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दिल की सुनने वालों के सामने होती हैं ये चुनौतियां

कहा जाता है कि जब फैसले लेने में दिक्कत हो तो दिल की सुनो। लेकिन क्या आपको मालुम है कि दिन की सुने में इतनी सारी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Devendra Tiwari Feb 22, 2016

क्‍यों दिल की सुनते हैं लोग

हम कोई भी निर्णय लेने के लिए या तो दिमाग की सुनते हैं या फिर दिल की सुनते हैं। दिमाग की सुनने वाले सोच-विचारकर काम करते हैं जबकि दिल की सुनने वाले मस्‍तमौला होते हैं और कोई भी निर्णय बिना सोचे-समझे ले लेते हैं। दिल की सुनने वाले लोग वही काम करते हैं जो उनको अच्‍छा लगता है। लेकिन हमेशा दिल की सुनना आसान नहीं होता है और जरूरी नहीं है कि दिल की सुनने वालों को हमेशा सफलता ही मिले। उनके सामने कई तरह की चुनौतियां होती हैं। इस स्‍लाइडशो में हम आपको बता रहे हैं कि दिल की सुनने वालों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

समाज का विरोध

सोसायटी यानी समाज सभी चीजों को आसानी से स्‍वीकार नहीं करता है, समाज हर उस चीज का विरोध करता है जो परंपराओं को और रटी-रटाई मान्‍यताओं को तोड़ते हैं। दिल की सुनने वाले समाज के हर विपरीत ही काम करते हैं। अब भी समाज की नजर प्‍यार करना गुनाह है और समाज उन प्रेमियों को स्‍वीकार नहीं करता जो अलग जाति या धर्म के होते हैं। इसलिए दिल की सुनने वालों के सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती समाज के विरोध की होती है। इसकी शुरूआत घर से होती है और कई मामलों में घरवाले भी विरोध करने लगते हैं।

कुछ मामलों में पिछड़ जाते हैं

दिल की सुनने वालों को सफलता और शोहरत थोड़ी देर से मिलती है। इसलिए पढ़ाई पूरी करके निकलने के बाद जब दोस्‍त किसी अच्‍छी कंपनी में काम शुरू कर देते हैं वहीं दूसरी तरफ दिल की सुनने वाले संघर्षरत रहते हैं। ऐसा इसलिए भी होता है क्‍योंकि दिल की सुनने वाले परंपरावादी जिंदगी जैसे कि - डॉक्‍टर, इंजीनियर न बनकर एक अलग मार्ग चुनते हैं। इस रेस में आप शुरूआत में अपने दोस्‍तों से पीछे रहते हैं। लेकिन जब सफलता मिलती है तो फिर दौलत और शोहरत दोनों साथ होती है।

सफलता नहीं होती आसान

एक सामान्‍य जीवन जीना बहुत मुश्किल काम नहीं होता है। लेकिन दिल की सुनने वाले कुछ अलग करने की ठानते हैं। हालांकि सामान्‍य से हटकर काम करना आसान नहीं होता है, इसके लिए बहुत संघर्ष और मेहनत की जरूरत होती है। आपने सुना होगा कि थॉमस एल्‍वा एडीशन को बल्‍ब बनाने के लिए सौ से भी अधिक बार प्रयास करने पड़े। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, यानी दिल की सुनने वालों के लिए सफलता मिलना बहुत आसान काम नहीं होता है।

पैसे को लेकर समस्‍या

अगर आप दिल की सुन रहे हैं और अपने मन की करने की ठान ली है तो यकीन मानिये आपको पैसों की किल्‍लत से जूझना पड़ सकता है। और ये भी हो सकता है कि आपने जो भी करने की ठान ली है उसमें आपको मनमुताबिक पैसा भी न मिल पाये। ऐसे में आप अपने रास्‍ते से भटक भी सकते हैं। लेकिन भटकने से अच्‍छा है आप उस काम को करते रहें। क्‍या पता बाद में आपको ऐसा रिवार्ड मिल जाये जिसकी कल्‍पना भी आपने न की हो।

बो‍रियत के साथ ध्‍यान भटकना

दिल की सुनने वाले जोश में आकर काम शुरू तो कर देते हैं लेकिन कुछ दिनों बाद ही उनको उसी काम में बोरियत होने लगती है। क्‍योंकि वो जो करते हैं वो उतना भी आसान नहीं होता। ऐसे में लक्ष्‍य से भटकना आम बात है। अगर आपने कदम उठा लिया है तो पीछे न हटें। ध्‍यान से काम को करें, फिर देखिये कुछ दिनों में बोरियत लगने वाले काम को करने में आपको मजा आने लगेगा। स्‍वामी विवेकानंद ने सफलता का मंत्र कुछ इस तरह दिया, ''एक विचार लो, उसे अपना जीवन बनाओ, उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, अपने शरीर के हर हिस्‍से में उस विचार को डाल लो, बाकी विचारों को किनारे रख दो, सफल होने का यही तरीका है।''

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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