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नवजात में जन्मजात समस्या

नवजात की देखभाल By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 07, 2012
नवजात में जन्मजात समस्या

एक नवजात शिशु की समस्याओं को समझना काफी मुश्किल होता है, जन्म लेते ही शिशु की देखभाल में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

जन्‍म के बाद नवजात की समस्‍याओं को समझना बहुत मुश्किल होता है, उसे कब और क्या चाहिए इसका खयाल एक मां से बेहतर और कोई नहीं रह सकता है।

Genetic Diseases in Newbornsजन्म लेते ही शिशु की देखभाल में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। उसे कब और कितनी देर में दूध पीलना है और कब उसका डाइपर बदलना है, बच्‍चे की मालिश कब करनी है, आदि का खयाल मां ही कर सकती है। बच्चा सिर्फ रो कर ही अपनी बात कह सकता है इसके बाद मां को यह देखना पड़ता है कि उसके बच्चे को क्या तकलीफ है। कुछ समस्‍यायें ऐसे भी हैं जो बच्‍चे को जन्‍मजात हो सकती हैं।

नवजात में पीलिया

नवजात में सबसे आम समस्‍या पीलिया की है, इस बीमारी में त्वचा और आंखे पीली पड़ जाती हैं। बच्चे की नाक, सिर औऱ जांघ को उंगलियों से दबाएं फिर देखें कि क्या आपके उंगलियों के नीचे की त्वचा पीली पड़ी है या नहीं। बच्चों को जन्म के 3 से 5 दिन में पीलिया हो सकता है और इसको ठीक होने में कुछ दिन लगते है।

क्रेडल कैप

बच्चे की सिर की ऊपरी त्वचा पीली और सफेद परतनुमा और चिपचिपी हो जाती है। सिर पर तेल जमा होने और सिर की त्वचा निकलने से ऐसा होता है। रोजाना बाल धोने व मुलायम ब्रश से कंघी करने से क्रेडल कैप के इलाज में मदद मिलेगी।

बेबी एक्‍ने

इस समस्‍या में बच्‍चे के चेहरे पर लाल रेशेज यानी चकत्‍ते पड़ जाते हैं। आम तौर पर ये जन्म के तीसरे या चौथे हफ्ते में होते हैं। दरअसल प्रेगनेंसी हार्मोन त्वचा में मौजूद तेल ग्रंथियों को उत्तेजित करते हैं, जिससे ऐसा होता है। बच्चे के चेहरे को दिन में एक बार नर्म साबुन से धोएं। उनके कपड़े तेज डिटरजेंट में न धोएं।

थ्रश होना

नवजात को यह बीमारी मुंह में होती है, यह मुंह में होने वाला आम यीस्ट इन्फेशन है। इसके कारण बच्‍चे को दूध पीने में भी समस्‍या होती है।

ब्लॉक्ड टियर डक्ट

जन्म के समय से ही अगर बच्चे की एक या दोनों आंसू की नलियां बंद हों, तो बच्‍चे को यह समस्‍या है। इसके कारण बच्‍चे की आंखें खुल नहीं पाती हैं।  

अम्बिलिकल ग्रैनुलोमा

जन्म के बाद नाभि की नाल का बचा हुआ हिस्सा बढ़ने लगता है। धीरे धीरे ये हिस्सा नमीयुक्त, पीला व लाल  हो जाता है, जिसमें से हल्का खून भी निकलता है। चि‍कित्‍सक सिल्वर नाइट्रेट से इसे सुखाकर इलाज कर सकता है। अगर तब भी कोई फर्क ना पड़े, तो इसे निकालना पड़ सकता है।

अम्बिलिकल हर्निया

एब्डॉमिनल वॉल यानी पेट में छोटा सा छेद हो जाए, तो पेट पर हल्का सा दबाव पड़ने पर भी टिश्यू बाहर आने लगते है। इसे अम्बिलिकल हर्निया कहते है। इसके अधिकतर मामले पहले 12 से 18 महीने में ठीक हो जाते है।

 

अगर आपको अपने लाडले में इस प्रकार की कोई समस्‍या दिखे तो चिकित्‍सक से संपर्क कीजिए। इसके अलावा बच्‍चे की बीमारियों के बारे में जानने के लिए स्‍क्रीनिंग प्रोग्राम जरूर कराइए।

 

 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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