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अपने बच्‍चों को भूलकर भी न दें ये अस्‍वस्‍थ आहार

कई बार स्वस्थ लगने वाली चीजें जो आप अपने बच्चों को देती हैं वो आपके बच्चे के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ये 10 अस्वस्थ आहार अपने बच्चों को ना दें।

एक्सरसाइज और फिटनेस By Meera RoyDec 07, 2015

स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते अस्वस्थ आहार

स्वस्थ रहने की बात आते ही हम तमाम किस्म के आहार नजरंजदाज करने की बात करते हैं। खासकर बात जब बच्चों की हो तो जरा भी लापरवाही हम बर्दाश्त नहीं करते। यही वजह है कि हम फ्राइड स्नैक्स और मीठे से बच्चों को दूर रखने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और भी आहार हैं, जिन्हें दरकिनार करना जरूरी है। यहां हम ऐसे ही दस अस्वस्थ आहार की बात करेंगे जिन्हें बच्चों को देने से इंकार करना आवश्यक है।

फ्रेंच फ्राइज़

इसमें कोई दो राय नहीं है कि तेल युक्त आहार कम से कम लेना चाहिए। खासकर जब बात बच्चों की हो। फ्रेंच फ्राइज़ में न सिर्फ अस्वस्थ वसा पायी जाती है वरन इसमें कैलोरीज़ भी अधिक मात्रा में होती है। अध्ययनों के मुताबिक भुने हुए आहार मानसिक रुचि को प्रभावित करता है जिससे अन्य सब्जियों के प्रति रुचि कम होने लगती है। यही वजह है कि बच्चे भुने आहार की ओर ज्यादा झुकाव महसूस करते हैं।

मीठे अनाज

यह कहने की जरूरत नहीं है कि मीठे अनाज में फाइबर कम मात्रा में पायी जाती है। जबकि मीठे अनाज कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं। अतः मीठे अनाजों से बच्चों को दूर रखें। यदि मीठे अनाज बच्चों को देना ही है तो बेहतर है कि जिस दाल में 10 ग्राम से कम शुगर मौजूद हो, उसे ही चुनें। यह भी ज़हन में रखें कि मीठे अनाज में कम से कम तीन ग्राम फाइबर आवश्यक रूप में हो।

प्रोसेस्ड रेड मीट

प्रोसेस्ड रेड मीट मसलन हाट डाग आदि डायबिटीज की आशंका बढ़ा देते हैं। अतः बच्चों को इन्हें देने से आवश्यक तौरपर बचें। प्रोसेस्ड रेड मीट हृदय सम्बंधी बीमारियां, कोलोन कैंसर आदि के रिस्क भी बढ़ाता है। असल में हाट डाग जैसे आहार में वसा, सोडियम, नाइट्रेट आदि बहुतायत में पाया जाता है। ये तमाम तत्व कैंसर से लिंक रखते हैं। कोशिश करें कि बच्चों को सिर्फ चिकन ही दें। यदि आप प्रासेस्ड रेड मीट खरीदते हैं तो ध्यान रखें कि उसमें सोडियम की मात्रा कम हो।

कोल्ड ड्रिंक

लगभग सभी प्रकार के कोल्ड ड्रिंक बच्चों के स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। जी, हां! कोल्ड ड्रिंक एक स्वाद के रूप में शुरु होता है और बदकिस्मती से मोटापे पर खत्म। कोल्ड ड्रिंक के रूप में जिस सोडे का बच्चे सेवन करते हैं, उससे टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा रहता है। यह बताने की जरूरत नहीं है कि कैविटीज भी होती है। यह भी बतातें चले कि कोल्ड ड्रिंक के साथ साथ फ्रूट ड्रिंक भी स्वास्थ्य के लिए कोई बेहतर पेय नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि फ्रूट ड्रिंक सौ फीसदी फलों से बनाया गया हो तो वह सोडा से भी बुरे साबित होते हैं।

चाकलेट

यह कहने की जरूरत नहीं है कि चाकलेट किस हद तक दांतों को प्रभावित कर सकते हैं। यही नहीं चाकलेट ज्यादा खाने से शुगर स्तर बढ़ने की भी आशंका रहती है। विशेषज्ञों की मानें तो चाकलेट का सेवन बच्चों को कम करना चाहिए।

स्पोर्ट्स ड्रिंक

क्रिकेट या बैडमिंटन में ताकत लगाने के बाद बच्चे अकसर पानी की बजाय स्पोर्ट्स ड्रिंक को तरजीह देते हैं। लेकिन स्पोर्ट्स ड्रिंक किसी भी मायने में स्वास्थवर्धक नहीं है। स्पोर्ट्स ड्रिंक की बजाय चाकलेट मिल्क का सेवन किया जा सकता है। इसमें प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के मिश्रण की मौजूदगी होती है।

शहद

जब तक आपका शिशु एक साल का न हो जाए तब तक उन्हें शहद पिलाना सही नहीं है। दरअसल शहद में बीजाणु पाए जाते हैं। इसके सेवन से शिशु का गला सूख सकता है, उल्टी हो सकती है, सांस लेने में परेशानी हो सकती है। यहां तक शहद खिलाने से शिशु को पैरालिसिस तक हो सकता है। चूंकि शिशु का प्रतिरक्षी तंत्र कमजोर होता है, जिससे वे शहद को आसानी से हजम नहीं कर सकते। सो उन्हें शहद कतई ना दें।

पैकेज्ड नूडल

नूडल में न सिर्फ पौष्टिकता की कमी होती है बल्कि इनमें बहुतायत में सोडियम पाया जाता है। दो से तीन साल तक के बच्चों को प्रतिदिन 1000 मिलिग्राम सोडियम से ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। जबकि 1200 से अधिक सोडियम 8 साल तक के बच्चों के लिए हानिकारक है। दरअसल पैकेज्ड नूडल्स या पास्ता में जरूरत से ज्यादा सोडियम मौजूद होता है।

चीज़

बच्चे ही नहीं बड़ों के लिए भी चीज़ की अधिकता खतरनाक होती है। दरअसल चीज़ खाने से अकसर पेट भरे का एहसास होता है। नतीजतन पौष्टिकता की शरीर में कमी हो जाती है। हालांकि चीज़ को कैल्शियम और प्रोटीन का बेहतरीन साधन माना जा सकता है। लेकिन 4 से 8 साल तक के बच्चों को रोज़ाना ढाई कप दुग्ध उत्पाद की सलाह दी जाती है। बहरहाल चीज़ के सेवन से मोटापा बढ़ सकता है हृदय सम्बंधी बीमारी बढ़ाने में सहायक होता है।

फ्रूट स्नैक्स

फलों की बात आते ही हम आंख मूंदकर उन पर भरोसा कर लेते हैं और बच्चों को खाने की सलाह भी देते हैं। लेकिन फलों से बना हर उत्पाद स्वास्थ्य के लिए बेहतर हो, यह जरूरी नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फ्रूट स्नैक्स बच्चों को नहीं देना चाहिए। इसके पीछे इसमें मौजूद शुगर स्तर है। असल में एक कैंडी में जितना शुगर स्तर पाया जाता है, उतना ही फ्रूट स्नैक्स में भी होता है। यही नहीं फ्रूट स्नैक्स खाने से दांतों में कैविटीज़ होने का खतरा भी बढ़ जाता है। दरअसल फ्रूट स्नैक्स दांतों में फंस जाते हैं और आसानी से नहीं निकलते। नतीजतन कैविटीज़, सड़न आदि होने का खतरा बना रहता है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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