Food Related Diseases: बारिश के मौसम में बढ़ जाती हैं खानपान से जुड़ी बीमारियां, एक्‍सपर्ट से जानिए बचाव

Updated at: Aug 04, 2020
Food Related Diseases: बारिश के मौसम में बढ़ जाती हैं खानपान से जुड़ी बीमारियां, एक्‍सपर्ट से जानिए बचाव

 बारिश के मौसम में खुद का ख्‍याल रखना बहुत जरूरी होता है। अगर आप सीनियर सिटिजन हैं तो आप विशेष रूप से खुद की देखभाल करनी चाहिए।  

Atul Modi
अन्य़ बीमारियांWritten by: Atul ModiPublished at: Aug 04, 2020

हर साल हम बेहद खुशी के साथ मानसून का स्वागत करते हैं। मानसून आते ही चिलचिलाती गर्मी से राहत मिलती है। मानसून तेज तापमान को एकदम से कम कर देता है, जलाशयों और भूजल स्तर की भरपाई करता है और पानी की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों में खुशहाली लाता है। चूंकि कृषि मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर होती है, इस लिहाज से देश की जीडीपी में भी  मानसून की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। इस वजह से, मानसून के मौसम का देशभर में लगभग सभी राज्यों को इंतजार रहता है।

हालांकि बारिश बाढ़ और विभिन्न बीमारियों के रूप में दूसरी परेशानियां भी लेकर लाती है। मौजूदा दौर में जब हम कोविड -19 महामारी से जूझ रहे हैं, तो हमारी चिंताएं और अधिक गहरा रही हैं क्योंकि इसके साथ बारिश और उससे उपजी बीमारियां हमारे हेल्थ केयर सिस्टम पर और दबाव डाल सकती हैं, जो कि पहले ही गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है। बारिश के दौरान बीमारियां अचानक बढ़ जाती हैं, चाहे वह मौसमी फ्लू हो, जल जनित या वेक्टर-जनित रोग हो, उनके कई अतिव्यापी लक्षण होते हैं।

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मेडिओर हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट मेडिसिन एंड इंचार्ज, डॉ. मनोज शर्मा कहते हैं, "चिकित्सकों के लिए जांच के समय भी बड़ी दुविधा है, यहां तक कि साधारण मौसमी फ्लू या वायरल बुखार जैसी हल्की बीमारियों में भी, उन रोगियों की स्क्रीनिंग करनी पड़ सकती है, क्योंकि कोविड -19  का स्पेक्ट्रम बहुत ही विविध है, जो जिंदगी के लिए खतरा बन सकता है।"

मानसून में होने वाले रोग 

मानसून के दौरान डेंगू बुखार, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ते हैं। इन सभी बीमारियों के लक्षण हैं- तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, इत्यादि। पर अगर इस तरह के रोगी पर कोरोना का भी सह-संक्रमण होता है, तो इसके गंभीर प्रभाव हो सकते हैं। डेंगू का उदाहरण लें जहां रोगी पहले से परेशानी में हो और अगर कोविड-19  की वजह से उसे  सांस लेने में भी तकलीफ हो जाये, तो इससे पीड़ित व्यक्ति के लिए मुश्किल घड़ी आ सकती है।

मानसून में बढ़ जाती हैं खानपान से जुड़ी बीमारियां

डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार, इस मौसम में गैस्ट्रोइंटेराइटिस, हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस जैसी खाद्य और जल जनित बीमारियां भी बढ़ जाती हैं क्योंकि आदर्श तापमान के साथ आर्द्र और गीला वातावरण सूक्ष्मजीवों को बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। इन बीमारियों का निश्चित रूप से कोरोना महामारी पर प्रतिकूल रूप से प्रभाव पड़ेगा, जिससे बीमारी और मृत्यु दर दोनों में वृद्धि होगी।

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मानसून में होने वाली बीमारियों से बचने के उपाय 

डॉ. मनोज शर्मा कहते हैं कि, जो भी परिस्थितियां हैं, हमें व्यक्तिगत स्तर पर इस बहु-आयामी हमले से खुद को तैयार करना और अपने आप को बचाना चाहिए, साथ ही साथ इस पर काबू पाने में अधिकारियों की मदद करनी चाहिए। वर्तमान में हम कोरोनो वायरस से जूझ रहे हैं और हमने अच्छा प्रदर्शन भी किया है, लेकिन हम डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक रोगों के साथ अपनी लड़ाई को अनदेखा नहीं कर सकते हैं और यह भी हमें ध्यान में रखना होगा कि यह लड़ाई किसी भी तरह से छोटी नहीं है।

बरसात के मौसम में सावधानी बरतना मुश्किल है लेकिन हम प्रेक्टिकल होकर इसमें अपना योगदान दे सकते हैं। समुचित स्वच्छता बनाए रखना, सेनेटाइजेशन और स्वच्छ पानी का उपयोग हमें इनमें से अधिकांश बीमारियों से छुटकारा दिला सकता है। मच्छरों से होने वाली बीमारियों के लिए उनकी प्रजनन क्षमता को रोकना पड़ता है, इसके लिए अपना इलाका साफ-सुथरा रखें,  कहीं पानी नहीं भरे। साथ ही  मच्छरों के काटने पर रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और खुद को ढक कर रखें। 

डॉ. मनोज शर्मा कहते हैं कि, आज समय की मांग है कि हम पौष्टिक आहार लेकर, पर्याप्त नींद लेकर और नियमित व्यायाम के माध्यम से अपनी प्रतिरक्षा को मजबूत करके खुद को स्वस्थ रखें ।

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बारिश के मौसम में वरिष्‍ठ ना‍गरिक खुद का कैसे करें देखभाल? 

डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार, बरसात का मौसम वरिष्ठ नागरिकों के लिए अपने प्रियजनों के साथ समय बिताने और घर पर आराम करने का सही समय है। लेकिन इस मौसम के दौरान, बड़ों की पाचन क्षमता कमजोर हो जाती है। इसलिए स्ट्रीट जंक फूड से बचें  और फल, सब्जियों और किसी भी फाइबर युक्त आहार को डाइट में शामिल करें। सेब, केला, नाशपाती जैसे फल पाचन में सुधार कर सकते हैं।

स्वस्थ आहार के अलावा, वरिष्ठ नागरिकों को बालकनी, छत, बरामदे, बगीचे आदि जैसी गीली सतहों पर चलते समय अतिरिक्त सार-संभाल की आवश्यकता है। आप चलते समय कोई सपोर्ट का उपयोग करें और सुरक्षित रहें । इन जगहों पर दुर्घटनाओं से बचने के लिए आप एंटी-स्लिप रबर मैट लगवाने पर विचार कर सकते हैं।

इनपुट्स: डॉ. मनोज शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट मेडिसिन एंड इंचार्ज, मेडिओर हॉस्पिटल, कुतब इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली 

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