• shareIcon

कहीं जबरदस्ती खिलाने से तो नहीं मोटा हो रहा है आपका बच्चा?

बच्‍चे का स्‍वास्‍थ्‍य By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 08, 2018
कहीं जबरदस्ती खिलाने से तो नहीं मोटा हो रहा है आपका बच्चा?

मां-बाप अक्सर ये सोचते हैं कि उनका बच्चा जितना ज्यादा खाएगा, वो उतना ही स्वस्थ रहेगा। कई बार बच्चे स्वयं भी खाने में आनाकानी करते हैं, ऐसे में कुछ मां-बाप बच्चों को जबरदस्ती खाना खिलाते हैं।

मां-बाप अक्सर ये सोचते हैं कि उनका बच्चा जितना ज्यादा खाएगा, वो उतना ही स्वस्थ रहेगा। कई बार बच्चे स्वयं भी खाने में आनाकानी करते हैं, ऐसे में कुछ मां-बाप बच्चों को जबरदस्ती खाना खिलाते हैं। लेकिन आपको बता दें कि बच्चों को जबरदस्ती खाना खिलाना उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। बच्चों में होने वाले ज्यादातर मोटापे का कारण मां-बाप द्वारा शुरुआत में खाने के लिए की जाने वाली यही जिद होती है। आइये आपको बताते हैं कि जबरदस्ती खाना खिलाना बच्चों के स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित कर सकता है।

बच्चे हो जाते हैं मोटापे का शिकार

यदि बच्चों को प्लेट में बचा एक-एक दाना खाने पर जोर दिया जाता है, तो वे अपने शरीर के संकेतों को समझना बंद कर देते हैं और तब तक खाते हैं, जब तक उनके माता-पिता खुश न हो जाएं। ऐसे में बच्चे अपने शरीर की जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं। एक्स्ट्रा खाया हुए खाने से मिली कैलोरी शरीर में फैट के रूप में जमा होती रहती है, जिससे बच्चा मोटापे का शिकार हो जाता है। इसलिए बच्चों को हमेशा उतना ही खाना खिलाएं, जितना उनकी इच्छा हो या जितना वो खाना चाहें।

इसे भी पढ़ें:- बच्चों की हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित करता है शोर, जानें खतरे

नहीं मिलता बच्चों को पोषण

मां-बाप द्वारा जबरदस्ती खाना खिलाने की जिद बच्चों को मोटापे का शिकार बना सकती है। दरअसल खाना खाने का भी शरीर का अलग विज्ञान है। खाने को अच्छी तरह पचने के लिए और उससे ज्यादा से ज्यादा पोषण पाने के लिए जरूरी है कि खाया गया खाना पूरी इच्छा और खुशी से खाया गया हो। ऐसे में जब आप बच्चों को जबरदस्ती खाना खिलाते हैं, तो उनके शरीर को न तो उस खाने से पोषण मिलता है और न ही वो खाना पूरी तरह पच पाता है। खाने को पचाने के लिए जिन रसायनों की जरूरत होती है वो पूरी तरह रस लेकर खाए गए खाने से ही बनते हैं।

कमजोरी और सुस्ती की समस्या

जरूरत से ज्यादा खाना खिलाने से शरीर में एक तरह का न्यूरोबायलॉजिकल इम्बैलेंस हो जाता है। एक बार इसका लेवल बॉडी में गिरता है, तो बच्चे को कमजोरी महसूस होती है और वो दिनभर थका-थका रहता है। ऐसे में जब बच्चा मोटापा का शिकार हो जाता है, तब बॉडी में एनर्जी बनाए रखने के लिए उसे हमेशा कुछ न कुछ खाना पड़ता है। हालांकि, बार-बार खाने वाला व्यक्ति अपनी इस आदत से गिल्ट महसूस करता रहता है, लेकिन सिचुएशन ऐसी बन जाती है कि वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता।

इसे भी पढ़ें:- बच्चों में उदासी और मायूसी हो सकते हैं सायकॉटिक डिप्रेशन के लक्षण

कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारी

जरूरत से ज्यादा खाना खिलाने से बच्चे के शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ जाता है, जिससे दिल और दिमाग दोनों प्रभावितो होता है। कोलेस्ट्रॉल की बढ़ी हुई मात्रा दिल की कई गंभीर बीमारियां जैसे- हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर और स्ट्रोक का खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए बच्चों को जबरदस्ती खाना न खिलाएं। अगर बच्चे बार-बार खाना खाने में आनाकानी करते हैं, तो उन्हें उनकी पसंद के कुछ हेल्दी फूड्स खिलाएं मगर जबरदस्ती न करें।

फाइबरयुक्त हेल्दी चीजें खिलाएं

अगर बच्चा खाना खाने में आनाकानी कर रहा है, तो उसे कुछ ऐसे आहार खिलाएं जिससे उसके शरीर को पोषण मिले और वो आसानी से खा भी ले जैसे ड्राई फ्रूट्स, दूध, वेजिटेबल सूप, दलिया आदि। इन सभी फूड्स में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए इनके सेवन से पेट देर तक भरा रहता है और शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व भी मिल जाते हैं।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Child Health in Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK