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5 ऐसी महिलाएं जिन्होंने किया देश का नाम रोशन

हैप्पी वूमेन्स डे...। साक्षी मलिक, पीवी सिंधु, चंदा कोचर... आदि सभी वूमेन्स सेलेब्स को तो आप जानते ही होंगे तो क्यों ना इस महिला दिवस उनकी बात की जाए जो हम सबके बीच की ही हैं फिर भी हम से अलग हैं।

तन मन By Gayatree Verma / Mar 06, 2017

पीवी सिंधु, साक्षी मलिक के बाद कुछ आम महिलाओं की बात

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचन बना चुकीं पीवी सिंधु, साक्षी मलिक, प्रियंका चोपड़ा, चंदा कोचर, इंदिरा नुई, सायना नेहवाल, ... आदि भारतीय महिलाओं के चर्चे आज पूरी दुनिया में हैं। लेकिन इस महिला दिवस हम ऐसी महिलाओं की बात करने वाले हैं और इसके बहाने उन्हें याद करने वाले हैं जिनके कार्यों के कारण देश का नाम हमेशा रोशन रहेगा।

सुनीता विलियम्स

अंतरिक्ष में जाने वाली सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं। सुनीता अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के माध्यम से अंतरिक्ष में गई थीं। ये  गुजरात के अहमदाबाद से ताल्लुक रखती हैं। इन्होंने एक महिला अंतरिक्ष यात्री के रुप में 195 दिनों तक अंतरिक्ष में दिन बिताकर पूरी दुनिया में देश का नोम रोशन किया।

हिमानी डाबी

आपने हिमानी डाबी का नाम सुना है...
याद नहीं आ रहा है। अच्छा ... आपने टीना डाबी का तो नाम सुना होगा। बिल्कुल, इंडिया की पहली दलित यूपीएससी टॉपर हैं। वो भी पहली बार में ही ये एक्ज़ाम टॉप किया। हिमानी डाबी, टीना डाबी की मां हैं। यहां हम हिमानी डाबी की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए अपनी इंजीनियरिंग की जॉब से रिटायरमेंट ले लिया। यहां तक की जब टीना दसवीं के बाद साइंस ले रही थी तब इनकी मां ने ही इन्हें आर्ट्स सब्जेक्ट लेने के लिए प्रोत्साहित किया था।  
बकौल टीना,  "मेरी सफलता पर जितना हक मेरा है उतना ही मेरी माँ का भी है"।

सुनयना श्रीनिवास

सुनयना अमेरिका के कंसास में हुई गोलीबारी में मारे गए भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचीभोटला की पत्नी हैं। इस केस के बाद जब सब भारतीय अमेरिका से वापस भारत आ रहे हैं वहीं सुनयना अपने पति का सपना पूरा करने के लिए अमेरिका जाने वाली हैं। पति की यादों को समेटते हुए सुनयना अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखती हैं कि, वह अपने पति के सपने को पूरा करने के लिए अमेरिका वापिस जाएंगी। वहीं श्रीनिवास की मां ने अपने छोटे बेटे को अमेरिका जाने से मना कर दिया है।
बकौल सुनयना, हम कुछ साल पहले वहां अपने सपने को पूरा करने के लिए अमेरिका गए थे, वहां पर उन्होंने अपना घर बनाया। मैं वहीं वापस जाना चाहती हूँ।

सुनीता नारायण

भारत के पर्यावरणविद की बातों में सुनीता नारायण की बात जरूर होती है। सुनीता नारायण सन 1982 से विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र से जुड़ी हैं। इस समय केंद्र की निदेशक हैं। वे पर्यावरण संचार समाज की निदेशक भी हैं। वे डाउन टू अर्थ नाम की एक अंग्रेजी पत्रिका भी प्रकाशित करती हैं जो पर्यावरण पर केंद्रित पत्रिका है।

मेधा पाटकर

जब भी नर्मदा की बाद की जाती है तो मेधा पाटकर की बात जरूर होती है। पूरी दुनिया में मेधा पाटकर को 'नर्मदा घाटी की आवाज़' के रूप में जाना जाता है। मेधा गांधीवादी विचारधारा से काफी प्रभावित है और मेधा पाटकर ने 'सरदार सरोवर परियोजना' से प्रभावित होने वाले लगभग 37 हज़ार गांवों के लोगों को अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ी है। उन्होंने महेश्वर बांध के विस्थापितों के लिए भी आंदोलन का नेतृत्व किया है।

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