आठ तरीकों से आप करते हैं अपनी भावनात्‍मक ऊर्जा को व्‍यर्थ

तनाव, भारी भोजन और हॉर्मोन असंतुलन, इनमें से किसी भी कारण से आप थके हुये नजर आ सकते हैं। लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे कारण हैं, जिनका असर गहरा होता है। गहरा यानी वे आपको भावनात्‍मक रूप से थका देते हैं।

तन मन By Bharat Malhotra / Sep 02, 2014
भावनात्‍मक थकान करती है परेशान

भावनात्‍मक थकान करती है परेशान

थकान तो कई चीजों से हो सकती है। तनाव, भारी भोजन और हॉर्मोन असंतुलन, इनमें से किसी भी कारण से आप थके-थके व मुरझाये नजर आ सकते हैं। लेकिन इसके अलावा कई ऐसे कारण हैं, जिनका असर गहरा होता है। गहरा यानी वे आपको भावनात्‍मक रूप से थका देते हैं।

अगर आप थके और शक्तिहीन महसूस करते हैं, तो आपको कुछ बातों पर ध्‍यान देना चाहिये। हो सकता है कि इन कारणों से आप भावनात्‍मक रूप से थके और परेशान महसूस कर रहे हों। image courtesy : getty images

आप टकराव से बचते हैं

आप टकराव से बचते हैं

आप सद्भाव बनाये रखना चाहते हैं। यह बहुत अच्‍छी बात है। लेकिन, आखिर किस कीमत पर। क्‍या आप इसके लिए अपनी भावनाओं का दमन करते हैं। लेकिन, हर बार ऐसा करना सही नहीं। इससे आप पर भावनात्‍मक रूप से दबाव पड़ता है। आप बाहर के दबाव को अपने भीतर ले आते हैं। उन बातों पर आप बाद में कुढ़ते रहते हैं। इससे आपके मन पर बहुत विपरीत असर पड़ता है। image courtesy : getty images

अपने मन की सुन

अपने मन की सुन

अपने दिल की सुना कीजिये। यह आपको सही रास्‍ता बताता है। यह सुझाता है कि किस दिशा में बढ़ना आपके जीवन को मंजिल तक पहुंचायेगा। लेकिन, अकसर हम इस आवाज को अनसुना कर देते हैं। हमारी कथित तर्कबुद्धि दिन की हल्‍की सी आवाज को कहीं दबा देती है। हम देख और सुन ही नहीं पाते उस इशारे को। और कायदे से हमें वह आवाज जरूर सुननी चाहिये। इस आवाज को अनसुना करना हमें मुश्किल में फंसा देता है। बेशक भौतिक सुविधायें हमारे लिए जरूरी हैं, लेकिन अपने इनसे सच्‍चा सुख नहीं मिलता। अपने दिल की सुनिये वही आपको सच्‍चा सुख दिलायेगा। image courtesy : getty images

सोचते ज्‍यादा हैं करते कम हैं

सोचते ज्‍यादा हैं करते कम हैं

आपको जिस बात से दुख पहुंचा है आप बार-बार उसके बारे में सोचते हैं। आप उस बहस की पूरी नकारात्‍मकता को मथ देते हैं। ऐसा आप तब तक करते हैं जब तक आप निराशा के उस तालाब में पूरी तरह डूब न जाएं। इससे आप पूरी तरह निचोड़ लिये जाते हैं। इसके साथ ही आप कमजोर महसूस करते हैं। आप काफी ऊर्जा खर्च करने के बाद भी भावनात्‍मक और शारीरिक रूप से वहीं जमे खड़े हैं। इस चक्र को तोड़ने के लिए सोचिये कम काम ज्‍यादा कीजिये। अकसर गलत फैसले लेने के डर से हम कुछ नहीं करते। इसके बजाय आपको चाहिये कि केवल सोचने पर अपनी ऊर्जा खर्च करने के स्‍थान पर आप काम पर ध्‍यान दें। इससे ही आप समस्‍या का हल निकाल पाएंगे। image courtesy : getty images

अकेलेपन के डर से करते हैं दोस्‍ती

अकेलेपन के डर से करते हैं दोस्‍ती

आपको लोगों का साथ क्‍यों चाहिये। क्‍या सिर्फ इसलिए कि आपको अकेले रहने से डर लगता है। अकेलेपन का जिक्र ह आपको तनावपूर्ण बना देता है। और इसलिए आप थके और शक्तिहीन महसूस करते हैं। लेकिन, रिश्‍ते निभाने का यह तरीका नहीं है। इस तरह का रिश्‍ता आपको जीवन में कहीं नहीं पहुंचाता। इससे हमें नुकसान ही होता है। अकेलापन इतनी भी बुरी चीज नहीं है। यह अकेलापन आपको उस शून्‍यभाव में पहुंचा देता है, जहां आप अपने लिए और जरूरी चीजों के बारे में सोच सकते हैं। और शून्‍य को उन चीजों और लोगों से भरिये जो वाकई आपके लिए मायने रखते हैं। image courtesy : getty images

पुराना जख्‍म अभी ताजा है

पुराना जख्‍म अभी ताजा है

अकसर हम अपने दर्द और विश्‍वास को उन चीजों से तौलते हैं, जिनसे हमारा कोई लेना-देना नहीं होता। अकसर हमें लगता है कि हम बेकार ही इन बातों पर परेशान होते रहे। और कई बार तो हम काफी अर्सा पहले हुई किसी घटना पर दुखी होते हैं। इस तरह की बातें हमें किसी हल तक नहीं पहुंचातीं। आपको इस बारे में खुद से बात करनी चाहिये। कई बार गहरे बैठे दर्द को काफी संभलकर ठीक करना पड़ता है। और दर्द को दूर करना आपके लिए जरूरी होता है। आखिर खुशी को भी जगह चाहिये। image courtesy : getty images

आप नावाकिफ हैं अपनी खुशियों से

आप नावाकिफ हैं अपनी खुशियों से

आपको जीवन का लक्ष्‍य नहीं मालूम। आपको यह नहीं मालूम कि आखिर किस चीज से आपको खुशी मिलती है। यह तो बड़ी परेशान करने वाली परिस्थिति है। अगर आप खुद यह तय नहीं कर सकते कि आपको जीवन में क्‍या चाहिये, तो आप हमेशा दूसरों के बताये रास्‍ते पर चलते रहेंगे। और‍ फिर एक दिन आप खुद को ऐसे स्‍थान पर पाएंगे जहां आप शायद जाना ही नहीं चाहते थे। एक बार अपनी खुशी जानने के बाद उसके लिए रास्‍ता तैयार करना आसान होता है। और आप अपनी ऊर्जा सही जगह पर लगा पाते हैं। image courtesy : getty images

सीमायें तय करनी जरूरी

सीमायें तय करनी जरूरी

सीमायें जरूरी हैं। हद असल में वे दीवार हैं जो हमारी ऊर्जा को संजोये रखती हैं। अगर आप खुद अपने लिए सीमायें तय नहीं करेंगे, तो अन्‍य लोग आपके लिए ऐसा करने लग जाएंगे। और जब बारंबार ऐसा होगा तो आप आक्रामक और भावुक महसूस करने लगेंगे। लोगों को साफ-साफ बताइये कि आपको क्‍या पसंद नहीं है। image courtesy : getty images

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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