Subscribe to Onlymyhealth Newsletter

40 की उम्र के बाद महिलाओं के डायट में जरूरी हैं ये 7 बदलाव!

आज हम 40 की उम्र में कदम रखने जा रही या 40 की हो चुकी महिलाओं के डायट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो उन्हें न सिर्फ शरीरिक रूप से स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

एक्सरसाइज और फिटनेस By Rahul SharmaDec 14, 2016

40 के बाद महिलाओं की डायट में जरूरी बदलाव

हमारे देश में महिलाएं पति, बच्चों और घर का तो पूरा ख्याल रखती हैं लेकिन खुद का ख्याल रखने के लिए वक्त नहीं निकाल पाती हैं। शुरुआती दौर में तो इसका ज्यादा प्रभाव उसके स्वास्थ्य पर नहीं होता है, लेकिन 40 की आयु तक पहुंचते ही शरीर इसके दुष्प्रभावों को दिखाना शुरू हो जाते हैं। ऐसे में अचानक से बुढ़ापे का अहसास होने लगता है और कई शारीरिक समस्याएं घेर लेती हैं। इसके लिए यह बेहद जरूरी है कि 40 की उम्र में महिलाएं अपने डायट का विशेष ख्याल रखें और डायट में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करें। आज हम 40 की उम्र में कदम रखने जा रही या 40 की हो चुकी महिलाओं के डायट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो उन्हें न सिर्फ शरीरिक रूप से स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
Image Source: prevention.com

कैल्शियम और आयरन की सही खुराक लें

भारतीय महिलाओं में आयरन और कैल्शियम की कमी आमतौर पर पाई ही जाती है। इसलिए 40 की उम्र में आने पर एक बार इन दोनों का टेस्ट जरूर करा लें और अपने खानपान में ऐसी चीजें शामिल करें, जिनमें कैल्शियम और आयरन की मात्रा अधिक हो। कोशिश करें कि इन्हें प्राकृतिक स्रोतों से ही प्राप्त करें, लेकिन यदि डॉक्टर इनकी गोलियां लेने को कहें तो इनसे भी परहेज न करें।
Image Source: healthyscroll

रोजाना न करें वजन की जांच

हालांकि शोध बताते हैं कि रोजाना वजन जांचना कुछ लोगों को अपना वजन नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है, लेकिन 40 की उम्र के बाद यह काम करना लाभदायक साबित नहीं होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं में 40 की उम्र के बाद कई हॉर्मोन संबंधी बदलाव होते हैं, जिसके चलते वजन में परिवर्तन होना लाजिमी होता है। तो ऐसे में खानपान पर ध्यान और नियमित व्यायम भर काफी होता है। रोजाना अपना वजन नापना ऐसे में आवश्यक नहीं होता है। इससे मानसिक तौर पर असहजता होती है।
Image Source: prevention.com

डायट का सही से पालन करें

लोगों में एक आम धारणा होती है कि वे यदि थोड़ी ज्यादा एक्सरसाइज कर लेंगे तो उनके द्वारा खाया गया ज्यादा कैलोरी वाला भोजन भी मोटापा नहीं बढ़ाएगा और न ही इससे कोई समस्या होगी। दरअसल उम्र के साथ शरीर की शक्ति भी कम होती जाती है और शरीर को सभी चीजों की संतुलित मात्रा की जरूरत होती है। ऐसे में डायट और एक्सरसाइज दोनों का संतुलन जरूरी होता है।
Image Source: prevention.com

कोई भी भोजन न छोड़ें

महिलाएं हो या पुरुष, हेल्दी नाश्ता करना सभी की सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है। खासतौर पर 40 पार कर चुकी महिलाओं को तो दिन के पांचों भोजन करना बेहद जरूरी होता है। इसलिए पतले होने के चक्कर में कोई भी भोजन न छोड़ें और थोड़ा-थोड़ा करके, लेकिन हेल्दी भोजन करें। लंच और नाश्‍ते के बीच 4 से 5 घंटे का अंतर रखें। लंच में स्वास्थ्यवर्धक आहार लें, इससे आप चुस्त और दुरुस्त बनी रहेंगी।

 

Image Source: Weight Loss Help

एल्कोहल से दूरी बेहद जरूरी

बढ़ती उम्र के साथ-साथ शरीर की मसल्स भी कम होती जाती हैं और उसकी प्रतिरोधक क्षमता भी। खासतौर पर 40 पार कर चुकी महिलाओं में तो इसका प्रभाव साफ देखा जा सकता है। ऐसे में उनका शरीर एल्कोहल के दुष्प्रभाव को झेलने योग्य नहीं रहता है। शोध भी बताते हैं कि 40 की उम्र पार कर चुकी महिलाओं में एल्कोहल के नियमित सेवन से गंभीर नुकसान होते हैं। तो इस उम्र में एल्कोहल कम नहीं, बल्कि बिल्कुल बंद कर देनी चाहिए।

 


Image Source: prevention.com

गाय का घी खाएं

खाना पकाने में हम तेल या घी इस्तेमाल करते हैं। लेकिन उसका सेहत पर बेहद गहरा असर पड़ता है। रिफाइंड ऑयल के इस दौर में घरों में गाय का घी मिलना तो बहुत मुश्किल है लेकिन अगर गुंजाइश हो तो महिलाओं के डायट में गाय का घी जरूर खाएं। गाय के घी में सीएलए यानी कॉन्जुलेटेड लिनोलेक एसिड अच्छी मात्रा में होता है जो महिलाओं को विभिन्न प्रकार के संक्रमणों और मोटापे से दूर रखता है।


Image Source: Health

प्रोटीन युक्त आहार (मछली बेहतर विकल्प)

40 की आयु वाली महिलाओं के लिए प्रोटीन बेहद लाभदायक होता है। आहार में प्रोटीन लेने से शरीर के साथ-साथ मांसपेशियां, बाल, त्वचा और कनेक्टिव टिशूज अच्छे रहते हैं। मछली इसके लिए बेहद कमाल का विकल्प होती है। मछली में मौजूद फैटी एसिड- ओमेगा 3 महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद है। कई बार कांट्रासेप्टिव पिल्स के साइड एफेक्ट से महिलाओं में होने वाली ब्लड क्लॉटिंग की समस्या से बचाव के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा इसके सेवन से हाइपरटेंशन, अवसाद, जोड़ों में दर्द, गठिया, दिल के रोग और प्रजनन संबंधी समस्याओं से भी बचाव होता है।

 


Image Source: prevention.com

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK