पैर ही नहीं रीढ़ की हड्डी को भी नुकसान पहुंचाती है हाई हील्‍स, जानें एक्‍सपर्ट की राय

आकर्षक और लंबे दिखने के लिए अनेक महिलाएं हाई हील्स और कुछ पुरुष ऊंची एड़ी के जूते पहनते हैं। ऐसे फुटवियर सेहत के लिए समस्याएं पैदा कर रहे हैं। डॉ. सर्वोत्तम चौहान (सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट, मेदांता दि मेडिसिटी, गुरुग्राम) बता रहे हैं हाई हील्स के क्‍या

हेल्थ डिसीज़ By Atul Modi / Sep 14, 2018
हाई हील्‍स

हाई हील्‍स

आम तौर पर लोगों में यह धारणा व्याप्त है कि हाई हील्स और ऊंची एड़ी के जूते पहनने से किसी प्रकार की कोई शारीरिक समस्या पैदा नहीं होती, लेकिन अनेक अध्ययनों और शोधों से यह पता चला है कि हाई हील्स और ऊंची एड़ी के जूतों का शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इनके इस्तेमाल से कालांतर में हमारा पोस्चर खराब होने लगता है। इस कारण कुछ प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। जैसे हाई हील्स और ऊंची एड़ी वाले जूते रीढ़ की हड्डी के लम्बर कर्व को बहुत प्रभावित करते हैं, ये पिंडलियों की मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव डालते हैं। यह स्थिति कई समस्याओं को कालांतर में पैदा करती हैं... 

कमर में दर्द

कमर में दर्द

हाई हील्स और ऊंची एड़ी वाले जूते पहनने से हमारे पैर को वांछित सपोर्ट नहीं मिलता, जिससे हमारी रीढ़ की हड्डी पर दुष्प्रभाव पड़ता है।  हाई हील्स पहनने से हमारी रीढ़ की हड्डी के कमर के निचले हिस्से का कर्व बढ़ जाता है जिससे नसों पर दबाव पड़ता है। इसके दुष्परिणाम से हमें पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन महसूस होने लगता है।  

अंगूठे पर असर

अंगूठे पर असर

हील्स के ज्यादा इस्तेमाल से हमारे पैर के अंगूठे पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिससे आगे चलकर अंगूठे एक विशेष प्रकार की विकृति से ग्रस्त हो जाते हैं। उम्र के साथ साथ यह विकृति भी बढ़ती जाती है जिसका आखिरी इलाज ऑपरेशन ही है।  

पोस्चर पर प्रभाव

पोस्चर पर प्रभाव

हाई हील्स का हमारे पोस्चर पर सीधा असर पड़ता है, जो सारे शरीर के जोड़ों के लिए नुकसानदेह है। यह स्थिति हमारे शरीर के संतुलन को बिगाड़ देती है। इस स्थिति में गिरने और चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में लिगामेंट में चोट और  फ्रैक्चर होना आम बात है। 

घुटने पर खराब असर

घुटने पर खराब असर

हाई हील्स से घुटने का एंगल भी बदल जाता है जिससे  हमारे घुटने की कुदरती स्थिति गड़बड़ हो जाती है और  हमारी हैमस्ट्रिंग मांसपेशियां टाइट हो जाती हैं। इस कारण कालांतर में कमर के दर्द का खतरा बढ़ जाता है। 

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