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    गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड कराने से भ्रूण की सही स्थिति की मिलती है जानकारी

    गर्भावस्‍था By रीता चौधरी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 29, 2012
    गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड कराने से भ्रूण की सही स्थिति की मिलती है जानकारी

    गर्भावस्‍था के दौरान अल्‍ट्रासाउंड कराने से बच्‍चे की सही स्थिति का पता लगने के साथ इसके कई अन्‍य फायदे भी हैं, जानिए उन फायदों के बारे में।

    गर्भावस्‍था के दौरा अल्‍ट्रासाउंड कराना कोई अपराध नहीं है, बल्कि इसके जरिए आप भ्रूण की सही स्थिति की जानकारी पता कर सकते हैं।अल्‍ट्रासाउंड कराने से गर्भावस्‍था की जटिलताओं को कम किया जा सकता है, साथ ही बच्‍चे के सही विकास की भी होती है जानकारी। 

    Ultrasound During Pregnancyयह एक ऐसी प्रकिया है, जिसमें ध्वनि तरंगों के जरिए गर्भ में पल रहे बच्चे की तस्वीर कंप्यूटर पर दिखाई देती है। यह तस्वीर होने वाले बच्चे की स्थिति और गतिविधि दिखाती है। गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड इसलिए करवाया जाता है ताकि यह पता चल सके कि बच्चा सामान्य रूप से विकसित हो रहा है या नहीं। वैसे ज्यादातर पेरेंट्स अल्ट्रासाउंड करवाते हैं क्योंकि इससे उन्हें अपने बच्चे की पहली झलक देखने को मिलती है।

    कैसे होता है अल्ट्रासाउंड

    अगर गर्भवती महिला गर्भावस्था की शुरुआत में अल्ट्रासाउंड करवाती हैं, तो स्कै्न करवाते वक्त कई गिलास पानी पीना पड़ता है। इससे गर्भ ऊपर की ओर आ जाता है और सोनोग्राफर को शिशु की बेहतर तस्वीर लेने में मदद मिलती है। गर्भवती के पेट पर थोड़ा जैल लगाया जाता है, इसके बाद एक छोटा सा कैमरा शिशु की तस्वीर दिखाता है।

    अगर गर्भ में शिशु पेड़ू में अंदर है या गर्भवती का वजन अधिक है, तो योनि का स्कैन भी जरूरी हो जाता है। इसमें एक संकरा और लंबा उपकरण इस्तेमाल होता है, जो आसानी से योनि में प्रविष्ट हो जाता है। योनि का स्कैन खासकर गर्भावस्था के शुरुआती चरण में शिशु की ज्यादा साफ तस्वीर देता है।  


    अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल क्यों होता है

    • गर्भ में पल रहे बच्चे के धड़कन को जांचने के लिए।
    • गर्भ में पल रहे बच्चों की संख्या बताने के लिए।
    • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जहां भ्रूण गर्भ के बाहर विकसित होने लगता है, की जांच करने के लिए।
    • योनि से किसी तरह के रक्तस्राव की जांच के लिए स्कैन किया जाता है।
    • गर्भ में पल रहे बच्चे की जांच करके गर्भ की सही तिथि बताना।
    • अल्ट्रासाउंड से इस बात की जांच की जाती है कि बच्चे के सभी अंग सामान्य रूप से विकसित हो रहे हैं या नहीं।
    • अल्ट्रासाउंड से किसी असामान्यता की जांच की जाती है।
    • प्लेसेंटा की जांच और एनीमिक तरल की मात्रा का निर्धारण की जांच अल्ट्रासाउंड से की जाती है।
    • अल्ट्रासाउंड के स्कैनों के जरिए बच्चे के विकास की दर को जांचा जाता है।
    • बच्चे के जन्म की नियत तिथि की जांच करने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
    • गर्भ में पल रहे बच्चे के वजन की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड करवाया जाता है।
    • बच्चे में जन्मगत दोषों को जानने के लिए भी अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
    • गर्भवस्था के दौरान रक्तस्राव तथा अन्य समस्याओं के कारण जानने के लिए भी अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
    • गर्भावस्था में बाद के महीनों में बच्चे की स्थिति जानने के लिए भी स्कैन किया जाता है।
    • अल्ट्रासाउंड के जरिये यह भी पताया लगाया जा सकता है कि पेट में जो बच्चा पल रहा है वह लड़का है या लड़की।


    अल्ट्रासाउंड के नकारात्मक प्रभाव

    • अल्ट्रासाउंड से बच्चे के मानसिक विकास में बाधा आती है, इससे निकलने वाली रेडियोएक्टिव तरंगों से होने वाले बच्चे के दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है।
    • नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड करवाने पर होने वाले बच्चे में कोशिकाओं के विकास और उसके विभाजन में बाधा उत्पन्न होने की संभावना बनती है।
    • लगातार अल्ट्रासाउंड करवाने से डीएनए सेल्स को नुकसान पहुंचता है और इसके साथ ही शरीर में ट्यूमर सेल्स भी बनने लगते हैं जो कि मौत का जोखिम बढ़ा देते हैं।
    • नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड करवाने पर होने वाले बच्चे का वजन कम होने की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही बच्चा कमजोर हो सकता है या किसी गंभीर बीमारी का शिकार हो सकता है।
    • गर्भावस्था के दौरान बार-बार अल्ट्रासाउंड करवाने वाली महिलाओं के बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है।

     

     

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    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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