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छींकने से जुड़ी इन 6 बातों से अनजान हैं आप

छींक केवल सर्दी या जुकाम के वक्त नहीं आती। छींक कई बार धूप में निकलने या सेक्स के बाद भी होती है। चौंकने की जरूरत नहीं है। ये सच है। छींक से जुड़ी ऐसी अन्य चीजों को जानने के लिए पढ़ें ये स्लाइडशो।

तन मन By Gayatree Verma May 18, 2016

छींक से जुड़ी अनजानी बातें

सामान्य तौर पर छींक सर्दी-जुकाम में आती है या किसी एलर्जी की वजह से आती है। लेकिन कई बार छींक अजीब सी स्थितियों में भी आ जाती है। जैसे धूप में निकलने से या सेक्स के बाद भी छींक आती हैं। छींक से जुड़े ऐसे ही अनजाने रोचक तथ्यों के बारे में इस स्लाइडशो में विस्तार से पढ़ें। इन तथ्यों को पढ़ने के बाद आप जरूर चौंकेंगे औऱ इन पर शक भी करेंगे। लेकिन ये सारे तथ्यों की पुष्टि कई शोधों में हो चुकी है।

सेक्स के बाद छींक

इसे पढ़कर आप भले ही चौंक रहे होंगे लेकिन ये सच है। सेक्स करन के बाद कई लोगों को छींक आती हैं। इस पर कई शोध भी हुए हैं और इसकी पुष्टि कई शोध में हो चुकी है। सेक्स के बाद आने वाली छींक पर हुए शोध के अनुसार सेक्स के दौरान पैरासिंपेथेटिक ‌नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है जिसकी वजह से सेक्स के बाद कई लोगों को छींक आती है।

आइब्रो बनवाने के दौरान

कई लोगों को आइब्रो बनवाने के दौरान भी छींक आती है। आईब्रो को शेप देने के दौरान जब आइब्रो के बाल निकाले जाते हैं तो कई लोगों को छींक आ जाती है। ऐसा होना बिल्कुल लाज़िमी है। दरअसल, आइब्रो के ठीक नीचे जो नस होती है वो श्वास नली से जुड़ी होती हैं। ऐसे में आइब्रो बनाने के दौरान जब इस नस पर किसी भी प्रकार की गतिविधी होती है तो छींक आती है।

नींद में नहीं आती छींक

नींद में कभी भी छींक नहीं आती। अगर कोई इंसान सो रहा है और वो छींक देता है तो समझ जाइए कि वो सोने का नाटक कर रहा है। दरअसल सोने के दौरान शरीर के साथ छींक से जुड़ी नसों को भी आराम मिलता है जिस कारण कभी भी सोने के समय कभी भी छींक नहीं आती है। या फिर ऐसे कह सकते हैं कि सोने के वक्त छींकना नामुमकिन है।

धूप में आती है छींक

सामान्य तौर पर छींक की वजह सर्दी-जुकाम को माना जाता है। लेकिन कई बार धूप की वजह से भी छींक आती है। कुछ शोधों के अनुसार तेज धूप के कारण छींक की नसें सक्रिय हो जाती हैं जिससे बिना मौसम के धूप में खड़े रहने या चलते वक्त भी छींक आ जाती है।

नसों से संबंध

अगर आपके नाक में कुछ फंस जाता है तो भी छींक आ जाती है। दरअसल छींकने का संबंध दिमाग की उन नसों से होता है जो दिमाग को संकेत देता है कि नाक में कुछ फंस गया है औऱ उसे छींक के द्वारा तुरंत बाहर निकालो। और इस संकेत के तुरंत बाद ही छींक आती है। कई शोधों के अनुसार कई छींकों में अंतर होता है और सभी प्रकार की छींक के पीछे दिमाग के अलग-अलग तरह के सिग्नल जिम्मेदार होते हैं।

छींक बढ़ाती है प्रतिरोधी क्षमता

छींक इम्युन सिस्टम को मजबूत कर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। कई शोधों में इस बात की पुष्टि की गई है कि छींकने से शरीर के हानिकारक कीटाणु  बाहर निकल जाते हैं जिससे इम्युन सिस्टम मजबूत बनता है औऱ इन हानिकारक कीटाणुओं से बच जाता है। हेल्दी लाइफ के लिए छींक का आना बहुत जरूरी है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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