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दस ऐसे लक्षण जो विटामिन डी की जरूरत बताते हैं

विटामिन डी हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है। यह हमारे शरीर को कई प्रकार के रोगों से बचाने में मददगार है।

स्वस्थ आहार By Anubha Tripathi / Apr 25, 2014

विटामिन डी की कमी

विटामिन डी शरीर के विकास, हड्डियों के विकास और स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। इसकी कमी से कई तरह के रोगों के होने की संभावाना हो सकती है। धूप को इसके मुख्य स्रोत के रुप में जाना जाता है। इके संपर्क में आने पर त्वचा इसका निर्माण करने लगती है। हालांकि यह विटामिन खाने की कुछ चीज़ों से भी प्राप्त होता है,लेकिन इनमें यह बहुत ही कम मात्रा में होता है। केवल इनसे विटामिन-डी की जरूरत पूरी नहीं हो जाती है। आइए जानते हैं विटामिन-डी की कमी के लक्षण क्या हैं।

फ्लू

कैमब्रिज जर्नल के अनुसार विटामिन डी की कमी से शरीर में बच्चों में फ्लू की समस्या होती है। बच्चों में विटामिन डी प्रतिरक्षण तन्त्र को मजबूत करके सर्दी, फ्लू और निमोनिया से सुरक्षा प्रदान करता है।

मांसपेशियों में कमजोरी

वियना में ऑर्थोपेडिक अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ ऑर्थोपेडिक पेन मैनेजमेंट के प्रमुख फ्लोरियान वेपनर ने कहा, 'फाइब्रोमायल्जिया के मरीजों के लिए विटामिन डी सबसे सुरक्षित और किफायती इलाज है।'विटामिन डी के नियमित सेवन से फाइब्रोमायल्जिया के मरीजों को शरीर के पुराने दर्द से राहत मिल सकती है।

मल्टीपल सिरोसिस

गर्भवती महिलाओं को तरह-तरह की समस्याओं से होती है। गर्भवस्था में मल्टीपल सिरोसिस का खतरा बढ जाता है, जिसका कारण विटामिन डी की कमी होना है।

कमजोर हड्डियां

विटामिन डी की कमी से हड्डियों की सतह कमजोर पड़ जाती है। जिससे हड्डियों से जुडी कई समस्याओं का जन्म होता है। महिलाओं को तो विशेषत: इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि विटामिन डी का नियमित सेवन करें क्योंकि महिलाओं में ऑस्टिओपोरोसिस रोग अधिक देखने को मिलता है।

किडनी की समस्या

विटामिन डी की कमी से किडनी संबंधी जटिल बीमारियों (सीकेडी) का खतरा बढ़ सकता है। अमेरीकी शोधकर्ताओं के मुताबिक अगर पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी के सेवन किया जाए तो किडनी संबंधी बीमारियों से होने वाली मौतें चार गुना कम हो सकती है।

डायबिटीज

डायबिटीज केयर जर्नल में प्रकाशित शोध की मानें तो अगर मोटापे और विटामिन डी की समस्या किसी व्यक्ति को एकसाथ हो तो शरीर में इंसुलिन की मात्रा को असंतुलित करनेवाले इस बीमारी की आशंका और भी बढ़ सकती है।

अस्थमा

विटामिन डी की कमी को पूरा कर अस्थमा के खतरे से बचा जा सकता है। जापान में हुए शोध के मुताबिक अस्थमा का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जिनमें विटामिन डी की कमी पायी जाती है खासकार बच्चों में यह समस्या ज्यादा होती है।

टीबी

एक ऑस्ट्रेलियाई रिसर्च के मुताबिक विटामिन डी की कमी से टीबी का खतरा हो सकता है। विटामिन डी हमारे शरीर में एंटीबायोटिक्स की तरह काम करता है और टीबी के बैक्टेरिया से बचाता है।

त्वचा संबंधी समस्या

त्वचा का रंग बहुत गहरा होना। त्वचा का गहरा रंग मिलेनिन नामक पिगमेंट के कारण होता है। मिलेनन बहुत अधिक होने के कारण धूप लगने पर त्वचा में विटामिन-डी का निर्माण ठीक से नहीं हो पाता।

हृदय रोग

शरीर में विटामिन डी की कमी से हृदय रोगों की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। यूनिवर्सिटी आफ कोपेनहेगन तथा कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी होस्पिटल के सहयोग से किए गए एक अध्ययन से यह बात सामने आई है। शरीर में विटामिन डी की कमी के शिकार लोगों को दिल का दौरा पड़ने तथा अन्य संबंधित बीमारियां होने और दिल के दौरे से मौत होने का खतरा बहुत अधिक रहता है।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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