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वर्ल्ड एड्स डे : युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है रोग, जानकारी ही है बचाव

एड्स पीडि़तों की संख्‍या में इजाफा हो रहा है, इसके बारे में जानकारी ही इससे बचाव है।

सभी By Nachiketa Sharma / Dec 01, 2017

एड्स क्‍या है

एड्स का पूरा नाम 'एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम' है। यह बीमारी एच.आई.वी. वायरस से होती है। एड्स होने पर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। और शरीर आसानी से कई बीमारियों की चपेट में आ जाता है।

एड्स के कारण

एड्स एच.आई.वी. पॉजी़टिव गर्भवती महिला से उसके बच्चे को, असुरक्षित यौन संबंधों से और संक्रमित रक्त या संक्रमित सुई के प्रयोग से होता है। इससे बचने के लिए जरूर सावधानियां अपनानी चाहिए।

एड्स के लक्षण

कई-कई हफ्तों तक लगातार बुखार रहना, हफ्तों खांसी आना, वजन घटना, मुंह में घाव होना, भूख न लगना, बार-बार दस्त लगना, गले में सूजन, त्वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले चकत्ते होना, सोते वक्‍त पसीना आना।

एड्स का निदान

एचआईवी संक्रमित व्‍यक्ति को जब तक एड्स के लक्षण नहीं दिखते तब तक इसका पता चलना मुश्किल है। एचआईवी पॉजिटिव होने पर 6 से 10 साल के अंदर कभी भी एड्स हो सकता है। स्‍क्रीनिंग टेस्‍ट के द्वारा एड्स का निदान हो जाता है।

एड्स से कैसे बचें

एड्स एक लाइलाज बीमारी है। आंकड़ों के अनुसार युवाओं में एचआईवी का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। महिलाओं में संक्रमण का दर तेजी से बढ़ रहा है। असुरक्षित यौन संबंधों से बचें, पुरानी सूई का प्रयोग न करें, संक्रमित खून का प्रयोग न करें। एड्स के बारे में जानकारी ही इससे बचने का सबसे अच्‍छा तरीका है।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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