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किशोरों को समझायें दोस्ती का मतलब

परवरिश के तरीके By Aditi Singh , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 28, 2015
किशोरों को समझायें दोस्ती का मतलब

जैसे–जैसे आपके बच्चे बड़े होते जाते हैं, वैसे–वैसे वो अपने दोस्तों के साथ ज्यादा समय व्‍यतीत करना पसंद करते है।

जैसे–जैसे आपके बच्चे बड़े होते जाते हैं, वैसे–वैसे वो अपने दोस्तों के साथ ज्यादा समय व्‍यतीत करना पसंद करते है। एक अध्ययन में पता चला की 2 साल के बच्चे अपने दोस्तों के साथ पूरे दिन में 10 प्रतिशत समय बिताया, 4 साल के बच्चे ने पूरे दिन में 20 प्रतिशत समय बिताया और 7 से 11 साल के बच्चे ने 40 प्रतिशत समय बिताया।

क्या होती है दोस्ती

ऐसा देखा गया है कि जो बच्चे अपने साथियों द्वारा पसंद किये जाते हैं उनका व्यवहार सकारात्मक होता है और उनमें नकारात्मक बातें बहुत हीं कम देखी जाती हैं। जबकि जो बच्चे अपने दोस्तों द्वारा पसंद नहीं किये जाते उनका व्यवहार नकारात्मक होता है एवं उनमें सकारात्मक बातें बहुत हीं कम देखी जाती हैं। बच्चों के दोस्त उनके लिए अच्छा वातावरण एवं माहौल बनाते हैं, जिसमें आपका बच्चा सहज महसूस करता है और जहाँ सहयोग और नेतृत्व के गुण सीखता है और सामूहिक रूप से मंजिल पाने की बात भी सीखता है। वो बच्चे जो अपने साथियों द्वारा पसंद किये जाते हैं,  वे सामाजिक और नैतिक समझ प्राप्त करते हैं जिससे वे समाज में अच्छी तरह से रह सकते हैं।

बच्चों की दोस्ती क्यों महत्वपूर्ण है?

विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों के दोस्त उनके सर्वांगीण विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन उनके साथी अच्छे होने चाहिए क्योंकि वे जैसे होंगे आपके बच्चे भी वैसे हीं बन जाएंगे। यह ध्यान रखें कि  छोटे बच्चे अपने दोस्त को अपने जैसा हीं बनाना चाहते हैं और आपका भोला भाला बच्चा जाने अनजाने में उनके जैसा बनता चला जाता है। यह तथ्य है की आदमी जितना बड़ा होता है उसका प्रभाव उतना ही ज्यादा पड़ता है,  इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने बच्चे का इस सम्बन्ध में मार्गदर्शन करें कि उनके दोस्त कैसे होने चाहिए। अपने बच्चों को ऐसे बच्चों से दूर रखें जिनका उनपर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।आप अपने बच्चे को गलत संगत से बचा सकते है, उन्हें अच्छे-बुरे दोस्त की पहचान करना सिखला सकते हैं एवं उनका यह कहकर आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं कि वे जैसे हैं, अच्छे हैं। बच्चे के साथ किसी दोस्त की तरह अच्छा सम्बन्ध बनायें रखें, ताकि वे अपनी ख़ुशी या कोई समस्या आपसे बोल सकें।


उन्हें अनुशासित होना, बड़ों एवं शिक्षकों की इज्जत करना सिखलाएँ। आप उन्हें अपने साथियों के गलत दबाव से निपटने के उपाय बताएं और अपने पारिवारिक मूल्यों की रक्षा करने की भी बात समझाएं।

 

Image Source-Getty

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