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क्‍यों विवाहित महिलाएं पहनती हैं बिछिया

क्‍यों विवाहित महिलाएं पहनती हैं बिछिया
Quick Bites
  • शादी के बाद महिलाएं सोलह श्रृंगार करती है।
  • इसके 15 वें पायदान पर बिछिया आती है।
  • बिछिया का संबंध सीधे गर्भाशय से जुड़ा है।
  • इससे मासिक धर्म नियमित होता है।

शादी के बाद महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। इन सोलह श्रृंगारों के 15 वें पायदान पर पैर की उंगलियों में पहनने वाली बिछिया आती है। अमूनन बिछिया चांदी की बनी होती है। बिछिया के पांरपरिक गुण होने के साथ साथ कुछ वैज्ञानिक फायदें भी होते हैं। बिछिया का संबंध सीधे गर्भाशय से जुड़ा है। इन्हें दोनों पैरों में पहनने से महिलाओं का मासिक चक्र नियमित होता है। आयुर्वेद की मर्म चिकित्सा में महिलाओं में फर्टिलिटी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए बिछिया के महत्व को माना गया है।  इस बारे में विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें-

 

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  • बिछिया पहनने से महिलाओं को गर्भ धारण में आसानी होती है। चांदी एक गुड कंडक्टर धातु है, अतः यह पृथ्वी की ध्रुवीय ऊर्जा को अवशोषित करके शरीर तक पहुंचाती है। तनावग्रस्त जीवनशैली के कारण अधिकांश महिलाओं का मासिक-चक्र अनियमित हो जाता है। ऐसी महिलाओं के लिए बिछिया पहनना अत्यंत लाभदायक होता है।
  • ऐसा माना जाता है कि एक बिछिया स्त्री के भीतर ऊर्जा को उत्पन्न करती है। पायल की तरह ही चांदी की बिछिया में भी इच्छा शक्ति उजागर करने की शक्ति होती है जो पहनने वाली स्त्री को हर प्रकार के नकारात्मक प्रभाव से दूर रखती है।
  • साइटिक नर्व की एक नस को बिछिया दबाती है जिस वजह से आस-पास की दूसरी नसों में रक्त का प्रवाह तेज होता है और यूटेरस, ब्लैडर व आंतों तक रक्त का प्रवाह ठीक होता है। गर्भाशय तक सही मात्रा में रक्‍त पहुंचता रहता है। यह बिछिया अपने प्रभाव से धीरे-धीरे महिलाओं के तनाव को कम करती है।
  • विज्ञान की माने तो पैरों के अंगूठे की तरफ से दूसरी अंगुली में एक विशेष नस होती है जो गर्भाशय से जुड़ी होती है। यह गर्भाशय को नियंत्रित करती है। रक्तचाप को संतुलित कर इसे स्वस्थ रखती है। बिछिया के दबाव से रक्तचाप नियमित और नियंत्रित रहता है।
  • इस कारण उनका मासिक-चक्र नियमित हो जाता है। इसका दूसरा फायदा यह है कि बिछिया महिलाओं के प्रजनन अंग को भी स्वस्थ रखने में भी मदद करती है। बिछिया महिलाओं के गर्भाधान में भी सहायक होती है।बिछिया एक्यूप्रेशर का भी काम करती है। जिससे तलवे से लेकर नाभि तक की सभी नाड़िया और पेशियां व्यवस्थित होती हैं।



अमूमन यह पैर की दूसरी उंगली में पहने जाते हैं, लेकिन बदलते फैशन के साथ इसे पैर की किसी भी उंगली में पहना जा सकता है।

 

Image Source-Getty

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Written by
Aditi Singh
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागSep 13, 2016

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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