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मानसून का आनंद आयुर्वेद के संग

घरेलू नुस्‍ख By Pooja Sinha / Aug 01, 2014

मानूसन का मजा

गर्मी के बाद मानसून किसी त्‍यौहार से कम नही होता। इस मौसम में लोग अनेक तरीको से बारिश का आनंद लेते हें। लेकिन अकसर इस बात से अनजान रहते हैं कि यह मौसम कई तरह की बीमारियों, संक्रमणों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी होता है। image courtesy : getty images

आयुर्वेद और मानसून

मौसम में आये अचानक परिवर्तन से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। जिससे कई तरह की बीमारियां हमें घेर लेती है। आयुर्वेद के अनुसार मानसून में पित्त बहुत अधिक बढ़ जाता है। और अग्नि तत्व जो हमारे शरीर को कार्यात्मक ऊर्जा प्रदान करता है तथा चयापचय और भोजन को पाचने के लिए ज़िम्मेदार होता है। इस दौरान कमज़ोर हो जाता है। image courtesy : getty images

आयुर्वेदिक तरीके और मानसून का आनंद

इस मौसम में पित्त के कारण पेट संबंधी, अपच, एसिडिटी, त्वचा संबंधित बीमारियां जैसे फोड़े- फुंसियां, एक्जिमा और  बालों का झड़ना और संक्रमण जैसी सामान्य बीमारियां आम होती हैं। साथ ही वातावरण में आद्रता के स्‍तर के बढ़ जाने से  शरीर से महत्वपूर्ण तरल पदार्थों की कमी हो जाती है। इसलिये अगर आप वास्तव में मानसून का आनंद लेना चाहते हैं, तो निम्न सुझावों का पालन करें और स्वस्थ रहें। image courtesy : getty images

ज्‍यादा तेल के प्रयोग से बचें

इस मौसम में पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है इसलिए भारी तेल जैसे सरसो, मक्‍खन, मूंगफली और अन्‍य तेलों के स्‍थान पर
खाना बनाने के लिए हलके तेल जैसे घी, ऑलिव ऑयल, कॉर्न ऑयल और सनफ्लावर ऑयल का उपयोग करें। image courtesy : getty images

उबली सब्‍जियां खाएं

मानसून में हलके और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ, पकी हुई या स्टीम सब्जियां, कद्दू, फल, मूंग दाल, खिचड़ी, कॉर्न, काबुली चने का आटा और ओटमील आदि खाएं। इसके अलावा कच्‍चे सलाद की जगह स्‍टीम सलाद लें। image courtesy : getty images

मसालों से दूरी

मानसून में बहुत अधिक भारी, गर्म, खट्टे जैसे चटनी, अचार, मिर्ची, दही, करी आदि खाद्य पदार्थों को खाने से वाटर रिटेंशन, अपचन, एसीडिटी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए तले हुए पदार्थ, जंक फ़ूड, मिर्च मसालों से भरपूर मांस न खाएं। साथ ही सलाद और हरी सब्जियां भी न खाएं। image courtesy : getty images

कसैली चीजों का सेवन करें

कसैला स्वाद पित्त को निष्प्रभावित करने में मदद करता है। इसलिए कड़वी सब्जियां जैसे करेला और कड़वी जड़ी-बूटियां जैसे नीम, सूखी मेथी और हल्दी अधिक खाएं। इसके अलावा ये सब चीजें आपको संक्रमण से बचाती हैं। image courtesy : getty images

बाहर खाने से बचें

मानसून में सड़क के किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थों को न खाये। साथ ही बाहर खाना खाते समय सावधान रहें और सुनिश्चित करें कि आप जिस स्थान पर खाना खाने जा रहे हैं वह साफ सुथरा हो। image courtesy : getty images

हल्‍की एक्‍सरसाइज करें

बहुत अधिक भारी एक्‍सरसाइज जैसे दौड़ना, साइकिलिंग आदि को करने से पित्त बढ़ती है। इसलिए इसे करने से बचे और इनके स्‍थान पर योग, वॉकिंग, स्विमिंग और स्ट्रेचिंग आदि हल्‍की एक्‍सरसाइज करें। image courtesy : getty images

तिल के तेल की मालिश

मानसून में हफ्ते में एक से दो बार तिल के तेल की मालिश करने से रक्तसंचार ठीक रहता है, जिससे आपको स्‍वस्‍थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन इस बात का ध्‍यान रखें कि कुछ लोगो को तिल का तेल गर्म कर सकता है अत: ऐसे लोगो को  नारियल के तेल का उपयोग करना चाहिए। image courtesy : getty images

उत्तेजित होने से बचें

क्रोध, जलन, ईर्ष्या और अहंकार जैसे गर्म भावनाओं से बचें। क्‍योंकि इन भावनाओं से पित्त में वृद्धि होती है और यह एक्जिमा, ईर्ष्या या मूत्र पथ के संक्रमण का कारण हो सकता है। image courtesy : getty images

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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