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अंगदान के मामले में बढ़ रही है जागरूकता, आप भी करें ये महादान

लेटेस्ट By ओन्लीमाईहैल्थ लेखक , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 25, 2017
अंगदान के मामले में बढ़ रही है जागरूकता, आप भी करें ये महादान

ऑर्गन डोनेट करने वालों की कमी के चलते ऐसे मामलों का अंत भी अक्सर मौत के रूप में ही होता है। लेकिन अब समाज में परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

हर वर्ष लाखों लोगों की मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है, क्‍योंकि उन्हें कोई डोनर नहीं मिल पाता। कभी ऑर्गन फेलियर के चलते, तो कभी एक्सीडेंट्स के कारण ऑर्गन ट्रांसप्लांट करना ज़रूरी हो जाता है और उसके बाद जान भी बच जाती है, लेकिन ऑर्गन डोनेट करने वालों की कमी के चलते ऐसे मामलों का अंत भी अक्सर मौत के रूप में ही होता है। लेकिन अब समाज में परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

मध्य प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध शहर और व्यापारिक नगरी इंदौर देश का तीसरा ऐसा शहर बन गया है, जहां बीते दो वर्षो में अंगदान में बढ़ोत्तरी हुई है। सोसाइटी फॉर आर्गन डोनेशन की संभागायुक्त संजय दुबे की उपस्थिति में आयोजित एक कार्यशाला में बताया गया कि मुम्बई और नई दिल्ली के बाद इंदौर देश का तीसरा शहर है, जहां पर सर्वाधिक अंगदान हुआ है। पिछले दो साल में इंदौर के 26 लोगों ने अंगदान किया है जिससे 80 से अधिक लोगों की जान बची है।

इसी वर्ष नवम्बर से इंदौर के एमवाय अस्पताल में बोनमैरो ट्रांसप्लान्ट की प्रक्रिया शुरू होगी। दान में मिलने वाला शरीर यहां पर चिकित्सा महाविद्यालय के छात्रों के अध्ययन में काम आएगा। कार्यशाला में बताया गया कि भारत में हर वर्ष दो लाख किडनी की आवश्यकता रहती है लेकिन मात्र 25 प्रतिशत ही मिल पाती है। अंगदान के क्षेत्र में सबसे अच्छा काम स्पेन में चल रहा है।

कार्यशाला में संभागायुक्त दुबे ने बताया कि इंदौर में अंगदान के क्षेत्र में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। अंगदान करने वाले और दान लेने वाले की आनलाइन पंजीयन की व्यवस्था है। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर अंगदान दिए जाने की व्यवस्था है। अंगदाता परिवार की सहमति के बाद मृत व्यक्ति का 24 घंटे में पोस्टमार्टम किया जाता है। उस समय सरकारी डाक्टर मौजूद रहता है। अंगदाता परिवार के दो सदस्यों को आजीवन स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाता है। इसके साथ परिवार के दो सदस्यों का आजीवन मुफ्त इलाज होता है।

कौन कर सकता है अंगदान

कार्यशाला में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रचना दुबे ने बताया कि कोई भी व्यक्ति जिसे कैंसर, डायबिटिज जैसी घातक बीमारी नहीं है, वह अंगदान कर सकता है। अभी पिछले माह केरल में एक तीन वर्षीय बच्ची का अंगदान हुआ। अंगदान से किडनी, लीवर, त्वचा, छोटी आंत पुन: काम में ली जाती है। आमतौर पर भारत में किडनी की सर्वाधिक मांग है।
इनपुट-आर्इएएनएस

 

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