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5 कारणों से खराब रिश्‍तों को भी ढोती हैं महिलायें

लड़ाई-झगड़े और मनमुटाव के चलते रिश्ता बोझ लगने लग जाता है। इसके बावजूद महिलायें इस रिश्‍ते से अलग होना पसंद नहीं करती हैं। इस स्‍लाइडशो में जानते हैं आखिर लड़कियां क्‍यों रिश्‍तों को ढोती हैं।

डेटिंग टिप्स By Devendra Tiwari Jul 26, 2016

खराब रिश्‍ते और महिलायें

महिलाओं का दिल बहुत बड़ा होता है, क्‍योंकि वो सकारात्‍मक विचारों को अधिक मानती हैं। यही वजह है कि वो हर रिश्‍ते को जीवन के आखिरी पलों तक निभाने की कोशिश करती हैं। रिश्‍ते में भले ही क्‍यों बहुत कड़वाहट ही क्‍यों न हो, महिलायें इस रिश्‍ते से दूर जाने की बजाय उसे ढोना पसंद करती हैं। कोई रिलेशनशिप तभी पनपता है जब दो लोग एक-दूसरे का जीवनभर साथ निभाने का वादा करते हैं और पार्टनर को हर तरह की खुशियां भी देते हैं। इन वजहों से दो लोग एक-दूसरे के करीब आते हैं और एक रिश्‍ता बन जाता है। लेकिन कई बार हमारी उम्‍मीदें खरी नहीं उतरती हैं और खुशियों की तलाश गम में बदल जाता है। लड़ाई-झगड़े और मनमुटाव के चलते रिश्ता बोझ लगने लग जाता है। इसके बावजूद महिलायें इस रिश्‍ते से अलग होना पसंद नहीं करती हैं। इस स्‍लाइडशो में जानते हैं आखिर लड़कियां क्‍यों रिश्‍तों को ढोती हैं।

पहला प्‍यार

ज्‍यादातर महिलाएं इस कारण से भी किसी रिश्‍ते से अलग नहीं होती हैं, क्‍योंकि वह उनका पहला प्‍यार होता है। ऐसे में भले ही रिश्‍ते में कितनी कड़वाहट क्‍यों न आ जाये महिलायें अपने पहले प्‍यार से दूर होना पंसद नहीं करती हैं। इसलिए वो बहुत लड़ाई-झगड़ों के बाद भी तलाक या अलगाव के बारे में भी नहीं सोचती हैं। वो अपने पहले प्‍यार के साथ जीवन के आखिरी पल तक रहना चाहती हैं।

सब ठीक हो जायेगा

पॉजिटिव सोच ऐसी परिकल्‍पना है जो हर रिश्‍ते को एक सूत्र में पिरोता है। और महिलायें रिलेशनशिप को लेकर बहुत ही पॉजिटिव होती हैं, जिसके कारण वो रिश्‍तों की कड़वाहट को भविष्‍य के आसरे छोड़ देती हैं। कई बार महिलायें ऐसे रिश्ते को ये सोचकर ढोती हैं कि एक न एक दिन तो सबकुछ ठीक हो ही जाएगा। इसी सोच के कारण वे उसका विरोध भी नहीं कर पाती हैं।

इंसानियत सामने आ जाता है

कई ऐसे मौके भी आते हैं जब महिलायें लाखों बुराइयों के बावजूद किसी को छोड़ना उचित नहीं समझती हैं। क्‍योंकि उनके सामने इंसानियत का सवाल खड़ा हो जाता है, इसी कारण से वह उस रिश्‍ते से अलग नहीं हो पाती हैं। इंसानियत ऐसी अवधारणा है जिसके कारण हम उस शख्‍स की मदद करते हैं जिसके बारे में हम अनजान होते हैं। ऐसे में पार्टनर का रिश्‍ता तो बहुत ही नजदीक होता है।

वक्‍त बीत जायेगा

सामान्‍यतया जब किसी रिश्‍ते की शुरूआत होती है तो सब अच्‍छा होता है, कई सालों तक स्थिति सामान्‍य होती है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है इंसान की बुराइयां सामने आने लगती हैं और जिस इंसान को वह सबसे अधिक प्‍यार करता है उससे ही नफरत करने लगता है। इन सबमें कई साल बीत जाते हैं। इसके बाद ज‍ब स्थिति खराब होती है तब महिलायें इससे अलग नहीं हो पाती हैं। क्‍योंकि उनको लगता है कि जीवन के कई साल बीत चुके हैं और जो बचे हैं वो भी किसी तरह बीत ही जायेंगे।

सामाजिक बंधन

यह ऐसा बंधन है जिसके कारण लोग गलत कदम उठाने से पहले हजारों बार सोचते हैं। सामाजिक बंधन के कारण ही लोगों के घर की बात सबके सामने नहीं आती है। ऐसे में अगर रिश्‍ते में कड़वाहट है और स्थिति खराब हो चुकी है, फिर भी महिलायें इस बात से इस रिश्‍ते से अलग नहीं हो पाती हैं, क्‍योंकि उनको लगता है समाज क्‍या कहेगा, लोग क्‍या सोचेंगे।
Image Source : Getty

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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