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सांसों की बदबू का कारण हो सकती हैं ये 7 बीमारियां!

बहुत कम लोग इस बात को जानते कि सांसों से आने वाली बदबू का संबंध सिर्फ मुंह या दांतों से ही नहीं है बल्कि कई बीमारियों से भी हैं। आइए जानें, बदबूदार सांसें किन बीमारियों का संकेत है।

तन मन By Pooja Sinha / Jan 03, 2015

सांसों की बदबू के कारण

सांसों की बदबू एक ऐसी समस्या है जिसके चलते अक्सर लोग शर्मिदगी महसूस करते हैं। बावजूद इसके अधिकांश लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। और न ही सही समय पर इसका इलाज करवाते हैं। लेकिन बहुत कम लोग इस बात को जानते कि सांसों से आने वाली बदबू का संबंध सिर्फ मुंह या दांतों से ही नहीं है बल्कि कई बीमारियों से भी हैं। आइए जानें, बदबूदार सांसें किन बीमारियों का संकेत है।
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पेट में खराबी

वैसे तो सांसों से आती बदबू आमतौर पर मुंह से जुड़ी होती है, लेकिन कई बार शरीर के किसी भी हिस्‍से में आने वाले बदलाव के कारण भी यह समस्‍या हो सकती है। कभी-कभी पेट की खराबी भी सांसों की बदबू का कारण बनती है। पेट की समस्‍या एसिड रिफ्लक्स होने पर शरीर की पाचन क्रिया ठीक नहीं रहती। इसमें सीने और छाती में जलन होती है। कई बार इस समस्‍या से ग्रस्‍त व्‍यक्ति को घबराहट भी होने लगती है और खट्टी डकार आती हैं। जिससे सांसों से बदबू आने लगती है।
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मुंह में इन्फेक्शन

नियमित रूप से ब्रश न करने और दांतों की सफाई न रखने से भी सांसों की बदबू परेशान करती है। मुंह में रह गए भोजन के कण और बैक्टीरिया के कारण कई बार इंफेक्‍शन हो जाता है। इन बैक्टीरिया द्वारा उत्सर्जित सल्फर, यौगिक के कारण आपकी सांसों में दुर्गंध पैदा करता है। इसलिए मुंह के इंफेक्‍शन से बचने के लिए गर्म पानी से मुंह साफ करें। जीभ का पिछला हिस्सा विशेष तौर पर साफ करें क्‍योंकि वहीं पर सबसे ज्‍यादा बैक्टीरिया छिपे घुसे रहते हैं।
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साइनस

साइनस की बीमारी से पीड़ित व्‍यक्ति की सांसों से दुर्गंध आने लगती है। साइनस के कारण व्यक्ति की नाक अवरुद्ध हो जाती है और वह मुंह से सांस लेने लगता है। इससे मुंह सूखने लगता है और जीवाणुओं को पनपने का मौका मिल जाता है। इसके साथ ही आपके साइनस से नाक होकर बहनेवाला द्रव आपके गले में जाकर सांसों में दुर्गंध पैदा करता है।
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मसूड़ों की बीमारी

सांसों से बदबू और मुंह का स्वाद खराब रहना मसूड़े के रोग पेरिडोंटल के लक्षण हो भी हो सकते हैं। यह बीमारी बैक्टीरिया से निकलने वाले प्लेक (विशेष प्रकार के चिपचिपे तत्व) से होती है। हाइड्रोजन सल्फाइड भाप बनाते हैं। आपके दांतों पर बैक्टीरिया (सड़न) का एक रंगहीन और चिपचिपा फिल्म जमा हो जाता है। जिसमें मसूड़े इतने कमजोर हो जाते हैं कि ये दांतों को सपोर्ट नहीं दे पाते और दांत गिरने लगते हैं। सांसों की बदबू को दूर करने के लिए दांतों के अन्दर मसूड़ों पर टार की परत न जमने दें।
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मुंह सूखना (ड्राइ माउथ सिंड्रोम)

लार की सहायता से मुंह में नमी और मुंह को साफ रखने में मदद मिलती है। लेकिन कई बार मुंह में लार बननी कम हो जाती है जिसके कारण जीरोस्टोमिया यानी ड्राइ माउथ नामक रोग हो सकता है। इस रोग के होने से मृत कोशिकाओं का जीभ, मसूड़े और गालों के नीचे जमाव होता रहता है। ये कोशिकाएं क्षरित होकर दुर्गंध पैदा करने लगती हैं। सूखे मुंह की समस्‍या आमतौर पर सोते समय होती है।
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फेफड़ों में संक्रमण के कारण

फेफड़े का गंभीर संक्रमण और फेफड़े में गांठ से सांसों से बदबू आने लगती है। अन्य बीमारियां, जैसे कुछ कैंसर और चयापचय की गड़बड़ी से भी सांसों में दुर्गंध पैदा हो सकती है। इसके अलावा बहुत अधिक तंबाकू खाने वाले लोगों में जब पेरिडोंटल बीमारी ओरल कैंसर में तब्दील होने लगती है तो भी सांसों से तेज बदबू आती है।
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श्वसन तंत्र में संक्रमण

गर्दन के लिम्‍फ नोड्स ("सूजन ग्रंथियों") में सूजन, बुखार, भरी हुए नाक, नाक से हरे या पीले रंग के डिस्‍चार्ज और बलगम उत्‍पादक खांसी भी सांसों से आने वाली बदबू का कारण बनती है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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