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बॉस और कर्मचारी इन तरीकों से आपसी रिश्ते को बनायें मजबूत

एसोचेम हेल्थ कमेटी के मुताबिक काम के प्रेशर के चलते बॉस और इम्प्लॉइज के बीच के रिश्तों में अधिकांश समय तनाव की स्थिति रहती है, जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर और काम पर दिखता है। हालांकि इस स्थिति को सुधारा जा सकता है।

आफिस स्‍वास्‍थ्‍य By Rahul Sharma / Dec 24, 2015

बॉस और कर्मचारी का रिश्ता



कुछ समय पहले कई बड़े शहरों में सरकारी और प्राइवेट इम्प्लॉइज पर किये एक सर्वे से पता चला कि प्राइवेट इम्प्लॉइज के ऊपर काम और बॉस का दबाव थोड़ा अधिक रहता है। साथ ही सर्वे के अनुसार तकरीबन 85 प्रतिशत इम्प्लॉइज किसी न किसी लाइफस्टाइल डिसीज से जूझ रहे हैं। एसोचेम हेल्थ कमेटी के मुताबिक काम के प्रेशर के चलते बॉस और इम्प्लॉइज के बीच के रिश्तों में अधिकांश समय तनाव की स्थिति रहती है, जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर और काम पर दिखता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि बॉस और इम्प्लॉइज के बीच के रिश्तों में तनाव के कारणों को जाना जाए और उनके कारगर समाधान निकाले जाएं। चलिये आज कुथ ऐसे तरीकों के बारे में जानते हैं जिनकी मदद से बॉस और कर्मचारी आपसी रिश्ते को मजबूत बना सकते हैं।
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सैलरी होती है आमतौर पर सबसे बड़ी वजह


इम्प्लॉइज महीने भर जी-तोड़ मेहनत करने के बाद अगर ये पाए कि किसी गलती के कारण बॉस ने उसकी सेलरी काट दिया है। ऐसे में वह बॉस के प्रति अपने मन में कड़वाहट औररोश पाल लेता है। ऐसा ही बर्ताव उस समय देखने को मिलता है जब एनुअल इन्क्रीमेंट में उसे मेहनत के हिसाब से ईज़ाफा नहीं मिलता है। इसलिये बॉस को सुनिश्चित करे कि एनुअल इन्क्रीमेंट प्रतिभा और काम के आधार पर होना चाहिये।
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बॉस की अवास्तविक मांगें



सर्वे के हिसाब से देखा जाए तो तकरीबन 56 प्रतिशत लोग बॉस द्वारा ऑफिस के काम के लिये ज्यादा वक्त मांगे जाने से और करीब 35 प्रतिशत बॉस की बढ़ती डिमांडों से परेशान हैं। इससे पता चलता है कि हर इम्प्लॉइ से एक जैसी डिमांड रखना उन्हें डिप्रेशन में डाल रहा है। तो इस संबंध में उचित नियम बनने चाहिये और उनका पालन भी सही से होना चाहिये।
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किसी खास इम्प्लॉइ की बॉस से मित्रता


आमतौर पर लगभग हर ऑफिस में देखने को मिलता है कि बॉस की किसी खास (जायादातर विपरीत लिंग में) अधीनस्थ कर्मचारी से नजदीकियां बढ़ जाती हैं। इसका फायदा उठाते हुए वह इम्प्लॉइज अपने सहयोगियों पर इनडॉयरेक्टली दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। तो इस संबंध में भी उचित कदम उठाए जाने चाहिये और नियम बनाने चाहिये।
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बॉस और कर्मचारी अपनाएं दोस्ताना रवैया



देखा जाए तो बॉस अगर अपने इम्प्लॉइज से हुत ज्यादा दोस्ताना रवैया रखे तो काम करवाना मुश्किल हो जाएगा, लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि थोड़ी सी नरमी और व्यावहारिकता न बरती जाए। इससे माहौल को खुशनुमा बनाया जा सकता है। इससे कर्मियों के मन में बॉस के प्रति पॉजिटिविटी आएगी।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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