ब्‍लड शुगर : मिथ बनाम तथ्य

कुछ लोगों को यह भ्रम होता है कि शुगर डायबिटीज यानी ब्‍लड शुगर का प्रमुख कारण है, जबकि यह सच्चाई नहीं है। तो आपको ब्‍लड शुगर से संबंधित कुछ मिथ और उनके तथ्‍यों के बारे में बताते हैं।

डायबिटीज़ By / Oct 09, 2014
ब्‍लड शुगर से जुड़े तथ्‍य और भ्रम

ब्‍लड शुगर से जुड़े तथ्‍य और भ्रम

ब्‍लड शुगर को लेकर लोगों में कई तरह के भ्रम हैं। हालांकि इसके कुछ कारण निश्चित हैं लेकिन इनको ब्‍लड शुगर होने का मुख्य कारण नहीं कहा जा सकता है। कुछ लोगों को यह भ्रम होता है कि शुगर डायबिटीज यानी ब्‍लड शुगर का प्रमुख कारण है, जबकि यह सच्चाई नहीं है। आइए हम आपको डायबिटीज से संबंधित कुछ मिथ और उनके तथ्‍यों के जानते हैं। image courtesy : getty images

मिथ – ब्‍लड शुगर का असली कारण शुगर है।

मिथ – ब्‍लड शुगर का असली कारण शुगर है।

तथ्‍य - ब्‍लड शुगर का प्रमुख कारण शुगर को माना जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। टाइप-1 डायबिटीज इंसुलिन बनाने वाली 90 प्रतिशत से अधिक कोशिकाओं के समाप्त होने से होती है जो पैंक्रियाज में मौजूद होती है। इसका संबंध सीधे शुगर से नहीं होता है। जबकि टाइप 2 डायबिटीज में पैंक्रियाज इंसुलिन बनाता है जो कभी-कभार सामान्य स्तर से भी अधिक मात्रा में होता है लेकिन, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के कारण इसका शरीर पर बुरा असर नहीं पडता है। image courtesy : getty images

भ्रम – किसी मित्र या पड़ोसी के डायबिटीक होने पर आपको भी यह बीमारी हो सकती है।

भ्रम – किसी मित्र या पड़ोसी के डायबिटीक होने पर आपको भी यह बीमारी हो सकती है।

तथ्य – ब्‍लड शुगर कोल्ड या फ्लू की तरह संक्रामक बीमारी नहीं है। कई शोधों से ब्‍लड शुगर होने के कुछ अनुवांशिक कारणों का तो पता चला है और साथ ही ऐसा यह भी पाया गया है कि जीवनशैली में बदलाव भी इसका प्रमुख कारण है।

मिथ – ब्‍लड शुगर से पीड़‍ित मीठा नहीं खा सकते हैं।

मिथ – ब्‍लड शुगर से पीड़‍ित मीठा नहीं खा सकते हैं।

तथ्य – ब्‍लड शुगर रोगियों में सबसे बडा डर मिठाई को लेकर होता है। मधुमेह के रोगी कुछ हद तक अपने संतुलित भोजन के हिस्से के तौर पर मीठा खा सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपनी खुराक में कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा को नियंत्रित करना होगा। मिष्ठान से सिर्फ कैलोरी मिलती है कोई पोषण नहीं। इसलिए मीठे को सीमित मात्रा में लीजिए, लेकिन उसे बिल्कुल दरकिनार मत कीजिए। image courtesy : getty images

मिथ – ब्‍लड शुगर रोगियों को आराम करना चाहिए।

मिथ – ब्‍लड शुगर रोगियों को आराम करना चाहिए।

तथ्य – पुराने समय में यह मान्यता थी कि ब्‍लड शुगर के मरीजों को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए। जबकि, नए शोध के अनुसार, ब्‍लड शुगर के मरीज को सक्रिय रहना चाहिए और दिन में कम से कम 30 से 40 मिनट तक एक्‍सरसाइज  करना चाहिए। एक्‍सरसाइज करने से वजन नियंत्रित रहता है और ग्लूकोज पर नियंत्रण रहता है। image courtesy : getty images

मिथ – ब्‍लड शुगर का उपचार दवाइयों से हो सकता है।

मिथ – ब्‍लड शुगर का उपचार दवाइयों से हो सकता है।

तथ्य – ब्‍लड शुगर जीवन पर्यंत रोग है क्योंकि अभी तक इसका स्थायी उपचार उपलब्ध नहीं हो पाया है। हालांकि, दवाईयों और इंसुलिन के इंजेक्शन से इसके प्रभाव को कम जरूर किया जा सकता है। उचित तरीके से रहन-सहन और खान-पान से ब्‍लड शुगर के प्रभाव को कम किया जा सकता है। image courtesy : getty images

मिथ – मोटापे के कारण होता है ब्‍लड शुगर।

मिथ – मोटापे के कारण होता है ब्‍लड शुगर।

तथ्य - यह भी आम धारण है कि मोटापा के कारण ब्‍लड शुगर होता है। जबकि, हर मोटे लोग ब्‍लड शुगर से ग्रस्त नही होते हैं। लेकिन मोटे लोगों को ब्‍लड शुगर की चपेट में आने की संभावना ज्यादा होती है। वजन को सामान्य रखने से कुछ हद तक ब्‍लड शुगर से बचाव किया जा सकता है। image courtesy : getty images

मिथ – ब्‍लड शुगर एक निश्चित आयु में होता है।

मिथ – ब्‍लड शुगर एक निश्चित आयु में होता है।

तथ्य – कुछ लोगों को यह मनाना हैं कि ब्‍लड शुगर की समस्या 40 की उम्र पार करने के बाद ही होता है। बच्चों और युवाओं को नहीं होता। जबकि, बचपन में होने वाला रोग वयस्कों से अलग होता है। बच्चों को जब ब्‍लड शुगर होता है तो उनका शारीरिक विकास नहीं हो पाता है जिसके कारण बच्चे दुबले होते हैं। image courtesy : getty images

मिथ – यूरीन में ग्लूकोज न आने पर रोग समाप्त हो जाता है।

मिथ – यूरीन में ग्लूकोज न आने पर रोग समाप्त हो जाता है।

तथ्य – ब्‍लड शुगर के कुछ मरीजों को लगता है कि पेशाब में ग्लूकोज न आने का मतलब है कि ब्‍लड शुगर समाप्त हो गया। जबकि, ब्‍लड शुगर पर नियंत्रण होने का मतलब है कि खून में ग्लूकोज की कमी होना ना कि पेशाब में। अत: नियमित रूप से ग्लूकोज के स्तर की जांच कराते रहना चाहिए। image courtesy : getty images

भ्रम – प्रतिदिन के तनाव का ब्‍लड शुगर से कोई संबंध नहीं होता।

भ्रम – प्रतिदिन के तनाव का ब्‍लड शुगर से कोई संबंध नहीं होता।

तथ्य – तनाव की स्थिति में रक्त में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। ब्‍लड शुगर के मरीजों को आराम करने और तनाव की स्थिति को नियंत्रित करने की सलाह दी जाती है। image courtesy : getty images

मिथ – ब्‍लड शुगर से पीड़‍ित महिला को गर्भवती नहीं होना चाहिए।

मिथ – ब्‍लड शुगर से पीड़‍ित महिला को गर्भवती नहीं होना चाहिए।

तथ्य – इसके लिए डायबिटीज के अनुसंधान क्षेत्र में हुई प्रगति को धन्यवाद देना चाहिए। ब्‍लड शुगर के साथ गर्भवती महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण पहले पीढ़ी के मुकाबले आज काफी बेहतर है। हालांकि, मधुमेह गर्भावस्था मधुमेह प्रबंधन के सभी क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रयास और प्रतिबद्धता, उत्कृष्ट रक्त शर्करा नियंत्रण, और शिक्षा की आवश्यकता है। image courtesy : getty images

मिथ – ब्‍लड शुगर से पीड़ि‍त सभी लोगों को इंसुलिन लेने की जरूरत होती है।

मिथ – ब्‍लड शुगर से पीड़ि‍त सभी लोगों को इंसुलिन लेने की जरूरत होती है।

तथ्य – टाइप 1 डायबिटीज से ग्रस्‍त सभी लोगों को इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है क्‍योंकि उनकी पैनक्रिया इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। कुछ, लेकिन सभी नहीं, टाइप 2 मधुमेह के साथ लोगों को अपने रक्त शर्करा के स्तर का प्रबंधन करने के लिए गोलियों के साथ इंसुलिन लेने की आवश्‍यकता होती है। image courtesy : getty images

मिथ – एक बार ब्‍लड शुगर होने पर यह हमेशा रहता है।

मिथ – एक बार ब्‍लड शुगर होने पर यह हमेशा रहता है।

तथ्‍य  – ब्‍लड शुगर के लक्षणों को उल्टा करना संभव होता है। मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए वजन घटाने और आहार समायोजन से ब्‍लड शुगर के लक्षणों को बदल पाना संभव होता है। image courtesy : getty images

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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