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गाउट से जुड़े 7 जोखिम कारकों के बारे में जानें

रक्त में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से गाउट नाम की समस्या हो सकती है। इसमें रोगियों में पैर के अंगूठे के जोड़ में तकलीफ होती है।

विविध By Shabnam Khan / Apr 02, 2015
यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से गाउट

यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से गाउट

गाउट एक ऐसा रोग है जिसमें बार-बार जोड़ में दर्द, सूजन, लालिमा के दौरे पड़ते हैं। अधिकांश रोगियों में पैर के अंगूठे के जोड़ (मेटाटारसल-फेलेंजियल जोड़) में तकलीफ होती है। तब इसे पोडोग्रा भी कहते हैं। लेकिन गाउट का असर एड़ी, घुटना, कलाई और उंगली के जोड़ में भी हो सकता है। जोड़ों में रात को अचानक बहुत तेज दर्द होता है और सूजन आ जाती है। जोड़ लाल और गर्म महसूस होता है। साथ में बुखार और थकावट भी हो सकती है। यह रोग रक्त में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से होता है। गाउट का जोखिम जिन कारकों से बढ़ता है, यहां हम उनके बारे में बताएंगे।

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डाईट

डाईट

यदि आपके आहार में मीट व सीफूड और फ्रुक्टोज़ वाले पेय पदार्थों की मात्रा अधिक है तो आपके शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है जो आपका गाउट का जोखिम काफी बढ़ा देता है। अल्कोहल का सेवन, खासतौर पर बीयर, भी गाउट का जोखिम बढ़ा देती है। इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपको गाउट जैसी समस्या से न जूझना पड़े तो अपनी डाईट पर खास ध्यान दें।

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मोटापा

मोटापा

अगर आपका वजन अधिक है, तो आपका शरीर अधिक यूरिक एसिज उत्सर्जित करें। इस वजह से आपकी किडनी को यूरिक एसिड को कम करने में बहुत मुश्किल होगी। ऐसे में आपका गाउट का जोखिम काफी बढ़ सकता है। इसलिए अपने वजन पर नियंत्रण रखें।

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शारीरिक स्थिति

शारीरिक स्थिति

कुछ निश्चित बीमारियां और स्थिति आपके गाउड के जोखिम को अपने आप बढ़ा देती हैं। कुछ ऐसी ही बीमारियां हैं - उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, दिल और किडनी की बीमारियां। अगर आपको इनमें से कोई भी बीमारी है तो अपनी सेहत का खास खयाल रखें। लक्षणों पर ध्यान दें। आपको गाउट से अपनी सुरक्षा करनी बहुत जरूरी हो जाती है।

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दवाएं

दवाएं

हाई ब्लड प्रेशर के लिए ली गई "वॉटर पिल्स" या डाइयूरेटिक दवाएं आपके शरीर में यूरिक एसि़ के स्तर को बढ़ा सकती है। वहीं रूमेटाइड अर्थराइटिस में ली जाने वाली दवाएं भी गाउट के रिस्क को बढ़ा देती हैं। इसलिए जब भी दवाएं लें डॉक्टर की देखरेख में लें। यदि, इन दवाओं को लेने के बाद आपको गाउट के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। लापरवाही न बरतें।

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लिंग और उम्र

लिंग और उम्र

60 साल के पुरूषों को गाउट की समस्या होने का जोखिम अधिक होता है। पुरूषों को महिलाओं से अधिक गाउट का जोखिम होता है। एक्सपर्ट का मानना है कि महिलाओं को नेचुरल एस्ट्रोजन गाउट से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसलिए पुरूषों को गाउट के लक्षणों का ध्यान रखना चाहिए। महिलाओं को मीनोपॉज के बाद गाउट का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

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आनुवांशिक

आनुवांशिक

अगर परिवार में किसी को गाउट की समस्या रही हो, तो आपको इसके प्रति ज्यादा सावधान पहने की जरूरत है। मसलन, आपके पिता, मां, दादा वगैरह को ये बीमारी कभी रही हो तो आपको इसके चपेट में आने से रोकना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। लेकिन फिर भी, कुछ सावधानियां बरत के आप इस समस्या से बच सकते हैं।

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सर्जरी या ट्रॉमा

सर्जरी या ट्रॉमा

कुछ लोगों को अनजाने में गाउट के जोखिम का सामना करना पड़ता है। जैसे कि बाईपास सर्जरी के बाद गाउट होने का जोखिम बढ़ सकता है, या फिर ट्रॉमा के साथ भी गाउट का जोखिम जुड़ा हुआ है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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