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जंग से लेकर पैरालंपिक गोल्‍ड मेडल जीतने तक प्रेरणादायक है मुरलीकांत की कहानी

मेडिकल मिरेकल By Aditi Singh , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 20, 2016
जंग से लेकर पैरालंपिक गोल्‍ड मेडल जीतने तक प्रेरणादायक है मुरलीकांत की कहानी

इच्‍छाशक्ति अगर प्रबल हो और कुछ भी करने का जज्‍बा हो तो कोई भी आपको रोक नहीं सकता, भारत-पाक जंग में अपंग हुए मुरलीकांत पेटकर की कहानी जानने के बाद आपके अंदर भी जोश जाग जायेगा।

मुरलीकांत पेटकर, हम में से कई लोगों ने ये नाम शायद ना सुना हो, पर जिन्होंने सुना वो जानते हैं कि पेटकर एक सही मायने में लीजेंड मैन हैं। जिन्होंने देश की जंग लड़ने से लेकर विकलांगों के खेल पैरालिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। आर्मी में रहते हुए पेटकर बॉक्सिंग करना पंसद करते थे। पेटकर आर्मी में इलेक्ट्रानिक्स और मैकेनिकल इंजिनियर के पद पर थे। आर्मी में होने वाली बॉक्सिंग, स्वीमिंग, शॉटपुट और जैवलिन की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया करते थे। पर किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। इनकी प्रेरणादायक कहानी के बारे में इस लेख में विस्‍तार से जानते हैं।

जंग में हुए अपंग

1965 में भारत और पाकिस्तान के खिलाफ जंग छिड़ गई। हालांकि इस युद्ध में भारत की विजय हुई। लेकिन हजारों सैनिक भात के लिए लड़ते हुए शहीद भी हो गये। कुछ सैनिक गोली का शिकार होकर घायल भी हुए। भारत के लिए लड़ते हुए एक गोली मुरलीकांत के पैर में लगी। इसके कारण ही पेटकर घायल हो गये और फिर सेना से सेवानिवृत्‍त भी हुए।

अपंगता को बनाया वरदान

गोली लगने की वजह से अपंग हुए पेटकर ने हार नहीं मानी। उन्होंने जंग के मौदान को छोड़कर खेल के मैदान में उतरने की सोची। राह यहां भी आसान नहीं थी। पर पेटकर आसान काम करने में शायद यकीन ही नहीं रखते थे। पेटकर में स्लैलम रेसिंग, शॉटपट, टेबल टेनिस और स्वीमिंग गंभीरता से करना शुरू किया। पेटकर ने प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखकर खुद को ट्रेन किया।

तीन साल तक की मेहनत

तीन साल बाद उनकी ये मेहनत सफल हुई। जब 1968 में इजराइल में होने वाली पैरालंपिक्स में भारत की तरफ से उन्हें प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। जहां उन्होंने टेबल टेनिस में दूसरा स्थान पाया। लेकिन स्वीमिंग में पेटकर का प्रदर्शन सराहनीय था।

भारत के पहले गोल्‍ड मेडलिस्‍ट

स्वर्ण पदक की उनकी कोशिश 1972 में जर्मनी में हुए पैरालंपिक्स में पूरी हो गई। पेटकर ने 37.33 सेकंड में 50 मीटर की फ्री स्टाइल स्वीमिंग कर विश्व रिकार्ड कायम किया। इसके कारण उनको स्‍वर्ण पदक मिला और वो भारत के पहले पैरालंपिक गोल्‍ड मे‍डलिस्‍ट बन गये।  

कई खेलों में महारत

यहीं नहीं पेटकर ने इसी पैरालंपिक्स में जैवलिन थ्रो, स्लैलम रेसिंग, और प्रीसीजन जैवलिन थ्रो में भी भाग लिया था। इन तीनों ही खेल के फाइनलिस्ट में पेटकर का नाम था। स्वीमिंग में उनकी शानदार प्रदर्शन के लिए उन्होंने चार अंतर्राष्ट्रीय पदक भी जीते।

 

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