामिन डी हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। यह शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करने का काम करता है, जो तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली और हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। विटामिन डी के लक्षण एकदम उभर कर सामने नहीं आते, इसी वजह से लोगों को समय पर विटामिन डी की कमी से होने वाले रोगों का पता ही नहीं चल पाता। इसलिए विटामिन डी की नियमित जांच और विटामिन डी युक्त भोजन लेना जरूरी है।
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सूर्य की किरणे

विटामिन-डी का मुख्य स्रोत सूर्य की किरणे हैं, जो शरीर में जाने के बाद रिएक्शन कर विटामिन-डी बनाती हैं. जो लोग धूप में नहीं रहते या उनको किसी भी कारण धूप नहीं मिलती तो उनके शरीर में इसकी कमी हो जाती है। इसके अलावा सही खानपान का अभाव भी इसकी कमी का कारण है। खून में विटामिन-डी की मात्रा 20 मोनोग्राम प्रति मिलीलीटर से अधिक होनी चाहिए, इससे कम होना नुकसानदायक है।
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मोटापा

मोटापा शरीर में विटामिन डी को कम करता है। अर्थात लोगों में विटामिन डी की कमी का एक कारण मोटापा भी है। यह सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। फास्ट फूड और जंक फूड के इस्तेमाल के चलते बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। ऐसे में विटामिन डी की कमी का खतरा और बढ़ रहा है।
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त्वचा का रंग गहरा होना

त्वचा का गहरा रंग मिलेनिन नामक पिगमेंट के कारण होता है। मिलेनन बहुत अधिक होने के कारण धूप लगने पर त्वचा में विटामिन-डी का निर्माण ठीक से नहीं हो पाता। कुछ शोधो का मानना है कि बढती उम्र मे गहरे रंग की त्वचा वालों के विटामिन डी की कमी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
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किडनी परिवर्तित न कर पाएं

किडनी विटामिन-डी को उसके सक्रिय रूप में परिवर्तित न कर पाएं तो शरीर में इसकी कमी होने लगती है। उम्र बढ़ने के साथ किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, जिससे यह विटामिन-डी को परिवर्तित नहीं कर पाती। पाचन तंत्र इसे अवशोषित नहीं कर पाए तो भी इसकी कमी हो जाती है। कुछ बीमारियों के कारण पाचन तंत्र की विटामिन-डी अवशोषित करने की क्षमता प्रभावित होती है।
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शाकाहारी होना

प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी केवल पशुओं से मिलने वाले आहार से ही प्राप्त होता है, इसलिए केवल शाकाहारी भोजन लेने वालों में विटामिन-डी की कमी की आशंका रहती है।यह समस्या उन लोगों में अधिक होती है, जो पूर्णतः शाकाहारी आहार ही लेते हैं।
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शारीरिक क्रियाशीलता

आजकल की डेस्क जॉब ने हमारी शारीरिक क्रियाशीलता को कम कर दिया जिससे हमारी पाचनशक्ति प्रभावित हो गई है। इससे आहारों के अलावा  तेज चलने, दौडऩे, सीढ़ी चढ़ने और डांस करने से हड्डियों की मजबूती बनी रहती है और वे कमजोर नहीं होतीं। साथ ही मांसपेशियों की मजबूती भी बनी रहती है।
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विटामिन डी की कमी का प्रभाव

विटामिन डी की कमी से कैल्शियम तथा फास्फोरस आँतों में शोषित नहीं हो पाते हैं,परिणामस्वरूप अस्थियों तथा दाँतों पर कैल्शियम नहीं जम पाता है। जिसके फलस्वरूप वे कमजोर हो जाते हैं।विटामिन हमारे शरीर न सिर्फ मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, बल्कि शरीर में आस्टियोकैल्किन नामक प्रोटीन के निर्माण में भी मदद करता है, जो बोन मांस को बढाता है।
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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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