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कैल्सियम और विटामिन-डी की जरूरत को समझें

कैल्सियम और विटामिन-डी हमारे शरीर खासकर हड्डियों के लिए बहुत जरूरी हैं, इनकी कमी होने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, आहार और डेयरी उत्‍पाद में ये दोनों पर्याप्‍त मात्रा में पाये जाते हैं।

स्वस्थ आहार By Nachiketa SharmaSep 17, 2014

कैल्सियम और विटामिन डी

कैल्सियम और विटामिन डी हमारे शरीर खासकर हड्डियों के लिए बहुत जरूरी होते हैं। अगर शरीर में इनकी कमी हो जाये तो हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए दोनों बहुत जरूरी हैं। इनके स्रोत भी अलग-अलग हो सकते हैं। 50 साल के बाद इन पौष्टिक तत्‍वों का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। इन दोनों की जरूरत को पहचानें।

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कैल्सियम की जरूरत

कैल्सियम स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। यह शरीर के लिए कई ऐसे काम करता है, जिनके बिना शरीर का काम करना ही मुश्किल हो सकता है। इसलिए इसकी अहमियत को समझना बेहद जरूरी है। यह मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाता है।

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कितना कैल्सियम जरूरी

आपको हर रोज कितने कैल्सियम की आवश्‍यकता है, यह आपकी उम्र और लिंग के आधार पर निर्धारित होता है। महिलाओं के लिए 50 साल की उम्र तक नियमित रूप से 1000 मिग्रा कैल्सियम की आवश्‍यकता होती है, 50 साल के बाद इसकी मात्रा बढ़ाकर 1200 कर देना चाहिए। वहीं पुरुषों को 70 साल तक 1000 मिग्रा नियमित और 70 साल के बाद 1200 मिग्रा नियमित रूप से कैल्सियम की जरूरत होती है।

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कैल्सियम के स्रोत

आहार कैल्सियम का सबसे अच्‍छा स्रोत माना जाता है। निम्‍न वसायुक्‍त आहार और दूध के उत्‍पादों में कैल्सियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ताजे और पत्‍तेदार सब्जियों, सोयमिल्‍क, साबुत अनाज, अंडा, आदि कैल्सिमय के स्रोत हैं।

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कैसे कम होता है कैल्सियम

अगर आपके शरीर में कैल्सियम की कमी हो जाये तो हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इसके अलावा कैल्सियम शरीर में हड्डियों में ही एकत्र होता है। इसलिए जरूरी है कि आप नियमित रूप से व्‍यायाम करें। व्‍यायाम के अभाव में मांसपेशियां टाइट हो जाती हैं, जिससे हड्डियों की बनावट पर असर पड़ता है और कैल्सियम एकत्र करने की क्षमता भी कम हो सकती है।

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विटामिन डी

विटामिन डी हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ शरीर के अन्‍य अंगों के लिए भी बहुत जरूरी पोषक तत्‍व है। यह वसा में घुलनशील प्रो-हार्मोन्स का एक समूह होता है जो आंतों से कैल्शियम को सोखकर हड्डियों में पहुंचाता है। शरीर में इसका निर्माण हाइड्रॉक्सी कोलेस्ट्रॉल और अल्ट्रावॉयलेट किरणों की मदद से होता है। इसके अलावा शरीर में रसायन कोलिकल कैसिरॉल पाया जाता है, जो खाने के साथ मिलकर विटामिन-डी बनाता है।

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इसके कई प्रकार हैं

विटामिन डी के कई प्रकार होते हैं - विटामिन-डी1, विटामिन-डी2, विटामिन-डी3, विटामिन-डी4 और विटामिन-डी5। हमारे शरीर के लिए विटामिन-डी2 और डी-3 सबसे अधिक जरूरी होते हैं।

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विटामिन डी की कमी से

एक अनुमान के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग एक बिलियन लोग विटामिन-डी की कमी से ग्रस्त हैं। कई शोधों में यह बात सामने आ चुकी है कि विटामिन-डी कई बीमारियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जैसे - ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, कैंसर, मल्टीपल स्केलरोसिस और संक्रमण आदि से जुड़ी बीमारियां जैसे ट्यूबरोकुलोसिस या फिर मौसमी बुखार।

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विटामिन डी के स्रोत

सबसे अधिक विटामिन डी सूर्य की किरणों से मिलता है। अगर सुबह के वक्‍त रोज 15 मिनट तक सूर्य की रोशनी के संपर्क में रहें तो आपके शरीर के हिसाब से जरूरी विटामिन डी आपको मिल सकता है। इसके अलावा यह कुछ खाद्य पदार्थों में जैसे - मांस, अंडे, मछली का तेल, दुग्‍ध उत्पादों में भी पाया जाता है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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