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स्तनपान छुड़ाने से पहले शिशु में डालें इन 5 फूड्स की आदत, हमेशा रहेगा स्वस्थ

नवजात की देखभाल
By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 27, 2018
स्तनपान छुड़ाने से पहले शिशु में डालें इन 5 फूड्स की आदत, हमेशा रहेगा स्वस्थ

बच्चे को स्तनपान की आदत छुड़ाने से पहले उनमें कुछ हेल्दी फूड्स खाने की आदत डाल देनी चाहिए ताकि बाद में स्तनपान छोड़ने पर उसका विकास प्रभावित न हो और बच्चा खाने-पीने में ज्यादा आनाकानी न करे।

Quick Bites
  • 6 माह बाद शिशु को ठोस आहार देना शुरू किया जाता है।
  • शिशु को दाल का पानी देना सबसे अच्छा होता है।
  • छोटे बच्चों को खट्टी-मीठी चीजें बहुत पसंद होती हैं।

जन्म से 6 माह तक शिशु को मां का दूध ही पिलाना पड़ता है क्योंकि ठोस आहार पचाने में तब शिशु का पेट सक्षम नहीं होता है। बच्चे के संपूर्ण पोषण के लिए बाहरी आहार भी जरूरी है इसलिए 6 माह बाद उसे थोड़ा-थोड़ा ठोस आहार देना शुरू किया जाता है। लगभग एक से डेढ़ साल की उम्र में बच्चे के स्तनपान की आदत छुड़वा देनी चाहिए क्योंकि तब शिशु बड़ा हो जाता है और उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी तत्व उसे इन्हीं आहारों से मिलते हैं। बच्चे को स्तनपान की आदत छुड़ाने से पहले उनमें कुछ हेल्दी फूड्स खाने की आदत डाल देनी चाहिए ताकि बाद में स्तनपान छोड़ने पर उसका विकास प्रभावित न हो और बच्चा खाने-पीने में ज्यादा आनाकानी न करे।

दाल का पानी

शिशु जब 6 महीने का हो जाए तो उसे कुछ दाल का पानी देना सबसे अच्छा होता है। दाल का पानी तरल होने के कारण शिशु का पेट उसे आसानी से पचा भी लेता है और इससे शिशु को दाल में मौजूद विटामिन्स और प्रोटीन्स भी मिल जाते हैं। शिशु को अरहर, मूंग और मसूर की दाल का पानी दिया जा सकता है। उड़द, चना, मटर आदि दालों का पानी शिशु का पेट खराब कर सकता है इसलिए इन्हें शिशु को नहीं देना चाहिए। ध्यान रखें शुरुआत में शिशु को दाल का सादा पानी ही दें। इसे फ्राई करने से इसकी गरिष्ठता बढ़ जाएगी।

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फल

छोटे बच्चों को खट्टी-मीठी चीजें बहुत पसंद होती हैं। इसलिए उन्हें खट्टे-मीठे फलों की आदत डलवाना आसान होता है। फलों से उन्हें पोषण भी मिलता है और वो इसे आसानी से खा भी लेते हैं। बच्चों को फल देते समय इस बात का ध्यान रखें कि फल मौसमी हो, अन्यथा कई बार ये नुकसान भी कर सकते हैं। शिशु जब फल खाने लायक न हो तो उसे फलों का जूस भी चम्मच से पिला सकते हैं लेकिन इसके लिए पैकेटबंद जूस से बेहतर घर पर ताजे बने जूस होते हैं।

दांत निकलते समय

जब बच्चे के दांत निकलने लगते हैं तो वो अपने आसपास की ठोस चीजों को मुंह में भरने लगता है। दांत निकलने के कारण मुंह में सुरसुराहट महसूस होती है। ठोस चीजों पर मसूड़ा चलाने से उसे इसमें राहत मिलती है इसलिए बच्चे ऐसा करते हैं। ऐसे समय में बच्चों को कुछ ऐसा आहार दिया जा सकता है जो ठोस हो और जिन्हें उंगलियों में पकड़कर खाया जा सके। जैसे गाजर, नाशपाती, सेब आदि।

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वेजिटेबल सूप

बच्चों के शरीर को पोषण के लिए ढेर सारे विटामिन्स, मिनरल्स और प्रोटीन्स की जरूरत पड़ती है इसलिए उन्हें हेल्दी आहार देना जरूरी है। ढेर सारी पौष्टिक सब्जियों से बना वेजिटेबल सूप आपके बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद है और इससे शिशु का पेट भी जल्दी भर जाता है। वेजिटेबल सूप में मौसमी सब्जियों के इस्तेमाल से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है और इससे शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती है।

खिचड़ी

खिचड़ी सुपाच्य होती है इसलिए इसे शिशु को आसानी से खिलाया जा सकता है। दाल और चावल से बनी सादी खिचड़ी आपको भले साधारण लगती हो मगर इससे शिशु के शरीर को एनर्जी और कई पौष्टिक तत्व मिलते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि खिचड़ी में दाल की मात्रा थोड़ी ज्यादा रखें और इसे थोड़ा गीला बनाएं न कि सूखा। गीली होने पर दाल-चावल अच्छे से पक जाते हैं और बच्चे को इन्हें पचाने में परेशानी नहीं होती है।

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Written by
Anurag Gupta
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागFeb 27, 2018

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