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    संतुलित भोजन के जरिए गर्भावधि मधुमेह को आसानी से नियंत्रित करें

    गर्भावस्‍था By Rahul Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 30, 2013
    संतुलित भोजन के जरिए गर्भावधि मधुमेह को आसानी से नियंत्रित करें

    गर्भावस्था के दौरान मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए संतुलित आहरों का सेवन जरूरी है।

    garbhawadhi madhumeh ko niyantrit kare santulit bhojan

    हमारे आहार का एक बड़ा भाग शर्करा, जिसे ग्लूकोज कहा जाता है, में परिवर्तित हो जाता है। यह ग्लूकोज (शुगर) ही हमें कार्य करने की शक्ति प्रदान करता है। इंसुलिन हमारे शरीर का एक ऐसा हार्मोन होता है जो शरीर को ग्लूकोज इस्तेमाल करने में मदद करता है। यदि शरीर में इंसुलिन की उपयुक्त मात्रा ना हो, तो शरीर ग्लूकोज को कोशिकाओं में नहीं भेज पाता। इससे शरीर को कार्य करने की शक्ति नहीं मिलती। इंसुलिन की शरीर में कमी के कारण ग्लूकोज की मात्रा बहुत बढ़ जाती है। ग्लूकोज की यही अधिक मात्रा 'उच्च रक्त ग्लूकोज" या मधुमेह कहलाती है। गर्भवती महिलाओं में अक्सर हार्मोनल परिवर्तनों के कारण ग्लूकोज की मात्रा अव्यवस्थित हो ही जाती है।

     

    [इसे भी पढ़ें: गर्भावधि मधुमेह से कैसे निपटें]

     

    मधुमेह और आपका भोजनः  मधुमेह में संतुलित आहार एक बड़ी भूमिका निभाता है। यहां तक की सही आहार, नियमित व्यायाम और कुछ अन्य सावधानियां रख कर आप मधुमेह (गर्भकालीन मधुमेह भी) को हरा सकती हैं।

    सही समय पर न संतुलित भोजन करने से रक्त ग्लूकोज के स्तर को बहुत अधिक या बहुत कम होने से रोका जा सकता है। यहां तक कि इंसुलिन की आवश्यकता से भी बच सकती हैं। इसके लिए आहार विशेषज्ञ की सहायता भी ली जा सकती है।

     
    मधुमेह और कार्बोहाइड्रेटः  

    कार्बोहाइड्रेट अर्थात वह भोजन जिसमें अनाज के सत्व तथा शुगर की अधिक मात्रा होती है। जो ग्लूकोज की मात्रा संतुलन में सहायक होती है। इसके लिए आप खाने में चावल, रोटी, आलू, मटर, मक्का, फल, फलों का जूस, दूध, दही न अन्य डेयरी प्रोडक्टस कार्बोहाइड्रेट ले सकती हैं। आपको इस स्थिति में अधिक फाइबर वाले तथा पूरे अनाज वाले कार्बोहाइड्रेट खाने चाहिए। ये खाद्य धीरे-धीरे पचते हैं और रक्त शर्करा के स्तर में तेज वृद्धि को रोकते हैं।

     

    [इसे भी पढ़ें: गर्भावधि मधुमेह की शुरुआत कैसे होती है]

     

    कुछ अन्य स्वस्थ भोजन सुझावः

    • दिन में कम से कम तीन बार ठीक  समय से भोजन करें। भोजन या नाश्ता ना छोडें।
    • सुबह के नाश्ते व दोपहर के भोजन के समय कम कार्बोहाइड्रेट लें, क्योंकी इस समय शरीर में इन्सूलीन अधिक बनता है।
    • भोजन के सभी हिस्सों में कार्बोहाइड्रेट की निश्चित मात्रा लें।  
    • दिन में कम से कम आठ कप लिक्विड लें।
    • कम से कम चीनी और वसा के वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।  
    • खाने में चावल, रोटी, आलू, मटर, मक्का, फल, फलों का जूस, दूध, दही न अन्य डेरी प्रोडक्टस कार्बोहाइड्रेट लें।
    • उचित मात्रा में प्रोटीन व विटामिन लें।    
    • हर रोज एक कप पकी या कच्ची पत्तेदार सब्जियां कटी हुई; एक से दो कप सब्जी का रस पिएं। गहरे हरे और पीले रंग की सब्जियां जैसे पालक, ब्रोकोली, गाजर, टमाटर आदि का सेवन करें। 
    • ताजे फलों का सेवन करें। जूस के बजाए फलों को ही प्राथमिकता देँ।
    • तले पदार्थों के सेवन से बिलकुल दूर रहें।
    • जूस, दूध, दही न अन्य डेरी प्रोडक्टस का इस्तेमाल करें।
    • भोजन के तमय का विशेष ध्यान रखें।
    • मिठाइयों को कहें ना।
    • मांस का सेवन भी कर सकती हैं, लेकिन चिकित्सक की सलाह से।


    एक आहार विशेषज्ञ से अवश्य मिलें और अपना आहार की जरूरत का आकलन करा लें। वह आपको आपके प्रतिदिन की कैलोरी की जरूरत बताएगा और आपके शर्करा के स्तर के आधार पर वह आपको एक संतुलित भोजन कैसे बनाएं जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और पर्याप्त विटामिन और खनिज की सही मात्रा हो की जानकारी देगा।

     

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    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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