6 अलग स्वाद के साथ तैयार होती है भारतीय भोजन वाली एक 'थाली', जानें थाली के पीछ सेहत की सबसे सरल थ्योरी

Updated at: Aug 09, 2020
6 अलग स्वाद के साथ तैयार होती है भारतीय भोजन वाली एक 'थाली', जानें थाली के पीछ सेहत की सबसे सरल थ्योरी

त्योहारों, समारोहों और रोजमर्रा के खाने का थाली एक अभिन्न हिस्सा है। पर क्या इसका कोई महत्व भी है? आइए जानते हैं इसके बारे में।

Pallavi Kumari
स्वस्थ आहारWritten by: Pallavi KumariPublished at: Aug 09, 2020

भारत के अधिकांश क्षेत्रों में यात्रा करते समय, जब भी हमें स्थानीय रेस्तरां मिलते हैं, वहां मेनू कार्ड में सबसे ऊपर 'थाली (benefits of thali)' लिखा होता है। फिर अगर हम थाली को चुनते हैं, तो एक बड़े सी थाली में हमें तरह-तरह के व्यंजन परोस दिए जाते हैं। भारत में सभी लोगों का पारंपरिक खाना, इसी थाली के बेसिक परंपरा से खाया जाता है। फिर अलग-अलग स्थानों के हिसाब से कुछ क्षेत्रीय संस्करण के साथ थाली में बदलते और जुड़ते जाते हैं। पर कभी आपने सोचा है कि थाली में हमें अलग-अलग स्वाद का खाना क्यों खाने को मिलता है। क्या ये कोई नियम है? तो जी हां, ये थाली आयुर्वेद के 6 अलग-अलग स्वाद के साथ तैयार की जाती हैं, जिसका सेहत के लिए अपने ही मायने हैं। 

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थली की बेसिक बातें (health benefits of indian diet)

थाली के बेसिक मतलब पर जाएं तो इसे हम प्लेट कह सकते हैं, जिसके लिए हिन्दी शब्द के रूप में 'थाली' शब्द का इस्तेमाल होता है। एक थाली आमतौर पर कटोरी नामक छोटे गोल कटोरे के साथ भरी होती है, जिनमें कई प्रकारों के व्यंजन होते हैं। एक थाली में निम्नलिखित चीजों को शामिल किया जाता हैं:

  • -एक अनाज: चावल या गेहूं, बाजरा आदि के साथ बनाया गया कुछ भी।
  • -दाल: दाल या सांभर
  • -सब्जियां: एक मौसमी सब्जी
  • -चटनी: फल, जड़ी-बूटियों, मसालों और यहां तक कि सब्जियों से बना हुआ
  • -रायता: दही आमतौर पर किसी तरह की सब्जी के साथ मिलाया हुआ
  • -अचार: आम तौर पर कच्चे आम से बनाया जाता है, हालांकि यह क्षेत्र द्वारा भिन्न होता है।
  • -पापड़: गहरी तली हुई नमकीन
  • -मिठाई

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भारतीय थाली में होते हैं आयुर्वेद के छह स्वाद (6 tastes of Ayurveda)

  • मधुरा: मीठा (अनाज, आम, केला, लीची, अंगूर, खजूर, प्राकृतिक चीनी, गुड़ आदि)
  • आंवला: नमक (समुद्री नमक, सेंधा नमक, समुद्री भोजन, पत्तेदार साग आदि)
  • लावण्या: खट्टा (खट्टे फल, इमली, कोकम, किण्वित खाद्य पदार्थ, अचार, कच्चा आम)
  • केतु: तीखा (मिर्च, प्याज, लहसुन, अदरक)
  • टिक्टा: करेला (करेला, नीम, कॉफी, चॉकलेट, मेथी)
  • कषाय: कसैले (अधिकांश सब्जियां, अनानास, जामुन, अनार, कटहल, कच्चे केले जैसे कसैले फल)
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संतुलित भोजन है थाली

पोषण संबंधी दृष्टिकोण से, भारतीय थाली में कार्ब्स, प्रोटीन, विटामिन, खनिज और फाइबर प्रदान करने वाला एक संतुलित भोजन होता है। साथ ही डेयरी, जो भारतीय व्यंजनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसका उपयोग घी, दही या छाछ के रूप में किया जाता है। साथ ही थाली में तय होता है कि एक अनाज हो, एक दाल हो, कुछ सब्जियां हों, खट्टी चटनी हों, रायता हो या अचार हो। यानी कि कुल मिलाकर समझा जाए, जो घी और मसालों के इस्तेमाल से भारतीय थैली को स्वादिष्ट होती हैं, वहीं ये शरीर को बैलेंस डाइट देता है।

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पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद

भारतीय भोजन में पाया जाने वाले फाइबर्स जहां पाचनतंत्र के लिए फायदेमं हैं, वहीं अच्छे स्वास्थ्य और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी ये जरूरी है। साथ ही ये छह स्वाद, आयुर्वेद के लिए एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद में, सभी छह की उपस्थिति एक पौष्टिक आहार के लिए महत्वपूर्ण है। प्रत्येक स्वाद, जब एक विशेष क्रम में होता था जैसे कि मीठा पहले और कसैला अंतिम में पाचन की प्रक्रिया में मदद करता है। 

यही छह स्वाद अलग-अलग थाली के बेसिक बनावट हैं। साथ ही भारतीय खाना पकाने में विभिन्न खाना पकाने की तकनीकें जैसे स्टीमिंग, उथले तलने, भूनने, ग्रिलिंग, डीप फ्राई, पर्चिंग, और ड्राई रोस्टिंग का उपयोग किया जाता है, और उनमें से अधिकांश को एक थैली की रचना करते समय नियोजित किया जाता है।

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