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नी रिप्लेसमेंट सर्जरी से पहले इन 5 बातों को जानना जरूरी

भारत में नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की प्रक्रिया काफी प्रचलित हो गई है, लेकिन आप कैसे जानेंगे कि आपको वाकई नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की जरूरत है? क्योंकि नी रिप्लेसमेंट से कई जोखिम भी जुड़े होते हैं, जानें इसके बारे में कुछ जरूरी बातें।

विविध By Rahul SharmaJul 14, 2015

नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के साइड इफेक्ट

बीते कुछ वर्षों में नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की प्रक्रिया काफी प्रचलित हो गई है। केवल अमेरिका में ही हर साल लगभग 600,000 लोगों की नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की जाती है। भारत में भी इसका आंकड़ा काफी बड़ा है। लेकिन आप कैसे जानेंगे कि आपको वाकई नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की जरूरत है। क्योंकि नी रिप्लेसमेंट से कई जोखिम भी जुड़े होते हैं। इसलिये आपके लिये ये जानना जरूरी होता है कि सर्जरी में कुछ गड़बड़ होने पर आपको किन जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। चलिये जानें नी रिप्लेसमेंट सर्जरी करने से पहले जान लेने वाली 5 बेहद जरूरी बातें -   
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कब होती है नी रिप्लेसमेंट सर्जरी


डॉक्टरों के अनुसार घुटनों में अर्थराइटिस होने या फिर किसी चोट आदि से कई बार बेहद मुश्किल स्थिति पैदा हो जाती है और बेहद दर्द होने लगता है। और फिर जैसे-जैसे घुटने जवाब देने लगते हैं, चलना-फिरना, उठना-बैठना, यहां तक कि बिस्तर से उठ पाना भी मुश्किल हो जाता है। तो ऐसे में दोनों घुटनों का नी-रिप्लेसमेंट ऑपरेशन किया जाता है। इस सर्जरी में इसमें जांघ वाली हड्डी, जो घुटने के पास जुड़ती है और घुटने को जोड़ने वाली पैर वाली हड्डी, दोनों के कार्टिलेज काट कर उच्चस्तरीय तकनीक से प्लास्टिक फिट किया जाता है।   
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एनेस्थीसिया साइड इफेक्ट्स और प्रतिकूल प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है


कुछ बड़ी सर्जरी में बेसुध करने के लिये एनेस्थीसिया दिया जाता है ताकि रोगी को ऑपरेशन के दौरान दर्द का आहसास न हो। अधिकांश मामलों में एनेस्थीसिया सुरक्षित होता है और कोई समस्या पैदा नहीं करता है, लेकिन फिर भी कहीं न कहीं इसके साइड इफेक्ट की गुंजाइश रहती ही है।
इसके प्रतिकूल प्रभाव निम्न प्रकार से हो सकते हैं:

  • मतली और उल्टी
  • चक्कर आना
  • उनींदापन
  • सांस की नली की सूजन
  • दांतों को नुकसान
  • वोकल कॉर्ड्स को चोट
  • धमनियों में चोट

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सर्जरी में डीप वेन थ्रंबोसिस और पल्मोनरी एम्बोलिस्म का जोखिम



डीप वेन थ्रंबोसिस और पल्मोनरी एम्बोलिस्म दोनों ही टर्म फेफड़ों में रक्त के थक्के जमने वाली स्थिति लिये प्रयोग की जाती हैं। सभी सर्जरी खून के थक्कों के बनने के जोखिम को बढ़ाती हैं, लेकिन नी रिप्लेसमेंट सर्जरी जैसी आर्थोपेडिक प्रक्रियाओं में जोखिम बढ़ जाता है। आमतौर पर सर्जरी के बाद के पहले दो हफ्तों के भीतर रक्त के थक्के ज्यादा जमते हैं। इसलिये इनके लक्षणों के प्रति सचेत रहना चाहिये ताकि आपातकाल की स्थिति में समय से चिकित्सकीय मदद ली जा सके।
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संक्रमण होने की आशंका रहती है


दोनों मधुमेह और रुमेटी गठिया शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता को कम करते हैं। यदि आपको इसमें से कोई एक या दोनें हैं तो आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है और आपको नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद संक्रमण होने की आशंका अधिक रहती है। कुछ मामलों में रोगी के शरीर में सर्जरी के समय मौजूद संक्रमण बाद में चलकर सर्जरी हुए घुटने में संक्रमण का कारण बन सकता है।   
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इंप्लांट विफल हो सकता है


कृत्रिम घुटने कई तरह से विफल हो सकते हैं, जैसे सर्जरी के बाद उनका न मुड़ पाना, दर्द बना रहना या ढ़ीला हो जाना। अगर कृत्रिम घुटना ढ़ीला रह जाए तो इसे समायोजित करने की जरूरत पड़ती है। साथ ही इंप्लांट के साथ जरूरी नहीं कि घुटने जीवन भर चलें।
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ओस्टियोलिसिस (Osteolysis) हो सकता है



कुछ मरीजों में इंप्लांट वाले प्लास्टिक (पॉलीथीन) के टुकड़े शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने वाले कणों को उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसे में वाइट ब्लड सेल इन कणों पर हमला कर उन्हें पचा सकती हैं। दुर्भाग्यवश वाइट ब्लड सेल हड्डियों को भी कमजोर बना सकती है।
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क्या करें


जिन्दगी की भागदौड़ में घुटने अकसर कमजोर पड़ ही जाते हैं, इसलिए चलते-फिरते और यहां तक कि आराम के वक्त भी इनकी सेहत का ध्यान रखें। घुटनों ने यदि दर्द, सूजन या टेढ़ेपन जैसा कोई संकेत दिया है तो इसे नजरअंदाज न करें। दवाई, एक्सरसाइज और चिकित्सकीय मदद आदि विकल्प आपके घुटनों की उम्र बढ़ा सकते हैं।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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